दिव्यांग पीड़ित ने जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित दुष्यंत कुमार गंगवार पुत्र छहम्मा लाल गंगवार ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि सदर तहसील क्षेत्र के नौगवां पकड़िया स्थित वसुंधरा कॉलोनी में गाटा संख्या 121(क) के अंश में उनका लगभग 480 वर्ग मीटर का प्लॉट स्थित है। उन्होंने बताया कि वह अपने दस्तावेजों और कानूनी अधिकारों के आधार पर उक्त भूमि पर निर्माण कार्य करा रहे थे।
दुष्यंत कुमार ने कहा कि वह दिव्यांग हैं और लंबे समय से अपने आशियाने का सपना पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जमा पूंजी और मेहनत से निर्माण कार्य शुरू कराया था, लेकिन तभी क्षेत्र के भूमिया और कॉलोनी से जुड़े व्यक्ति मानवेंद्र सिंह छाबड़ा उर्फ ढिल्लो वहां पहुंचे और कथित दबंगई दिखाते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया।
“मेरा प्लॉट वैध है, फिर भी मुझे परेशान किया जा रहा” – पीड़ित
पीड़ित दुष्यंत कुमार का कहना है कि मानवेंद्र सिंह छाबड़ा यह दावा कर रहे हैं कि संबंधित प्लॉट गाटा संख्या 120 में आता है, जबकि राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट और अन्य अभिलेख साफ तौर पर यह साबित करते हैं कि उनका प्लॉट गाटा संख्या 121(क) का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर 2024 को राजस्व विभाग की टीम द्वारा मौके पर पैमाइश कर रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से उनकी भूमि को गाटा संख्या 121(क) का हिस्सा माना गया। इतना ही नहीं, उन्होंने सिविल कोर्ट से भी कमीशन की कार्रवाई पूरी करा ली है और संबंधित दस्तावेज उनके पास सुरक्षित मौजूद हैं।
पीड़ित का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और दबाव बनाकर उनका निर्माण कार्य रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह एक दिव्यांग व्यक्ति हैं और उनके साथ हो रही इस कार्रवाई से वह मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद परेशान हैं।
सरकारी और पट्टे की जमीन बेचने का भी आरोप
दुष्यंत कुमार गंगवार ने अपने शिकायती पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मानवेंद्र सिंह छाबड़ा द्वारा वसुंधरा कॉलोनी का जो लेआउट पास कराया गया है, उसमें गाटा संख्या 118 और गाटा संख्या 130 की सरकारी एवं पट्टे की जमीन को भी शामिल कर लिया गया है।
पीड़ित का आरोप है कि इन जमीनों को लेआउट में शामिल कर अवैध रूप से प्लॉटिंग और बिक्री की गई है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो बड़े स्तर पर जमीन घोटाले और राजस्व अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे दिव्यांग पीड़ित की पूरी बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए।
सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी ने वसुंधरा कॉलोनी के लेआउट, भूमि अभिलेखों, पैमाइश रिपोर्ट और सरकारी जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्तर पर अवैध कब्जा, फर्जीवाड़ा या दबंगई सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठा दिव्यांग परिवार
पीड़ित दुष्यंत कुमार का कहना है कि उन्हें प्रशासन और सरकार से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने मांग की है कि उनके दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दबंगों के हस्तक्षेप से उनकी जमीन को मुक्त कराया जाए ताकि वह अपना निर्माण कार्य पूरा कर सकें।
उन्होंने कहा कि एक दिव्यांग व्यक्ति होने के बावजूद वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई करता है तो न केवल उन्हें न्याय मिलेगा बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में दबंगई करने वालों पर भी रोक लगेगी।
पीलीभीत प्रशासन की सख्ती पर टिकी निगाहें
पूरा मामला अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीनों और लेआउट से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल पीड़ित परिवार प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद में है, जबकि पूरे मामले पर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।