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Rupee Falls To Record Low: डॉलर के मुकाबले रुपया 96.05 पर पहुंचा, PM मोदी ने की थी विदेशी मुद्रा बचाने की अपील..

Rupee Falls To Record Low: डॉलर के मुकाबले रुपया 96.05 पर पहुंचा, PM मोदी ने की थी विदेशी मुद्रा बचाने की अपील..

Rupee Falls To Record Low: भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। 15 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर 96.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.64 के ऑल टाइम लो पर बंद हुआ था।

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपए में लगातार कमजोरी देखी जा रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें और मिडिल ईस्ट तनाव इसी तरह बढ़ते रहे, तो रुपया जल्द ही 100 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।

क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया?

रुपए में गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है।

मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ा दबाव

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

होर्मुज रूट में सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर खरीद रहे हैं। इससे डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। तेल महंगा होने का मतलब है कि भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ गया है।

डॉलर इंडेक्स मजबूत होने का असर

दुनिया की प्रमुख 6 करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला डॉलर इंडेक्स 99.05 के स्तर पर पहुंच गया है।

जब ग्लोबल मार्केट में डॉलर मजबूत होता है, तो भारतीय रुपया समेत एशियाई करेंसी कमजोर होने लगती हैं।

विदेशी निवेशक निकाल रहे पैसा

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 4,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेच दिए। इससे बाजार से डॉलर बाहर जा रहे हैं और रुपए की वैल्यू कमजोर हो रही है।

बढ़ती महंगाई ने बढ़ाई चिंता

भारत में थोक महंगाई दर (WPI) साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ यानी आयातित महंगाई का खतरा बढ़ गया है। इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।

रुपए में गिरावट का आम लोगों पर क्या असर होगा?

1. पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे हो सकते हैं

डॉलर महंगा होने से तेल आयात की लागत बढ़ती है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर पड़ सकता है।

2. मोबाइल और लैपटॉप महंगे होंगे

भारत में बिकने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक्स और उनके पार्ट्स आयात किए जाते हैं।

रुपया कमजोर होने से मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं।

3. विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा

विदेश जाने, पढ़ाई करने या डॉलर में फीस भरने वाले लोगों को अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।

4. खाने-पीने की चीजों पर असर

पेट्रोकेमिकल उत्पाद, प्लास्टिक और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।

OPEC उत्पादन घटने से और बढ़ी चिंता

रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक अप्रैल में OPEC देशों का तेल उत्पादन पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर रहा।

सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई प्रभावित रहने पर बाजार को सामान्य होने में 2027 तक का समय लग सकता है।

JP Morgan की बड़ी चेतावनी

इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan Chase ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर होर्मुज रूट अगले महीने खुल भी जाता है, तब भी इस साल तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सप्लाई और टैंकर की कमी के कारण बाजार को सामान्य होने में समय लगेगा।

PM मोदी ने की थी विदेशी मुद्रा बचाने की अपील

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने और फिजूलखर्ची कम करने की अपील की थी।

सरकार ने डॉलर की निकासी कम करने के लिए कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ भी बढ़ा दिए हैं।

डॉलर के मुकाबले रुपया कैसे कमजोर हुआ?

साल 1 डॉलर की कीमत
1947 ₹4
1983 ₹10
1991 ₹20
1993 ₹30
1998 ₹40
2012 ₹50
2014 ₹60
2018 ₹70
2022 ₹80
2025 ₹90
2026 ₹95+

करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

जब डॉलर के मुकाबले किसी देश की मुद्रा की वैल्यू घटती है, तो उसे करेंसी डेप्रिसिएशन कहा जाता है।

किसी देश के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व, आयात-निर्यात, निवेश और वैश्विक हालात का सीधा असर उसकी करेंसी पर पड़ता है।

अगर भारत के पास पर्याप्त डॉलर रिजर्व होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा, लेकिन डॉलर की कमी होने पर रुपया कमजोर होता जाएगा।

क्या रुपया 100 के पार जा सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर:

  • मिडिल ईस्ट तनाव जारी रहा,
  • कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं,
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही,

तो आने वाले महीनों में रुपया 100 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।