Rahul Gandhi: देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लोकसभा में लगातार दूसरे दिन भी जोरदार बहस हुई। बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने करीब 50 मिनट तक भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों के आंदोलन, बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा। हालांकि उनके भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए ‘इडियट’ शब्द पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया।
लोकसभा में लगातार दूसरे दिन हुई पेपर लीक बिल पर चर्चा
पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर संसद में लगातार दूसरे दिन चर्चा हुई।
इससे पहले मंगलवार को इस बिल पर करीब 9 घंटे तक बहस चली थी। पहले दिन केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का पक्ष रखा था। वहीं विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने अपनी बातें रखी थीं।
दूसरे दिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बिल पर विस्तृत भाषण देते हुए सरकार की नीतियों और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी बोले- देश का भविष्य सड़कों पर उतरा था
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए की।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपने भविष्य की चिंता जाहिर की थी। उनके मुताबिक यह आंदोलन गुस्से, हिंसा या नफरत का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि अपने भविष्य को लेकर छात्रों की गहरी चिंता और भावनाओं का इजहार था।
राहुल गांधी ने कहा,
“देश का भविष्य सड़कों पर उतरा। बीजेपी में भी जो लोग हैं, हमारे उन मित्रों को जाकर अपने बच्चों से पूछना चाहिए कि क्या गलत हुआ। प्रदर्शन में गुस्सा था, लेकिन नफरत नहीं थी। वे केवल अपनी आवाज उठा रहे थे।”
छात्रा से हुई बातचीत का भी किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि छात्रा ने उनसे कहा था कि किसान भी छात्र हो सकता है, वकील भी, डॉक्टर भी और बेरोजगार युवा भी।
राहुल गांधी ने कहा कि जब उन्होंने छात्रा से पूछा कि “इंडस्ट्रियलिस्ट का क्या?” तो छात्रा ने जवाब दिया कि “ये इंडस्ट्रियलिस्ट किसी की बात ही नहीं सुनते।”
राहुल गांधी ने इस उदाहरण के जरिए सरकार पर आम लोगों की आवाज नहीं सुनने का आरोप लगाया।
‘इडियट’ शब्द पर लोकसभा में मच गया हंगामा
राहुल गांधी के भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा तब आया जब उन्होंने कहा,
“तीन तरह के लोग होते हैं… विद्यार्थी, अंध भक्त और इडियट। जहां अंधभक्त को लगता है कि इडियट ही भगवान है। आप बताइए स्टूडेंट कौन है और इडियट कौन?”
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने तुरंत विरोध शुरू कर दिया और सदन में हंगामा मच गया।
किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति, माफी की मांग की
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को संसद में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उनसे अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की।
रिजिजू ने राहुल गांधी के कुछ अन्य आरोपों को भी खारिज किया।
राहुल गांधी बोले- अगर सिर्फ BJP को बोलना है तो मैं बैठ जाता हूं
किरेन रिजिजू के हस्तक्षेप के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष की ओर देखते हुए कहा,
“अध्यक्ष जी, अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ BJP बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाऊंगा। मैं जब भी बोलता हूं, BJP की तरफ से कोई न कोई बोलने लगता है।”
इस बयान के बाद भी सदन में शोर-शराबा जारी रहा।
अमित शाह पर लगाया बड़ा आरोप
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत दी।
हालांकि किरेन रिजिजू ने इस दावे को तुरंत खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं और उन्हें अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।
राहुल के समर्थन में बोले अखिलेश यादव
सदन में विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में बोलने के लिए खड़े हुए।
हालांकि किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष कार्रवाई की मांग कर सकता है, लेकिन किसी मंत्री पर बिना तथ्य के इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते।
इसके बाद भी कुछ समय तक सदन में हंगामा जारी रहा।
पेपर लीक बिल को लेकर संसद में जारी है तीखी बहस
पेपर लीक से जुड़े इस संशोधन विधेयक को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
सरकार का कहना है कि नया कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर सख्ती से रोक लगाएगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करनी होगी।
बिल पर चर्चा अभी भी जारी है और संसद में आगे भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।