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Bakrid: “ईदगाह भर जाए तब भी सड़कों पर नमाज नहीं” — कानून, सफाई और शांति व्यवस्था पर CM योगी का सख्त और साफ निर्देश

Bakrid से पहले UP में CM योगी का सख्त निर्देश, ईदगाह भर जाए तब भी सड़कों पर नमाज नहीं, कानून और शांति व्यवस्था पर फोकस।

बकरीद से पहले यूपी में प्रशासन सख्त, साफ संदेश — “ईदगाह भर जाए तब भी सड़कों पर नमाज नहीं”; कानून, सफाई और शांति व्यवस्था पर विशेष फोकस

त्योहार की तैयारियों के बीच प्रशासन का बड़ा संदेश, सार्वजनिक सड़कों पर नमाज और खुले स्थानों पर कुर्बानी को लेकर जारी हुई सख्त गाइडलाइन

उत्तर प्रदेश में बकरीद को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के कई जिलों में पीस कमेटी बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और प्रशासन की ओर से साफ शब्दों में यह संदेश दिया जा रहा है कि त्योहार पूरी आस्था और स्वतंत्रता के साथ मनाया जाए, लेकिन कानून व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और सामाजिक सौहार्द से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हुई बैठकों में प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि यदि ईदगाह या मस्जिदों में जगह कम पड़ती है तब भी सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक सड़कें आवागमन के लिए होती हैं और उन्हें किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जा सकता। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि धार्मिक आयोजन निर्धारित स्थलों पर ही संपन्न हों, ताकि आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े और कानून व्यवस्था बनी रहे।

पीस कमेटी बैठकों में प्रशासन और धार्मिक प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति

बकरीद से पहले कई जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, धर्मगुरुओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पीस कमेटी बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य त्योहार को शांतिपूर्ण, स्वच्छ और कानून के दायरे में संपन्न कराना है।

अधिकारियों ने धार्मिक प्रतिनिधियों से अपील की कि नमाज केवल मस्जिदों और ईदगाहों में ही अदा की जाए। यदि कहीं भी भीड़ अधिक होती है तो नमाज को अलग-अलग शिफ्ट में कराया जाए, लेकिन सड़क या सार्वजनिक स्थानों का उपयोग न किया जाए। प्रशासन का मानना है कि त्योहार के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश — “सड़कें चलने के लिए हैं, धार्मिक आयोजन के लिए नहीं”

प्रदेश सरकार की ओर से भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में स्पष्ट कहा कि नमाज पढ़ने से किसी को रोका नहीं जाएगा, लेकिन सड़क पर नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर जगह कम है तो शिफ्ट में नमाज पढ़ी जा सकती है, लेकिन सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध करना स्वीकार नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून का शासन सभी पर समान रूप से लागू होता है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता या अव्यवस्था को सख्ती से रोका जाए।

कुर्बानी को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश, खुले स्थानों पर प्रतिबंध

बकरीद को लेकर जारी दिशा-निर्देशों में कुर्बानी से जुड़े नियमों पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या खुले इलाकों में कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी। केवल निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी दी जा सकेगी।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पूरी तरह गैरकानूनी है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कई जिलों में पहले से चिन्हित स्थानों की सूची तैयार की जा रही है, जहां नियमों के अनुसार कुर्बानी की अनुमति दी जाएगी।

सोशल मीडिया पर निगरानी, अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन इस बार सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कुर्बानी या धार्मिक गतिविधियों से जुड़े भड़काऊ वीडियो, फोटो या अफवाह फैलाने वाले पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस विभाग ने साइबर सेल और निगरानी टीमों को सक्रिय कर दिया है ताकि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश को तुरंत रोका जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी हाई अलर्ट

प्रदेश के कई जिलों में पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान शुरू कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम, ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जा रही है।

पिछले वर्षों में जहां-जहां तनाव की स्थिति बनी थी, उन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सफाई व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

बकरीद के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने नगर निकायों को विशेष निर्देश दिए हैं। कुर्बानी के बाद निकलने वाले अपशिष्ट का तुरंत निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी क्षेत्र में गंदगी या दुर्गंध की स्थिति न बने।

नगर निगमों और नगर पालिकाओं को कहा गया है कि त्योहार के दौरान पानी, बिजली और सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए। साथ ही नालियों या सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं के अवशेष फेंकने पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी शांति और कानून पालन की अपील की

कई धार्मिक संगठनों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी लोगों से अपील की है कि त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जाए और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।

धर्मगुरुओं ने कहा कि कानून का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और बकरीद भाईचारे, त्याग और अनुशासन का पर्व है। कई जगहों पर यह भी अपील की गई कि नमाज केवल निर्धारित स्थलों पर अदा की जाए और सोशल मीडिया पर किसी भी भड़काऊ सामग्री से बचा जाए।

“शांति और कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता” — प्रशासन

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं बल्कि त्योहार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

इसी वजह से इस बार बकरीद को लेकर पहले से ज्यादा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। पीस कमेटी बैठकों, सुरक्षा व्यवस्था, सोशल मीडिया निगरानी और साफ-सफाई के इंतजामों के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि त्योहार के दौरान प्रदेश में कहीं भी तनाव या अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।

प्रदेश में जारी इन तैयारियों और सख्त निर्देशों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार प्रशासन बकरीद को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मूड में नहीं है।