Pilibhit: जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। इंटीग्रेटेड ग्रिवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) पर लगातार मिल रहे असंतुष्ट फीडबैक और लंबित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठकों, कार्यालय से जारी निर्देशों और 27 जुलाई 2026 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बावजूद शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में सुधार नहीं होने पर कई अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बार-बार चेतावनी के बावजूद नहीं सुधरी कार्यशैली
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की ओर से सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसके बावजूद कई विकास खंडों में शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त हुए और कई शिकायतें लंबित रहीं।
प्रशासन ने इसे सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है।
इन अधिकारियों को मिली प्रतिकूल प्रविष्टि
आईजीआरएस पर बेहद खराब प्रदर्शन को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने खंड विकास अधिकारी अमरिया, मरौरी और बरखेड़ा को प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) प्रदान की है। साथ ही भविष्य में कार्यप्रणाली में सुधार लाने के स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं।
इसी प्रकार पंचायत राज विभाग में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) बीसलपुर और अमरिया को भी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही बरतने पर प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
कई बीडीओ से मांगा गया स्पष्टीकरण
प्रशासन ने ललौरीखेड़ा, बीसलपुर, बिलसंडा और पूरनपुर के खंड विकास अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वयं जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करें, शिकायतकर्ताओं से दूरभाष पर संपर्क करें तथा प्रत्येक शिकायत का अधिकतम तीन दिनों के भीतर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित कराएं।
एडीओ पंचायत को भी जारी हुए कारण बताओ नोटिस
कार्रवाई केवल खंड विकास अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। पंचायत विभाग के ललौरीखेड़ा, मरौरी, पूरनपुर, बिलसंडा और बरखेड़ा के सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) को भी शिकायतों के संतोषजनक निस्तारण में लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे निर्धारित समय में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूरी खबर -> https://t.co/UOEoXYMitf
Pilibhit: IGRS पर लापरवाही भारी! डीएम ज्ञानेंद्र सिंह का सख्त एक्शन, कई बीडीओ और एडीओ पंचायत पर गिरी गाज.. pic.twitter.com/IvQlU1GGjw— Rocket Post Bharat (@rocketpostindia) August 5, 2026
गांव पहुंचकर करें शिकायतों का समाधान
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब IGRS पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। संबंधित अधिकारी स्वयं गांवों में पहुंचकर शिकायतों की जांच करेंगे, शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे और वास्तविक स्थिति के आधार पर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने दो टूक कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की औपचारिकता या खानापूर्ति अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
खराब रैंकिंग हुई तो होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायतों का संतोषजनक निस्तारण नहीं किया गया और असंतुष्ट फीडबैक के कारण जनपद की IGRS रैंकिंग प्रभावित हुई, तो संबंधित अधिकारियों को पूर्ण रूप से जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दिए जा चुके हैं सख्त निर्देश
इससे पहले भी जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया था कि लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, रोस्टर तैयार किया जाए तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान गांव स्तर पर ही किया जाए। प्रशासन का उद्देश्य है कि आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान गांव में ही उपलब्ध हो सके।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के इस सख्त रुख से साफ संकेत मिल गया है कि अब जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि, स्पष्टीकरण, कारण बताओ नोटिस और अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की प्राथमिकता अब IGRS पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का प्रभावी, पारदर्शी और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप निस्तारण सुनिश्चित करना है, ताकि शासन की जनसुनवाई व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत हो सके।