Pilibhit Encounter: पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शिवम की मौत की मजिस्ट्रियल तेज, गवाहों से मांगे बयान, 12 से 19 अगस्त तक दे सकेंगे साक्ष्य
पीलीभीत। बिलसंडा थाना क्षेत्र में जून के आखिरी सप्ताह हुई पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद अस्पताल में मृत घोषित किए गए वांछित अभियुक्त शिवम उर्फ सर्वजीत सिंह की मौत के मामले में मजिस्ट्रियल जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। जिला प्रशासन ने घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और जानकारी रखने वाले लोगों से बयान एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नई अवधि तय की है। अब संबंधित लोग 12 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कलेक्ट्रेट स्थित नगर मजिस्ट्रेट/जांच अधिकारी के न्यायालय या कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और साक्ष्य दे सकेंगे।
Pilibhit Encounter: 27 जून की रात चेकिंग के दौरान हुई थी मुठभेड़
जिला सूचना विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 27 जून 2026 की रात करीब 10 बजे जनपदीय पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध व्यक्तियों को पुलिस टीम ने रोकने का प्रयास किया।
प्रशासनिक विवरण के अनुसार, पुलिस का आरोप है कि संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस टीम ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में एक संदिग्ध घायल हो गया, जबकि दूसरा व्यक्ति रात के अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
घायल की पहचान शिवम उर्फ सर्वजीत के रूप में हुई
घायल व्यक्ति की पहचान शिवम उर्फ सर्वजीत सिंह पुत्र बरातीलाल, निवासी नई बस्ती मोहनपुर ग्रांट रामपुर, थाना उचैलिया, जनपद लखीमपुर खीरी के रूप में हुई।
प्रशासन के अनुसार शिवम थाना बिलसंडा में दर्ज मु0अ0सं0 105/2026 में वांछित अभियुक्त था। उसके खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज था।
घायल शिवम को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
Pilibhit Encounter: पप्पू गुप्ता हत्याकांड से भी जुड़ा था नाम
घटना के बाद सामने आई मीडिया रिपोर्टों में शिवम उर्फ सर्वजीत का नाम बिलसंडा के चर्चित कपड़ा व्यापारी पप्पू गुप्ता हत्याकांड से भी जोड़ा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने उसे इस मामले में मुख्य वांछित/सुपारी शूटर के तौर पर तलाश कर रही थी।
मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि शिवम पर गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित था और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगी थीं। कुछ रिपोर्टों में इनाम की राशि 1.75 लाख रुपये बताई गई है।
मुठभेड़ की रिपोर्टों में पुलिस टीम के दो सदस्यों के घायल होने और एक अन्य संदिग्ध के मौके से फरार होने की जानकारी भी सामने आई थी।
मुठभेड़ की मजिस्ट्रियल जांच क्यों महत्वपूर्ण?
पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की मजिस्ट्रियल जांच कराई जा रही है। इसी जांच के तहत घटना के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले लोगों से बयान और साक्ष्य मांगे गए हैं।
पहले प्रशासन की ओर से 9 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक बयान एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। लेकिन निर्धारित अवधि में बयान दर्ज कराने के लिए कोई व्यक्ति संबंधित कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ।
अब प्रशासन ने दोबारा मौका देते हुए नई समय-सीमा जारी की है।
12 से 19 अगस्त तक सामने आ सकते हैं प्रत्यक्षदर्शी
जिला प्रशासन की नई सूचना के अनुसार, घटना की जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति 12 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच कलेक्ट्रेट पीलीभीत स्थित नगर मजिस्ट्रेट/जांच अधिकारी के न्यायालय या कार्यालय में उपस्थित होकर अपना बयान अथवा साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।
यानी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मुठभेड़ से जुड़ी प्रत्यक्ष जानकारी, कोई साक्ष्य या घटना के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य हैं, तो वह निर्धारित अवधि में जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
अब जांच में सामने आएगा घटनाक्रम का दूसरा पक्ष
इस मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को प्रशासनिक स्तर पर दर्ज करना है। खास तौर पर पुलिस और संदिग्धों के बीच मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई, फायरिंग कैसे शुरू हुई और उसके बाद घायल व्यक्ति की मौत तक घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा—इन पहलुओं से संबंधित जानकारी जांच के दौरान सामने रखी जा सकती है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और जानकारी रखने वाले लोगों के लिए बयान देने का रास्ता फिर खोल दिया है। अब देखना होगा कि 12 से 19 अगस्त के बीच कोई प्रत्यक्षदर्शी या महत्वपूर्ण साक्ष्य जांच अधिकारी के सामने आता है या नहीं।
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