पीलीभीत में SDM का एक्शन, भू-माफियाओं में हड़कंप! घरों पर ताले, सरकारी जमीन का पूरा इलाका हुआ सूनसान
पीलीभीत में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और अवैध निर्माण के मामले में आखिरकार प्रशासन हरकत में आया तो पूरे इलाके का नजारा ही बदल गया। जिस जगह पर अब तक कथित तौर पर प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए डंके की चोट पर निर्माण कराया जा रहा था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। एसडीएम के एक्शन के बाद कथित कब्जेदारों के घरों पर ताले लटक गए हैं और हालात ऐसे हैं कि अब निर्माण तो दूर, वहां कोई आता-जाता तक दिखाई नहीं दे रहा।
मामला खकरा नदी रिवर फ्रंट से जुड़ा है, जहां सरकारी जमीन पर कथित कब्जे, बिना स्वीकृत नक्शे के बहुमंजिला निर्माण और रिवर फ्रंट की दीवार तोड़कर रास्ता बनाए जाने जैसे आरोप सामने आए हैं। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई और अब कार्रवाई की आहट मिलते ही उस इलाके में अचानक खामोशी छा गई है।
कल तक डंके की चोट पर चल रहा था निर्माण, आज पसरा है सन्नाटा!
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के बाद निर्माण का काम तेजी से चल रहा था। और नियम-कायदों को दरकिनार कर बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जगह पर कथित तौर पर लंबे समय तक निर्माण गतिविधियां चलती रहीं, वहां प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होते ही पूरा माहौल बदल गया।
कल तक जहां निर्माण की रफ्तार थी, आज वहां खामोशी है।
कल तक जहां आवाजाही थी, आज वहां ताले हैं।
कल तक जहां कथित तौर पर सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल चल रहा था, आज वहां कोई दिखाई तक नहीं दे रहा। यह बदलाव अपने आप में पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, फिर खड़ी कर दी बहुमंजिला इमारत!
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के बाद वहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया गया। सवाल यह है कि अगर निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा नहीं था तो शुरुआत में ही कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
एक-एक मंजिल खड़ी होती रही और जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई आखिर कहां थी?
क्या निर्माण की जानकारी अधिकारियों को नहीं थी, या फिर जानकारी के बावजूद मामला लंबे समय तक कार्रवाई की पकड़ से बाहर रहा?
रिवर फ्रंट की दीवार तक तोड़ने का आरोप!
मामले में खकरा रिवर फ्रंट की दीवार तोड़कर रास्ता बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक परियोजना को नुकसान पहुंचाने का भी बनता है सरकारी योजना के तहत विकसित रिवर फ्रंट की दीवार आखिर किसकी निगरानी में तोड़ी गई? किसने रास्ता बनाया? और जब यह सब हो रहा था तो जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे?
नोटिस जारी हुआ, लेकिन निर्माण नहीं रुका?
मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि निर्माण के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किया गया था। इसके बावजूद कथित तौर पर निर्माण चलता रहा और बहुमंजिला इमारत खड़ी हो गई।
यही वह सवाल है जो पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बनाता है।
अगर नोटिस था तो कार्रवाई कहां थी?
अगर निर्माण अवैध था तो उसे रोका क्यों नहीं गया?
अगर अधिकारी मौके पर पहुंचे तो फिर निर्माण आगे कैसे बढ़ता रहा?
सूत्रों की मानें तो राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित होने की चर्चा भी है।
2022 में हुआ था रिवर फ्रंट का शिलान्यास
खकरा रिवर फ्रंट का शिलान्यास वर्ष 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी पुलकित खरे और मंत्री संजय गंगवार द्वारा किया गया था। सरकारी योजना के तहत विकसित इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की जमीन पर कब्जे और अवैध निर्माण के आरोप प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं।
अब सिर्फ यह कहना काफी नहीं होगा कि जांच की जा रही है। सवाल यह है कि अगर सरकारी जमीन पर कथित कब्जा हुआ है तो उसे खाली कब कराया जाएगा? अगर अवैध निर्माण हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और अगर कार्रवाई में लापरवाही हुई है तो उन अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी जिनकी जिम्मेदारी सरकारी संपत्ति की सुरक्षा थी?
SDM के एक्शन के बाद ताले, सन्नाटा और गायब हुई हलचल!
अब इस पूरे मामले की सबसे बड़ी तस्वीर कार्रवाई के बाद सामने आई है।
जिस जगह पर कथित तौर पर प्रशासन को ठेंगा दिखाकर धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा था, वहां SDM के एक्शन के बाद अचानक सब कुछ बदल गया।
कथित कब्जेदारों के घरों पर ताले लटक रहे हैं। इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। निर्माण कार्य पूरी तरह बंद नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, जहां पहले लोगों की आवाजाही और निर्माण की गतिविधियां दिखाई देती थीं, वहां अब कोई आता-जाता तक नहीं दिख रहा।
यह दृश्य कई सवाल छोड़ रहा है।
क्या प्रशासन के एक्शन की भनक लगते ही कथित कब्जेदारों ने इलाके से दूरी बना ली?
क्या कार्रवाई के डर से घरों पर ताले लगाकर लोग गायब हो गए?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर प्रशासन पहले ही हरकत में आ गया होता तो क्या सरकारी जमीन पर कथित तौर पर इतना बड़ा निर्माण खड़ा हो पाता?
फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इलाके में पसरी खामोशी साफ संकेत दे रही है कि जिस जगह पर कल तक कथित तौर पर बेखौफ होकर नियमों को चुनौती दी जा रही थी, वहां अब प्रशासन के तेवर बदलते ही सन्नाटा छा गया है।
एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह का कहना है कि जांच टीम को भेजकर निर्माण रुकवा दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पूरे पीलीभीत की नजर इस जांच पर टिकी है। क्योंकि मामला सिर्फ एक निर्माण का नहीं है—सवाल सरकारी जमीन का है, सवाल रिवर फ्रंट की सुरक्षा का है और सवाल उन लोगों की जवाबदेही का है जिनकी आंखों के सामने कथित तौर पर निर्माण बढ़ता रहा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह कार्रवाई सिर्फ ताले लगवाने और निर्माण रुकवाने तक सीमित रहती है या फिर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के आरोपों की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होती है, जो भविष्य में सरकारी संपत्ति पर नजर डालने वालों के लिए सीधा संदेश बन जाए।