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Spain की पुलिस बॉर्डर पर पूरी तरह अलर्ट है और अंदर घुसने की कोशिश कर रहे कई प्रवासियों की गोली लगने से मौत हो चुकी है। जिस शहर को ‘यूरोप का दरवाजा’ कहा जाता है, उस स्यूटा में प्रवासियों की भारी भीड़ ने कानून-व्यवस्था का जबरदस्त संकट खड़ा कर दिया है। कोई समंदर में तैरते हुए आया, कोई फ्लोटिंग ट्यूब के सहारे, तो कोई नाव पर सवार होकर—मकसद बस एक ही, किसी तरह बॉर्डर पार करना। सुरक्षाबल इन्हें रोकने में जुटे रहे लेकिन बड़ी तादाद में लोग घुसने में कामयाब हो गए। आखिर यह पूरा मामला है क्या, स्यूटा मोरक्को की जमीन में होकर भी स्पेन का हिस्सा कैसे है, और यह छोटा-सा शहर अफ्रीका से यूरोप पहुंचने का सबसे बड़ा गेटवे कैसे बन गया—आइए पूरी कहानी समझते हैं।

स्यूटा में आखिर हो क्या रहा है?

मोरक्को से स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी इलाके स्यूटा में पिछले एक हफ्ते में हजारों प्रवासी पहुंच चुके हैं। स्यूटा के प्रेसिडेंट जुआन जीसस विवाज़ के मुताबिक, बॉर्डर पर चल रहे इस संकट के दौरान करीब 60,000 प्रवासी मोरक्को से स्यूटा में दाखिल हो चुके हैं—जो शहर की कुल आबादी के करीब 70 फीसदी के बराबर है। उन्होंने इसे “अभूतपूर्व स्थिति” बताया है। भगदड़, डूबने की घटनाओं और सुरक्षाबलों की कार्रवाई में अब तक 57 लोगों की जान जा चुकी है। हालात संभालने के लिए स्पेन ने सेना और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ही दिन में हजारों प्रवासियों ने सीमा पार करने की कोशिश की, जिससे यह 2021 के बाद का सबसे बड़ा संकट बन गया है।

स्पेन और मोरक्को के बीच दूरी कितनी है?

स्पेन और मोरक्को के बीच सबसे कम समुद्री दूरी करीब 14 किलोमीटर है, जो जिब्राल्टर स्ट्रेट में स्पेन के पुंटा दे तारिफा और मोरक्को के पुंटा सीरेस के बीच पड़ती है। लेकिन स्यूटा का मामला अलग है—यह सीधे मोरक्को की सीमा से सटा हुआ है। स्यूटा और मोरक्को के बीच करीब 8.2 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है, यानी यहां कोई समुद्र बीच में नहीं आता। यही वजह है कि प्रवासी अक्सर सीमा की बाड़ फांदकर या समुद्र किनारे से स्यूटा में घुसने की कोशिश करते हैं। स्यूटा में चेक पॉइंट खुलते ही लोगों की भीड़ दौड़कर सारे सुरक्षा इंतजामों को धत्ता बताते हुए बॉर्डर पार कर जाती है, और इनमें ज्यादातर संख्या युवाओं की है।

आखिर मोरक्को से स्पेन क्यों भाग रहे हैं लोग?

वजह सीधी सी है। स्पेन एक समृद्ध यूरोपीय देश है जहां नौकरी और बेहतर भविष्य के मौके हैं, जबकि मोरक्को एक गरीब देश है जहां के युवा रोजगार की तलाश में देश छोड़ने को मजबूर हैं।

अचानक क्यों बढ़ी घुसपैठ? सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना वजह

इस अचानक बढ़ी घुसपैठ के पीछे स्पेन के सुप्रीम कोर्ट का एक हालिया फैसला बताया जा रहा है। कोर्ट ने कहा है कि स्यूटा के पास समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को पुराने ‘बॉर्डर रिजेक्शन’ नियम के तहत तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता। इस फैसले ने प्रवासियों का हौसला बढ़ा दिया और वे किसी भी तरह स्पेन में घुसकर बसने की उम्मीद में जुट गए। इसके अलावा स्पेन करीब 5 लाख अवैध प्रवासियों को कानूनी दर्जा देने की योजना पर भी काम कर रहा है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ प्रवासियों को लेकर अपेक्षाकृत उदार नीति अपनाते हैं और उनकी सरकार कानूनी प्रवासन, शरणार्थियों के पुनर्वास और लंबे समय से रह रहे अवैध प्रवासियों को नियमित दर्जा देने का समर्थन करती रही है।

पीएम पेड्रो सांचेज़ का बयान, सरकार का एक्शन प्लान

घटना के बाद पीएम पेड्रो सांचेज़ ने एक्स पर लिखा कि सरकार स्यूटा के लोगों की सुरक्षा की गारंटी देगी और शहर की सड़कों पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक लोगों को आसानी से वापस भेजने के लिए समुद्र में एक फिजिकल कंटेनमेंट बैरियर लगाया जाएगा, बिना नियम के आए प्रवासियों की वापसी की फाइलें तेजी से आगे बढ़ाई जाएंगी, और इंसानों की तस्करी करने वाले माफियाओं के खिलाफ मोरक्को के अधिकारियों के साथ सहयोग जारी रखा जाएगा।

स्यूटा मोरक्को में होकर भी स्पेन का हिस्सा कैसे बना?

स्यूटा भौगोलिक रूप से अफ्रीका में मोरक्को के उत्तरी तट पर बसा है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह स्पेन का ऑटोनॉमस शहर है। इसका इतिहास करीब 600 साल पुराना है। 1415 में पुर्तगाल ने स्यूटा पर कब्जा किया था। इसके बाद 1580 में पुर्तगाल और स्पेन एक ही राजशाही के अधीन आ गए। जब 1640 में पुर्तगाल अलग हुआ, तो स्यूटा के स्थानीय शासकों ने स्पेन के साथ रहने का फैसला किया। 1688 की एक संधि के बाद स्यूटा आधिकारिक तौर पर स्पेन का हिस्सा बन गया। आज यह यूरोपीय संघ का भी हिस्सा है, भले ही यह अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित है।

मोरक्को इस शहर पर अपना दावा क्यों करता है?

मोरक्को का तर्क है कि स्यूटा और मेलिला उसकी जमीन पर मौजूद औपनिवेशिक अवशेष हैं, यानी स्पेन ने इन पर कब्जा कर रखा है और इन्हें वापस किया जाना चाहिए। वहीं स्पेन का कहना है कि स्यूटा सदियों से उसका अभिन्न हिस्सा रहा है और वहां की ज्यादातर आबादी भी स्पेन के साथ ही रहना चाहती है। यही वजह है कि यह इलाका दोनों देशों के बीच लगातार कूटनीतिक तनाव की जड़ बना रहता है।

यूरोप के लिए यह संकट इतना अहम क्यों है?

स्यूटा सिर्फ स्पेन का एक सीमावर्ती शहर नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा भी है, इसीलिए इसे ‘यूरोप का प्रवेश द्वार’ कहा जाता है। यहां होने वाली हर बड़ी घुसपैठ का असर पूरे यूरोप की आव्रजन नीति, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी व्यवस्था पर पड़ता है—यही वजह है कि स्यूटा का यह संकट पूरे यूरोप के लिए चिंता का विषय बन गया है।