Pilibhit: कभी-कभी हकीकत किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा हैरान करने वाली होती है। पीलीभीत में भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक युवक के नहर में कूदकर जान देने की खबर आई। परिवार रो रहा था, पुलिस कई दिनों तक नहर में गोताखोर उतारकर उसकी तलाश करती रही और हर किसी को यही लगा कि शायद अब उसकी लाश ही मिलेगी। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जिस युवक को सब मृत मान चुके थे, वह जिंदा था… और दूसरे शहर में आराम से नौकरी कर रहा था।
22 जुलाई… जब आई नहर में कूदने की खबर
22 जुलाई को थाना अमरिया पुलिस को सूचना मिली कि थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के ग्राम भंगा मोहम्मदगंज निवासी आकाश उर्फ ओमशंकर पोटा डैम के पास नहर में कूद गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। नहर के किनारे हालात देखकर यही लग रहा था कि युवक पानी में समा चुका है। आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू हुई और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
कई दिनों तक नहर में तलाश… लेकिन नहीं मिला कोई सुराग
पुलिस ने इसे सामान्य गुमशुदगी नहीं माना। युवक की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
हर दिन 8 से 10 गोताखोर नहर में उतरते रहे। कई दिनों तक लगातार पानी में तलाश होती रही। आसपास के गांवों में पूछताछ हुई। हर संभावना को खंगाला गया, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चला।
जितने दिन बीतते गए, उतना ही मामला रहस्यमय होता गया। सवाल उठने लगा कि अगर युवक नहर में कूदा था, तो उसका शव आखिर कहां गया?
यहीं से पुलिस को हुआ पहला शक
जब लगातार कई दिनों की तलाश के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने मामले को दूसरे नजरिए से देखना शुरू किया।
तकनीकी जांच और सर्विलांस टीम को सक्रिय किया गया। इसी दौरान पुलिस के हाथ एक ऐसी जानकारी लगी जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।
एक पुराने मुकदमे ने खोल दी पूरी कहानी
जांच में सामने आया कि आकाश उर्फ ओमशंकर और उसके साथियों के खिलाफ पहले से एक गंभीर मुकदमा दर्ज है।
उन पर 15 वर्षीय किशोरी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप है। पुलिस को शक हुआ कि कहीं गिरफ्तारी से बचने के लिए तो यह पूरा घटनाक्रम नहीं रचा गया।
अब पुलिस की जांच नहर से हटकर आरोपी की गतिविधियों पर केंद्रित हो गई।
फिर सामने आया सबसे बड़ा खुलासा
सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों ने धीरे-धीरे पूरी तस्वीर साफ कर दी।
पुलिस को पता चला कि आकाश न तो नहर में डूबा था और न ही उसकी मौत हुई थी।
असल में उसने खुद अपनी मौत की झूठी कहानी तैयार की थी।
आरोपी ने नहर के किनारे अपने जूते छोड़ दिए ताकि लोगों को लगे कि वह पानी में कूद गया है। उसका मकसद पुलिस को गुमराह करना, गिरफ्तारी से बचना और विरोधी पक्ष को झूठे मुकदमे में फंसाना था।
जिस घटना को लोग आत्महत्या समझ रहे थे, वह दरअसल पहले से बनाई गई एक सोची-समझी साजिश थी।
हुलिया बदला… पगड़ी बांधी… और दूसरे जिले में नौकरी करने लगा
यहीं पर कहानी खत्म नहीं हुई।
पुलिस जांच में पता चला कि फरार होने के बाद आरोपी ने अपना पूरा हुलिया बदल लिया। उसने पगड़ी बांधनी शुरू कर दी ताकि कोई उसे पहचान न सके।
इसके बाद वह उत्तराखंड के रुद्रपुर पहुंच गया और वहीं नौकरी करने लगा। उसे भरोसा था कि अब कोई उसे कभी नहीं ढूंढ पाएगा।
लेकिन तकनीक के सामने नहीं टिक सकी चालाकी
आधुनिक सर्विलांस, तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के दम पर अमरिया पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।
पुलिस ने कस्बा अमरिया के रामलीला मैदान के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपनी पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ नया मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस ने क्या कहा?
पीलीभीत के अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने बताया कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने, पुलिस को गुमराह करने और विरोधी पक्ष को फंसाने के उद्देश्य से अपनी मौत का झूठा नाटक रचा था। तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से पूरी साजिश का पर्दाफाश किया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले से क्या साबित हुआ?
यह मामला दिखाता है कि अपराधी चाहे कितनी भी शातिर योजना बना लें, लेकिन आधुनिक तकनीक, डिजिटल सर्विलांस और पुलिस की सतर्क जांच के सामने उनकी साजिश ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकती। जिस युवक को पूरा इलाका मृत मान चुका था, वही कुछ दिनों बाद जिंदा और बदले हुए हुलिए में पुलिस की गिरफ्त में था। यही इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला सच है।