पेंशन और प्रॉपर्टी के लालच में पिता का कत्ल: शव के टुकड़े कर बाल्टियों में छिपाए, बेटे-बेटी को फांसी, पत्नी को उम्रकैद
हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सामने आए एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में अदालत ने सात साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतक के बेटे और बेटी को फांसी की सजा तथा पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल एक जघन्य हत्या का है, बल्कि उस लालच की भयावह तस्वीर भी पेश करता है, जिसने एक परिवार को अपने ही मुखिया का हत्यारा बना दिया।
मल्काजगिरि की स्थानीय अदालत ने सोमवार को 2019 में हुए इस चर्चित हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए पाया कि आरोपियों ने पेंशन और संपत्ति हथियाने की साजिश के तहत 70 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी की निर्मम हत्या की थी। अदालत ने मामले को अत्यंत क्रूर और दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए मृतक के 47 वर्षीय बेटे और 36 वर्षीय बेटी को मृत्युदंड सुनाया, जबकि 65 वर्षीय पत्नी को उम्रकैद की सजा दी गई।
जहर देकर हत्या, फिर शव के किए टुकड़े-टुकड़े
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने पहले बुजुर्ग के भोजन में जहर मिलाकर उन्हें मौत के घाट उतारा। हत्या के बाद उन्होंने अपराध को छिपाने के लिए शव के कई टुकड़े कर दिए और उन्हें घर में रखी बाल्टियों में भरकर छिपा दिया। बताया गया कि आरोपी शव को ठिकाने लगाने का रास्ता नहीं खोज पा रहे थे, इसलिए कई दिनों तक मानव अवशेष घर के भीतर ही पड़े रहे।
दुर्गंध ने खोला खौफनाक राज
18 अगस्त 2019 को घर से लगातार आ रही तेज दुर्गंध ने पड़ोसियों को शक में डाल दिया। जब स्थानीय लोगों ने घर के भीतर जाकर देखा तो वहां का नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था। घर में मानव अवशेष मिलने के बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। जांच शुरू हुई तो हत्या की पूरी साजिश सामने आ गई।
पुलिस ने साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मृतक की पत्नी, बेटे और बेटी को 21 अगस्त 2019 को गिरफ्तार कर लिया था। लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया।
रेलवे कर्मचारी थे मृतक
मृतक भारतीय रेलवे में मालगाड़ी चालक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने वर्ष 2000 में स्वास्थ्य कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी और उन्हें नियमित पेंशन मिल रही थी। जांच में सामने आया कि पेंशन की राशि और मकान पर कब्जा करने की मंशा ही हत्या की मुख्य वजह थी।
लालच की इंतहा, रिश्तों का कत्ल
यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि उन टूटते पारिवारिक मूल्यों की भयावह मिसाल है, जहां धन और संपत्ति के लालच में अपने ही पिता की जान ले ली गई। जिस व्यक्ति ने जीवनभर परिवार के लिए मेहनत की, उसी को उसके सबसे करीबी रिश्तों ने मौत के घाट उतार दिया।
अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि चाहे अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, कानून के हाथ आखिरकार अपराधियों तक पहुंचते हैं। हैदराबाद का यह मामला आज भी लोगों को झकझोर देता है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि चंद पैसों और संपत्ति की खातिर इंसानियत किस हद तक गिर सकती है।