Delhi Animal Welfare Mahapadyatra: दिल्ली में शुरू होगी 70 किलोमीटर की महापदयात्रा, जानिए आखिर किस बदलाव की मांग लेकर निकलेंगे पशु प्रेमी
नई दिल्ली
भारत में पशु कल्याण को लेकर वर्षों से बहस होती रही है, लेकिन अब यह बहस सड़कों पर उतरने जा रही है। हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स (HSA) के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी संजय मोहापात्रा के नेतृत्व में 1 से 3 अगस्त तक दिल्ली में लगभग 70 किलोमीटर लंबी “महापदयात्रा” आयोजित की जा रही है। इस पदयात्रा का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि पशु कल्याण से जुड़े कानूनों, सरकारी नीतियों और सामाजिक सोच में व्यापक बदलाव की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है। संगठन लंबे समय से घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं के उपचार, आश्रय और पुनर्वास का कार्य करता रहा है।
सिर्फ पदयात्रा नहीं, पशु अधिकारों के लिए राष्ट्रीय जनजागरण अभियान
यह महापदयात्रा दो लोगों और दो शांत भारतीय सामुदायिक (इंडी) कुत्तों की सहभागिता के साथ निकलेगी। आयोजकों का कहना है कि यह दृश्य केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि यह संदेश देगा कि मनुष्य और सामुदायिक पशु एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व के साझेदार हैं।
इस अभियान की प्रेरणा “अलोका – द पीस डॉग” से ली गई है। HSA का दावा है कि दिल्ली की यह शुरुआत भविष्य में पूरे देश में करुणा, वैज्ञानिक सोच और जिम्मेदार पशु कल्याण के राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनेगी।
Delhi Animal Welfare Mahapadyatra का सबसे बड़ा संदेश—’करुणा और विज्ञान साथ-साथ’
भारत में अक्सर आवारा पशुओं को लेकर दो ध्रुवीय विचार सामने आते हैं। एक पक्ष उन्हें खतरा मानता है, जबकि दूसरा केवल भावनात्मक दृष्टिकोण अपनाता है।
लेकिन इस महापदयात्रा का संदेश दोनों से अलग है।
आयोजकों का कहना है कि समाधान न तो हिंसा है और न ही अंधी भावुकता, बल्कि वैज्ञानिक नीति, पारदर्शी व्यवस्था और संवेदनशील प्रशासन है।
यही कारण है कि इस यात्रा में केवल भावनात्मक अपील नहीं बल्कि ठोस नीतिगत मांगों को सामने रखा गया है।
महापदयात्रा की प्रमुख मांगें—सिर्फ नारों से आगे की सोच
1. गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार
आयोजकों ने भारत सरकार से सम्मानपूर्वक अनुरोध किया है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार किया जाए। यह मांग इस अभियान का सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दा है।
2. 19 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की बड़ी पीठ से समीक्षा
HSA ने 19 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की बड़ी संविधान पीठ द्वारा समीक्षा की मांग रखी है।
यह मांग सीधे उस बहस से जुड़ी है जिसमें सामुदायिक कुत्तों के प्रबंधन, पुनर्वास और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे हैं। हाल के महीनों में इन मुद्दों पर देशभर में कई प्रदर्शन और चर्चाएँ भी हुई हैं।
3. वैज्ञानिक और पारदर्शी Animal Birth Control (ABC) नीति
संगठन का कहना है कि आवारा पशुओं की संख्या नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका वैज्ञानिक नसबंदी (ABC), एंटी-रेबीज टीकाकरण और पारदर्शी क्रियान्वयन है।
यह मांग हाल के वर्षों में कई पशु अधिकार संगठनों द्वारा भी प्रमुखता से उठाई जाती रही है।
4. पूरे देश में 24×7 सरकारी पशु चिकित्सालय
महापदयात्रा की एक महत्वपूर्ण मांग यह भी है कि प्रत्येक जिले में आधुनिक सुविधाओं वाले सरकारी पशु अस्पताल स्थापित किए जाएं, जहां—
- पशु चिकित्सक उपलब्ध हों,
- पैरावेट स्टाफ हो,
- आधुनिक जांच सुविधा हो,
- दवाइयां उपलब्ध हों,
- एम्बुलेंस सेवा हो,
- आपातकालीन इलाज 24 घंटे मिले।
5. नसबंदी से पहले अनिवार्य स्वास्थ्य जांच
