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US-Iran War: कुछ घंटों में मिल सकती कई गुड न्यूज़, अमेरिका-ईरान समझौते के करीब, रुबियो के बयान से दुनिया में हलचल

US-Iran War Update: अमेरिका-ईरान समझौते के करीब, होर्मुज संकट पर बड़ा संकेत। रुबियो के बयान से दुनिया में हलचल तेज।

चंद घंटों में दुनिया को मिल सकती है राहत भरी खबर! अमेरिका-ईरान समझौते के बेहद करीब, होर्मुज संकट पर रुबियो का बड़ा संकेत

मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी तनाव, युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अब दुनिया को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद दिखाई देने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद संवेदनशील वार्ताओं को लेकर संकेत मिले हैं कि दोनों देश किसी बड़े समझौते के करीब पहुंच चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ शब्दों में कहा है कि अगले कुछ घंटों में एक बड़ी घोषणा हो सकती है, हालांकि यह अंतिम समझौता नहीं होगा, लेकिन यह युद्धविराम और तनाव कम करने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है होर्मुज जलडमरूमध्य — वही समुद्री रास्ता जिससे दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल की सप्लाई होती है। पिछले कई महीनों से इस इलाके में तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिलाकर रख दिया था। अब इसी जलमार्ग को दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनती दिखाई दे रही है।

ट्रंप का दावा — समझौता लगभग तय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का बड़ा हिस्सा तय हो चुका है और अब केवल अंतिम बिंदुओं पर बातचीत बाकी है। ट्रंप ने कई पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से बातचीत के बाद कहा कि “समझौते की अंतिम रूपरेखा जल्द सामने लाई जा सकती है।”

बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार का प्रस्ताव शामिल है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके और वैश्विक तेल सप्लाई बहाल हो जाए।

आखिर क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य और क्यों मचा है इतना बवाल?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बनने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला।

ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर दबाव बनाना शुरू किया था, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर सख्त प्रतिबंध और नौसैनिक कार्रवाई तेज कर दी थी। इसी कारण वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी।

समझौते में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में कई बड़े बिंदु शामिल हैं। इनमें—

  • होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणबद्ध तरीके से खोलना
  • ईरान द्वारा समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटाना
  • ईरान को सीमित तेल निर्यात की अनुमति
  • अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ राहत
  • विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को आंशिक रूप से मुक्त करना
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत

जैसे अहम मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं।

हालांकि अभी परमाणु हथियारों, यूरेनियम भंडारण और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जैसे सबसे संवेदनशील मुद्दों पर पूरी सहमति नहीं बनी है। यही कारण है कि रुबियो ने इसे “अंतिम समझौता” मानने से इनकार किया है।

पाकिस्तान भी निभा रहा भूमिका

इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने तेहरान तथा अन्य देशों के नेताओं के साथ लगातार बातचीत की है। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल ही में तेहरान जाकर ईरानी नेतृत्व से मुलाकात की थी और तनाव कम करने की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाया था।

दुनिया की नजरें अब अगले कुछ घंटों पर

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक कूटनीति से जुड़े सभी बड़े देश अब अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रहे हैं। यदि यह समझौता सफल होता है तो मध्य पूर्व में महीनों से जारी युद्ध जैसे हालात में बड़ी राहत मिल सकती है।

हालांकि अभी भी कई जटिल मुद्दे बाकी हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लेकिन लंबे समय बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि युद्ध की आग से निकलकर बातचीत और समझौते की दिशा में ठोस कदम बढ़ रहे हैं।