Giorgia Meloni, इटली की प्रधानमंत्री सितंबर में देश की राजनीति में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाने वाली हैं। मेलोनी की सरकार 4 सितंबर 2026 को सिल्वियो बर्लुस्कोनी की 1,412 दिन चली सरकार को पीछे छोड़कर इटली गणराज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन सकती है। खास बात यह है कि कुछ ही महीने पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। 10 जून 2026 को मोदी 4,399 दिनों के लगातार कार्यकाल के साथ भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने और जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
मोदी ने जून में बनाया था ऐतिहासिक रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून 2026 को भारत की राजनीति में एक नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने लगातार 4,399 दिन प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए जवाहरलाल नेहरू का 4,398 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू मई 1952 से मई 1964 तक लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहे थे।
लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 में दूसरी बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस तरह वह लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री बनने वाले नेताओं में शामिल हैं। 10 जून 2026 को उनका लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने का समय 4,399 दिन हो गया।
अब इटली में मेलोनी की बारी
भारत के बाद अब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी कार्यकाल से जुड़ा बड़ा रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही हैं। मेलोनी ने 22 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री पद संभाला था। उनकी सरकार 2 मई 2026 को 1,288 दिन पूरे करके इटली गणराज्य की दूसरी सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई थी।
4 सितंबर को टूटेगा बर्लुस्कोनी का रिकॉर्ड
सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार 11 जून 2001 से 23 अप्रैल 2005 तक चली थी और कुल 1,412 दिन सत्ता में रही थी। अब जॉर्जिया मेलोनी की सरकार 4 सितंबर 2026 को इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकती है। इसके बाद उनकी सरकार आधुनिक इटली की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन जाएगी।
लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझिए
मोदी और मेलोनी के रिकॉर्ड को बिल्कुल एक जैसा समझना सही नहीं होगा। नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार पद पर रहने का है। वहीं जॉर्जिया मेलोनी के मामले में बात एक ही सरकार के लगातार सत्ता में बने रहने की हो रही है। यानी दोनों नेताओं ने राजनीतिक स्थिरता और लंबे कार्यकाल से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड बनाए हैं।
इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। 2022 के चुनाव में उनकी ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी और गठबंधन सरकार का नेतृत्व करते हुए मेलोनी प्रधानमंत्री बनीं। उस समय उनकी सरकार को इटली में राजनीतिक स्थिरता लाने की उम्मीद के तौर पर देखा गया था।
2012 में बनी थी ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी
मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली की स्थापना 16 दिसंबर 2012 को हुई थी। शुरुआती दौर में पार्टी को बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिली। करीब सात साल तक इसका वोट शेयर लगभग 3 फीसदी के आसपास ही रहा। लेकिन धीरे-धीरे पार्टी का जनाधार बढ़ा और 2022 के चुनाव में यह इटली की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई। 2018 के चुनाव में पार्टी को करीब 4 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 2022 में उसका वोट शेयर लगभग 26 फीसदी तक पहुंच गया।
31 साल की उम्र में बनी थीं सबसे युवा मंत्री
जॉर्जिया मेलोनी ने कम उम्र में ही इटली की राजनीति में अपनी पहचान बना ली थी। वह 31 साल की उम्र में देश की सबसे युवा मंत्री बनी थीं। इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में लगातार अपनी पकड़ मजबूत की और आखिरकार 2022 में इटली की प्रधानमंत्री बन गईं।
अवैध प्रवासन पर मेलोनी सरकार का सख्त रुख
प्रधानमंत्री बनने के बाद मेलोनी सरकार ने अवैध प्रवासन के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। सरकार ने अवैध प्रवासियों को हिरासत में रखने की अवधि बढ़ाने सहित कई सख्त कदम उठाए हैं। इटली में अवैध प्रवासन को रोकना मेलोनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है।
सरोगेसी पर भी लिया बड़ा फैसला
मेलोनी सरकार ने सरोगेसी को लेकर भी बेहद सख्त कानून लागू किया है। इटली में सरोगेसी को सार्वभौमिक अपराध माना गया है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई इतालवी नागरिक अमेरिका, कनाडा या किसी ऐसे देश में जाकर सरोगेसी कराता है जहां यह कानूनी है, तो उसके खिलाफ इटली में भी कार्रवाई की जा सकती है।
सरोगेसी मामले में 2 साल तक जेल
दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल और 10 लाख यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इटली सरकार का तर्क है कि सरोगेसी महिलाओं के शरीर के वस्तुकरण और बच्चों के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देती है। सरकार का कहना है कि इस प्रथा से महिलाओं के हितों को नुकसान पहुंचता है।
न्याय व्यवस्था और संविधान में बदलाव भी एजेंडे में
मेलोनी सरकार के एजेंडे में न्याय व्यवस्था और संविधान में सुधार भी शामिल रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की शक्तियों और इटली में राजनीतिक स्थिरता से जुड़े सुधारों को लेकर भी उनकी सरकार ने पहल की है। मेलोनी ने बार-बार राजनीतिक स्थिरता को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया है।
इटली की अर्थव्यवस्था पर भी घिरीं
मेलोनी को इटली की आर्थिक स्थिति को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। हालांकि, आर्थिक नीतियों और सरकार के प्रदर्शन पर उठने वाले सवालों का वह कई बार कड़ा जवाब दे चुकी हैं। उनकी सरकार के सामने ऊर्जा कीमतों, आर्थिक विकास और देश की वित्तीय स्थिति जैसी चुनौतियां भी रही हैं।
ट्रंप के सामने भी नहीं झुकीं मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी का राजनीतिक अंदाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा में रहा है। G7 बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचाने के लिए मिन्नतें की थीं। इस दावे के बाद काफी चर्चा हुई। मेलोनी ने इसके जवाब में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि इटली और वह खुद कभी किसी के सामने नहीं झुकते।
मोदी और मेलोनी की कहानी में क्या समानता है?
दोनों नेताओं के राजनीतिक सफर में एक चीज समान नजर आती है—लंबी राजनीतिक स्थिरता। नरेंद्र मोदी ने भारत में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर 2026 में नेहरू का लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने का रिकॉर्ड तोड़ा। वहीं मेलोनी की सरकार इटली की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के बीच लगातार सत्ता में बनी हुई है और सितंबर में बर्लुस्कोनी की सरकार का रिकॉर्ड तोड़ने की स्थिति में है।
भारत और इटली की राजनीति में बना नया अध्याय
एक तरफ नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने का नया रिकॉर्ड बनाया है, तो दूसरी तरफ जॉर्जिया मेलोनी इटली गणराज्य के इतिहास में अपनी सरकार को सबसे लंबे समय तक चलाने वाली सरकार बनाने की ओर बढ़ रही हैं। दोनों घटनाएं इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं कि भारत और इटली जैसे लोकतांत्रिक देशों में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना अपने आप में बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।