आयोजकों का कहना है कि चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर नसबंदी से पहले रक्त जांच और स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने चाहिए ताकि पशुओं की अनावश्यक मृत्यु और जटिलताओं को रोका जा सके।
6. पशु क्रूरता कानूनों का सख्ती से पालन
भारत में पशु क्रूरता के मामलों में कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हो पाता।
महापदयात्रा इसी दिशा में सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
7. राष्ट्रीय एंटी-रेबीज अभियान
रेबीज आज भी भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
आयोजकों का कहना है कि यदि बड़े स्तर पर टीकाकरण और नसबंदी अभियान ईमानदारी से चलाया जाए तो मानव और पशु—दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
8. पशु चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और एनजीओ को सरकारी सहयोग
पशु सेवा में लगे डॉक्टर, पैरावेट स्टाफ, स्वयंसेवक और एनजीओ संसाधनों की कमी से जूझते हैं।
महापदयात्रा इनके लिए संस्थागत सहायता की मांग भी उठा रही है।
Delhi Animal Welfare Mahapadyatra: क्या कुत्तों को 70 किलोमीटर चलाया जाएगा? आयोजकों ने साफ किया भ्रम
सोशल मीडिया पर ऐसे आयोजनों को लेकर अक्सर पशुओं के शोषण के आरोप लगते हैं।
लेकिन HSA ने स्पष्ट किया है कि—
- दोनों सामुदायिक कुत्ते पूरा 70 किलोमीटर नहीं चलेंगे।
- वे केवल 2–3 किलोमीटर ही चलेंगे।
- समय सुबह 6 से 10 बजे तक रहेगा।
- पूरे समय पशु चिकित्सक मौजूद रहेंगे।
- भोजन, पानी और पर्याप्त विश्राम की व्यवस्था रहेगी।
आयोजकों का कहना है कि “पशु कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी मांग
महापदयात्रा समाप्त होने के बाद भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
साथ ही आयोजक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अपने सुझाव प्रस्तुत करने का भी अनुरोध करेंगे।
जनभागीदारी पर विशेष जोर
आयोजकों ने आम नागरिकों के साथ-साथ—
- विद्यार्थियों
- पशु चिकित्सकों
- एनजीओ
- स्वयंसेवकों
- आरडब्ल्यूए
- मीडिया संस्थानों
- पशु प्रेमियों
से इस शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
Delhi Animal Welfare Mahapadyatra: क्या यह आंदोलन केवल पशुओं का है या समाज की सोच बदलने की कोशिश?
यह महापदयात्रा केवल कुत्तों, गायों या अन्य पशुओं तक सीमित अभियान नहीं दिखाई देती।
दरअसल यह उस बहस को सामने लाने की कोशिश है जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु अधिकार, नगर प्रशासन, वैज्ञानिक नसबंदी, रेबीज नियंत्रण और मानवीय संवेदनाएं एक साथ जुड़ती हैं।
हाल के वर्षों में सामुदायिक कुत्तों के प्रबंधन, ABC नियमों, पुनर्वास और पशु कल्याण को लेकर देशभर में कई कानूनी और सामाजिक बहसें तेज हुई हैं। HSA भी लगातार वैज्ञानिक, मानवीय और कानूनसम्मत समाधान की वकालत करता रहा है।
हालांकि, इस पदयात्रा की कुछ मांगें—जैसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का अनुरोध और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की समीक्षा—नीतिगत एवं सार्वजनिक विमर्श के विषय हैं। इन पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और सरकारी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है।
दिल्ली की यह 70 किलोमीटर की महापदयात्रा केवल एक पैदल मार्च नहीं, बल्कि पशु कल्याण को लेकर राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा देने का प्रयास है। करुणा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, कानूनी सुधार और जनभागीदारी—इन चार स्तंभों पर आधारित यह अभियान यह संदेश देता है कि पशु कल्याण केवल पशुओं का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार समाज के निर्माण का प्रश्न भी है।
“आइए करुणा के साथ कदम बढ़ाएँ और हर जीव के लिए एक बेहतर भारत का निर्माण करें।”