UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर एक कथित आंतरिक सर्वे चर्चा में है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी की ओर से कराए गए इस कथित सर्वे में मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में चुनाव होते हैं, तो भाजपा को बहुमत के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस कथित सर्वे या इसके निष्कर्षों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, कथित आंतरिक सर्वे में भाजपा को 190 से 205 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुमत के लिए 202 सीटों की आवश्यकता होती है।
रिपोर्ट में दावा है कि पार्टी को मौजूदा स्थिति में 52 से 67 सीटों तक का नुकसान हो सकता है। उल्लेखनीय है कि 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि बाद के उपचुनावों के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़कर 257 हो गई।
चार महीने तक चला कथित सर्वे
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सर्वे करीब चार महीने तक चला। इसमें उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को शामिल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट भाजपा नेतृत्व को सौंप दी गई।
किस उद्देश्य से कराया गया था कथित सर्वे?
रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वे का उद्देश्य चुनाव से पहले जनता का मूड समझना और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति का आकलन करना था।
बताया गया है कि सर्वे के दौरान मतदाताओं से स्थानीय मुद्दों, मौजूदा विधायकों की कार्यशैली, जातीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों को लेकर राय ली गई।
किस एजेंसी ने किया कथित सर्वे?
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भाजपा ने ‘Nation with NaMo’ नाम की एक रजिस्टर्ड एजेंसी से यह सर्वे कराया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वे में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), IIT कानपुर सहित विभिन्न संस्थानों के 100 से अधिक विशेषज्ञ और रिसर्चर्स शामिल थे। उन्होंने मार्च से जुलाई के दूसरे सप्ताह तक प्रदेशभर में जाकर निर्धारित सैंपल के आधार पर लोगों से बातचीत की।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जनता से पूछे गए ये सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे टीम ने लोगों से कई सवाल पूछे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
- क्या आप अपने मौजूदा विधायक से संतुष्ट हैं?
- आपके क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याएं क्या हैं?
- किस जातीय समीकरण का उम्मीदवार बेहतर रहेगा?
- भाजपा और विपक्ष के संभावित उम्मीदवारों को लेकर आपकी राय क्या है?
रिपोर्ट में दो तरह की नाराजगी का दावा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में सामने आई नाराजगी को दो हिस्सों में बांटा गया।
पहली श्रेणी में केंद्र और राज्य सरकार की कुछ नीतियों को लेकर असंतोष बताया गया, जबकि दूसरी श्रेणी में स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर नाराजगी सामने आने का दावा किया गया।
किन मुद्दों पर असंतोष का दावा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सर्वे के दौरान लोगों ने कई मुद्दों का उल्लेख किया, जिनमें—
- UGC के नए नियम
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला
- थाना और तहसील स्तर पर सुनवाई
- NEET पेपर लीक
- E-20 एथेनॉल नीति
जैसे विषय शामिल थे।
हालांकि, रिपोर्ट में इन मुद्दों के प्रभाव का कोई स्वतंत्र डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
विधायकों को लेकर क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार, कई विधानसभा क्षेत्रों में लोगों ने स्थानीय विधायकों की सक्रियता पर सवाल उठाए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोगों ने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, क्षेत्र में कम मौजूदगी और स्थानीय विवादों को लेकर असंतोष जताया।
30-35% विधायकों के टिकट बदलने की सलाह का दावा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भाजपा के 30 से 35 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखने को मिली।
इसी आधार पर कथित सर्वे में सुझाव दिया गया कि यदि पार्टी बड़ी संख्या में नए उम्मीदवार उतारती है, तो चुनावी नुकसान कम किया जा सकता है।
2022 चुनाव का भी दिया गया हवाला
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने सर्वे कराए थे और उसके आधार पर 120 से अधिक विधायकों के टिकट काटे गए थे।
उस चुनाव में भाजपा ने 165 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद पार्टी की सीटें 2017 के 312 से घटकर 2022 में 255 रह गई थीं।
राष्ट्रवाद बनाम जातीय राजनीति का जिक्र
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि चुनाव धर्म, राष्ट्रवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा, तो भाजपा को लाभ मिल सकता है।
वहीं, यदि समाजवादी पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव की तरह PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती है, तो भाजपा को चुनौती मिल सकती है।
यह विश्लेषण कथित सर्वे रिपोर्ट का हिस्सा बताया गया है।
नई पीढ़ी के वोटरों को लेकर भी दावा
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे टीम के एक सदस्य ने दावा किया कि नई पीढ़ी के मतदाताओं में पारंपरिक जातीय ध्रुवीकरण पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से कहा गया कि युवा मतदाता यादव और गैर-यादव राजनीति को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी की टीम के अलग सर्वे का भी दावा
मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भाजपा संगठन के सर्वे के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम भी एक अलग फीडबैक सर्वे करा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें गांव-गांव जाकर सरकार, मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायकों के कामकाज पर लोगों की राय ली जा रही है। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में वर्तमान दलवार स्थिति
| राजनीतिक दल | विधायक |
|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 257 |
| समाजवादी पार्टी (SP) | 101 |
| अपना दल (एस) | 13 |
| राष्ट्रीय लोकदल (RLD) | 9 |
| सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी | 6 |
| निषाद पार्टी | 5 |
| निर्दलीय | 3 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 2 |
| जनसत्ता दल लोकतांत्रिक | 2 |
| बहुजन समाज पार्टी | 1 |
कुल विधायक: 399
भाजपा की आधिकारिक पुष्टि नहीं
फिलहाल जिस कथित आंतरिक सर्वे की चर्चा हो रही है, उसकी भाजपा की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट में किए गए सभी चुनावी अनुमान, सीटों के आंकड़े और रणनीतिक सुझाव मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में वास्तविक तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा, चुनावी मुद्दों, गठबंधनों और मतदाताओं के अंतिम निर्णय के बाद ही साफ होगी।