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Justice Yashwant Varma Cash Case: संसदीय समिति ने तीनों आरोप सही माने, कैश कांड में रिपोर्ट ने खोले बड़े राज..

Justice Yashwant Varma Cash Case: संसदीय समिति ने तीनों आरोप सही माने, कैश कांड में रिपोर्ट ने खोले बड़े राज..

Justice Yashwant Varma Cash Case की जांच कर रही संसदीय समिति ने बुधवार को लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। समिति की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप सही साबित पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में ₹500 के नोटों से भरी बोरी और बड़ी संख्या में जले-अधजले नोट मिले थे। समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा कैश की मौजूदगी, उसके स्रोत और मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक सफाई नहीं दे पाए। इसके अलावा आग लगने के बाद सबूतों को सुरक्षित रखने में भी गंभीर लापरवाही सामने आई।

स्टोररूम में मिले थे ₹500 के जले हुए नोट

समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में ₹500 के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। फायर सर्विस और पुलिसकर्मियों ने जांच के दौरान बताया कि नोट सिर्फ एक जगह नहीं थे, बल्कि स्टोररूम के बड़े हिस्से में फैले हुए थे।

दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने बताया कि उन्होंने स्टोररूम में ₹500 के नोटों के बंडल देखे थे। उनके मुताबिक, ये नोट स्टोररूम में करीब 7-8 फीट तक फैले हुए थे।

पुलिस अधिकारी बोले- ₹5 लाख का आंकड़ा बहुत छोटा है

समिति के सामने पुलिस अधिकारी रूपचंद से जब पूछा गया कि क्या बरामद नकदी की मात्रा ₹5 लाख से ज्यादा थी, तो उन्होंने कहा कि ₹5 लाख का आंकड़ा बहुत छोटा है।

हालांकि, बड़ी बात यह रही कि नोटों को जब्त नहीं किया गया। उनकी गिनती भी नहीं हुई और न ही नोटों के नमूने सुरक्षित किए गए। इसी वजह से समिति यह निर्धारित नहीं कर सकी कि घटनास्थल पर वास्तव में कितनी नकदी मौजूद थी।

पहला आरोप- घर में बड़ी मात्रा में बेहिसाब कैश

जांच समिति ने जस्टिस वर्मा पर लगे पहले आरोप को सही पाया। आरोप था कि उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिली थी।

समिति के मुताबिक, स्टोररूम में ₹500 के नोटों के बंडल और अधजले नोट पाए गए थे। जस्टिस वर्मा कैश की मौजूदगी, उसके स्रोत और मालिकाना हक के बारे में संतोषजनक सफाई नहीं दे सके।

नतीजा: पहला आरोप साबित।

दूसरा आरोप- आग के बाद सबूतों से छेड़छाड़

जांच समिति ने दूसरा आरोप भी सही पाया। रिपोर्ट के मुताबिक, आग बुझने के बाद स्टोररूम को तुरंत सील नहीं किया गया था।

एक सुरक्षा अधिकारी ने जस्टिस वर्मा के स्टाफ को रात करीब 3 बजे स्टोररूम में सफाई करते देखा था। सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरा साफ कर दिया गया।

स्टोररूम में मिले नोटों को भी सुरक्षित नहीं किया गया। बाद में वे नोट दोबारा नहीं मिले। समिति ने माना कि इस तरह महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित नहीं रखा गया और उनसे छेड़छाड़ हुई।

नतीजा: दूसरा आरोप साबित।

तीसरा आरोप- जस्टिस वर्मा की सफाई को बताया टालमटोल वाला

समिति ने तीसरे आरोप को भी सही पाया। जांच की शुरुआत में जस्टिस वर्मा ने कहा था कि उन्हें कैश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

बाद में बचाव में उन्होंने नकदी के नकली होने और साजिश के तहत कैश रखे जाने की बात कही। लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई FIR, शिकायत या ठोस सबूत सामने नहीं आया।

जस्टिस वर्मा ने खुद भी समिति के सामने गवाही नहीं दी। उन्होंने अपने परिवार या स्टाफ के किसी सदस्य को भी गवाह के तौर पर पेश नहीं किया।

समिति ने उनकी सफाई को अधूरी, टालमटोल वाली और प्रभाव में भ्रामक माना।

नतीजा: तीसरा आरोप भी साबित।

Justice Yashwant Varma Cash Case: पूरा घटनाक्रम

14 मार्च 2025- सरकारी आवास में लगी आग

14 मार्च 2025 की रात करीब 11:35 बजे दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गई। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में थे।

आग बुझाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस की टीम पहुंची। इसी दौरान स्टोररूम में ₹500-₹500 के जले हुए नोटों के बंडल मिलने की बात सामने आई।

जस्टिस वर्मा ने अपने बचाव में कहा कि उनके घर के स्टोररूम में कोई नकदी नहीं थी और उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

21 मार्च 2025- ₹15 करोड़ कैश मिलने की रिपोर्टों से मचा हड़कंप

21 मार्च को कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि जस्टिस वर्मा के घर से करीब ₹15 करोड़ रुपये मिले हैं।

हालांकि, बाद की जांच में नोटों को जब्त या गिना नहीं गया था। इसलिए समिति यह तय नहीं कर सकी कि स्टोररूम में वास्तव में कितनी नकदी मौजूद थी।

इसी दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की इंटरनल इन्क्वायरी शुरू की। हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी।

अपने बचाव में जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा कि उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाए।

22 मार्च 2025- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने किया ट्रांसफर

22 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया।

इसी दौरान तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की।

कैश कांड से जुड़ी जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की गई, जिसमें कैश से जुड़े वीडियो शामिल थे।

मई 2025- जांच समिति ने रिपोर्ट सौंपी

3-4 मई 2025 के दौरान जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों को सही पाया गया और उन्हें दोषी ठहराया गया।

इसके बाद 8 मई 2025 को CJI ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की सिफारिश की। हालांकि, यह पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया था।

19 मई 2025- 64 पन्नों की रिपोर्ट सामने आई

19 मई 2025 को जांच पैनल की 64 पन्नों की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोररूम पर सीधा या परोक्ष नियंत्रण था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 14 मार्च की आग के बाद बड़ी संख्या में ₹500-₹500 के अधजले नोट बरामद हुए थे।

जांच पैनल ने निष्कर्ष दिया कि जस्टिस वर्मा को हटाने और उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

9 अप्रैल 2026- जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इसी साल 9 अप्रैल 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया।

अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वह उन कारणों से सम्मानित कार्यालय को परेशान नहीं करना चाहते, जिनकी वजह से उन्हें यह पत्र लिखना पड़ रहा है। उन्होंने गहरे दुख के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है।

अब संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी तीनों आरोप सही

अब बुधवार को लोकसभा में पेश की गई संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप सही पाए गए हैं।

समिति ने स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश मिलने, आग के बाद सबूतों को सुरक्षित नहीं रखे जाने और जस्टिस वर्मा की सफाई को अधूरी व टालमटोल वाली पाए जाने को लेकर तीनों आरोप साबित माने हैं।

जस्टिस वर्मा 9 अप्रैल 2026 को इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन संसदीय समिति की यह रिपोर्ट 2025 के कैश कांड की जांच में एक अहम घटनाक्रम बनकर सामने आई है।