उन्नाव एक्सप्रेस-वे पर मौत बनकर पलटी डबल डेकर बस
उन्नाव के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार की सुबह ऐसा भयावह मंजर सामने आया, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार में दौड़ रही डबल डेकर एसी बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। कुछ ही सेकंड में चीख-पुकार, टूटे शीशे, सड़क पर बिखरा सामान और मदद के लिए तड़पते यात्री दिखाई देने लगे। हादसा इतना भीषण था कि कई यात्री बस की खिड़कियों से सीधे एक्सप्रेस-वे के नीचे जा गिरे। एक यात्री का पैर कटकर शरीर से अलग हो गया, जबकि कई लोग बस के भीतर फंस गए। इस दर्दनाक हादसे में दरोगा और कैदी समेत 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
सुबह 5 बजे हुआ हादसा, कांप उठा एक्सप्रेस-वे
यह हादसा उन्नाव जिले के औरास थाना क्षेत्र में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के माइलस्टोन 262 के पास मंगलवार सुबह करीब 5:15 से 5:30 बजे के बीच हुआ। दिल्ली से बिहार की ओर जा रही डबल डेकर एसी बस में लगभग 30 यात्री सवार थे। अधिकतर यात्री गहरी नींद में थे, तभी अचानक बस बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई और फिर पलटते हुए किनारे लगी रेलिंग पर जा अटकी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस की रफ्तार काफी तेज थी। हादसे से ठीक पहले बस डगमगाई और फिर जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। टक्कर इतनी तेज थी कि कई यात्री सीटों से उछलकर खिड़कियों से बाहर जा गिरे।
ड्राइवर को झपकी आने की आशंका
प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हादसे की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर को आई झपकी को माना है। बताया जा रहा है कि लंबी दूरी और लगातार ड्राइविंग के कारण चालक का संतुलन बिगड़ गया। एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार के चलते ड्राइवर बस पर नियंत्रण नहीं रख सका और कुछ ही क्षणों में बस हादसे का शिकार हो गई।
हादसे के बाद चालक मौके से फरार हुआ या घायल हुआ, इसको लेकर पुलिस जांच कर रही है। अधिकारियों ने बस के तकनीकी पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं ब्रेक या स्टेयरिंग में कोई खराबी तो नहीं थी।
दरोगा और कैदी समेत 6 लोगों की दर्दनाक मौत
इस दर्दनाक हादसे में बिहार के सीवान पुलिस लाइन में तैनात दरोगा रामचंद्र राम (59) की मौके पर मौत हो गई। उनके साथ यात्रा कर रहे कैदी छत्तरपाल सिंह तोमर (59), जो गुरुग्राम का रहने वाला था, उसने भी दम तोड़ दिया।
जानकारी के मुताबिक बिहार पुलिस की टीम 24 मई को कैदी को पेशी के लिए गुरुग्राम लेकर गई थी और सोमवार रात उसे लेकर वापस लौट रही थी। हादसे में पुलिस टीम भी चपेट में आ गई।
मृतकों में गोरखपुर निवासी सुरेश कुमार जायसवाल, विदेशी गुप्ता और बस्ती निवासी विजय कुमार की भी पहचान हुई है। एक मृतक की पहचान अभी भी नहीं हो सकी है।
खिड़कियों से नीचे गिरते रहे यात्री
हादसे के बाद का दृश्य बेहद भयावह था। बस पलटने के बाद कई यात्री शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। कुछ लोग बस की खिड़कियों से सीधे नीचे ढलान पर जा गिरे। आसपास मौजूद ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मदद के लिए दौड़े।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह सुबह टहलने निकले थे, तभी जोरदार धमाका सुनाई दिया। पीछे मुड़कर देखा तो बस पलटी हुई थी और यात्री चीख रहे थे। कुछ लोग नीचे गिरे पड़े थे, जबकि कई लोग बस के भीतर फंसे मदद मांग रहे थे।
एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए गए घायल
सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब 6 से 7 एंबुलेंसों की मदद से 27 घायलों को तत्काल नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में घायलों की हालत देखकर अफरा-तफरी मच गई। कई लोग दर्द से कराह रहे थे और अस्पताल के फर्श तक खून से भर गए थे।
डॉक्टरों ने 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल 20 यात्रियों को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। एक महिला यात्री को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
घायल सिपाही ने सुनाई हादसे की पूरी कहानी
हादसे में घायल सिपाही रामजी ने बताया कि वह बिहार के सीवान पुलिस लाइन में तैनात हैं। पुलिस टीम सोमवार रात करीब 8:30 बजे दिल्ली से निकली थी। बस में बैठे सभी यात्री सो रहे थे। अचानक जोरदार आवाज हुई और सब कुछ उलट-पुलट गया।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद बस के भीतर चीख-पुकार मच गई थी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ। बाद में पता चला कि उनके साथ यात्रा कर रहे दरोगा और कैदी की मौत हो चुकी है।
अचानक तेज झटका लगा और सब खत्म हो गया
घायल यात्री बृजेश कुमार, जो हरियाणा के बल्लभगढ़ के रहने वाले हैं, ने बताया कि वे रात में सीट पर सो रहे थे। अचानक बहुत तेज झटका लगा और धमाके जैसी आवाज आई। कुछ पल के लिए अंधेरा छा गया। जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया।
कई यात्रियों ने बताया कि बस की रफ्तार काफी तेज थी और ड्राइवर बार-बार झटके से बस चला रहा था। हालांकि हादसे से पहले किसी यात्री ने चालक को सचेत नहीं किया।
हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर लगा लंबा जाम
हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। बस पलटने और राहत कार्य के कारण करीब आधे घंटे तक लंबा जाम लगा रहा। पुलिस ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त बस को हटवाया, जिसके बाद यातायात सामान्य कराया गया।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, प्रशासन अलर्ट
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों से संपर्क शुरू कर दिया है। पुलिस पूरे हादसे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के पीछे सिर्फ चालक की लापरवाही थी या कोई तकनीकी खामी भी जिम्मेदार थी।
बस हादसे ने फिर खड़े किए सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर लंबी दूरी की निजी बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार घंटों तक ड्राइविंग, तेज रफ्तार और चालक की थकान अक्सर बड़े हादसों की वजह बनती रही है। एक्सप्रेस-वे पर पहले भी कई बार इसी तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर अब भी लापरवाही जारी है।
मंगलवार सुबह उन्नाव में जो कुछ हुआ, उसने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए छीन लीं। कुछ लोग अपने घर लौट रहे थे, कुछ ड्यूटी पर थे और कुछ सफर में सपनों के साथ निकले थे, लेकिन एक पल की लापरवाही ने सब कुछ खत्म कर दिया।