CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। इस मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में सेक्टर 168 की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की गई है। शिकायत गाजियाबाद की एक वकील ने दी थी। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस भी इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए कथित आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर अलग से कार्रवाई कर रही है।
नोएडा में दर्ज हुई जीरो FIR
गुरुवार शाम हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनूप खेतान ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है।
उनका कहना है कि सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री के लिए कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई। शिकायत के आधार पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो FIR दर्ज की गई।
लड़की का नाम रूचिका है, वह 25 साल की है और नोएडा में रहती है।आखिरकार, हमने यह कर दिखाया, मुकदमा दर्ज हो गया है, अब गिरफ्तारी होगी…🔥🔥#ruchika #noida #cjp2029 #Cjp_Movement #CJP2029india #NEETStudentProtest pic.twitter.com/nvfYAjPauS
— ANIL GIRI – CLASSES (@sanatanihelp) July 31, 2026
पुलिस वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री की कर रही जांच
पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित बयान किस परिस्थिति में दिए गए और उपलब्ध वीडियो व अन्य साक्ष्यों की सत्यता क्या है।
शिकायतकर्ता वकील ने क्या कहा?
शिकायतकर्ता ने अपने वीडियो में कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि समाज और विशेषकर बच्चों पर सोशल मीडिया की भाषा का गहरा असर पड़ता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर शालीन भाषा का प्रयोग होना चाहिए।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
नोएडा पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है—
धारा 352 (BNS)
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी का अपमान करता है और उससे शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न होती है, तो इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें अधिकतम 2 वर्ष की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
धारा 353(1) (BNS)
यदि कोई झूठी या भड़काऊ सूचना प्रसारित करता है जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने या अशांति फैलने की आशंका हो, तो इस धारा के तहत 3 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
धारा 356(1) (BNS)
मानहानि से जुड़े मामलों में लागू होने वाली इस धारा के तहत किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले कथित बयान पर 2 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
क्या होती है जीरो FIR?
जीरो FIR ऐसी प्राथमिकी होती है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही घटना उस थाने के अधिकार क्षेत्र में न हुई हो।
FIR दर्ज होने के बाद संबंधित थाना इसे उस क्षेत्र के पुलिस थाने को भेज देता है जहां घटना हुई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायत दर्ज कराने में देरी न हो और जांच समय पर शुरू हो सके।
दिल्ली पुलिस भी कर रही है अलग जांच
इस मामले से जुड़े कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस भी सक्रिय है।
पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कथित आपत्तिजनक कंटेंट हटाने और उसे पोस्ट करने वाले खातों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि ऐसे कंटेंट का प्रभाव सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक माहौल पर पड़ सकता है।
36 दिन चला था CJP का प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ा आंदोलन सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था। बाद में जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक समेत विभिन्न छात्र मुद्दों को लेकर धरना शुरू हुआ।
यह प्रदर्शन करीब 36 दिनों तक चला। आंदोलन के दौरान कई बार सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की खबरें भी सामने आईं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ आंदोलन
25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की घोषणा की। इसके बाद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
उधर, छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के आश्वासन के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल यह मामला जांच के चरण में है। पुलिस वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपलब्ध साक्ष्य क्या कहते हैं और आगे कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी। तब तक मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।