Fake Coin Factory: सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस अब सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क की तलाश में जुट गई है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने सिक्के बनाने के लिए इंडस्ट्रियल लेवल का पूरा सेटअप तैयार किया था, जहां मशीनों और अलग-अलग डाई की मदद से रोज करीब 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। मौके से छह मशीनें, डाई, पॉलिशिंग मशीन, ओवन और बड़ी संख्या में दूसरे उपकरण बरामद हुए हैं। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुल आठ लोगों के गिरोह की जानकारी सामने आई है और तीन आरोपी अभी फरार हैं। अब बरामद सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ियां माने जा रहे हैं।
25 साल पुराने नेटवर्क की खुल रही कुंडली
इस मामले में सबसे अहम नाम मोहाली, पंजाब निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का सामने आया है। पुलिस के मुताबिक वह वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में शामिल बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार दिल्ली पुलिस उसे पहले गिरफ्तार कर चुकी है और एक समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित था।
अब सहारनपुर पुलिस उपकार लूथरा के पुराने मामलों, संपर्कों और कारोबार से जुड़ी कड़ियों को खंगाल रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने लंबे समय में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े और क्या पुराने नेटवर्क के लोग अलग-अलग जगहों पर नए ठिकानों के साथ सक्रिय रहे हैं।
सहारनपुर में नया बेस बनाने की तैयारी थी
पुलिस के मुताबिक आरोपी सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने का नया बेस तैयार करने की तैयारी में थे। हालांकि इससे पहले ही कोतवाली नगर, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को पकड़ लिया गया।
जांच अब इस सवाल पर भी केंद्रित है कि सहारनपुर में इस नेटवर्क को किसकी मदद मिल रही थी और क्या यहां पहले से कोई संपर्क या सप्लाई नेटवर्क मौजूद था।
सात रजिस्टर खोलेंगे नकली सिक्कों के कारोबार का हिसाब
पुलिस को नकली सिक्कों के साथ सात रजिस्टर भी मिले हैं। इन रजिस्टरों को इस मामले का महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है। पुलिस इनकी जांच करके गिरोह के लेनदेन, सप्लाई और बाजार से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।
रजिस्टरों में दर्ज नाम, नंबर, रकम या अन्य विवरण अगर गिरोह की सप्लाई से जुड़े पाए जाते हैं तो जांच उन लोगों तक पहुंच सकती है, जो नकली सिक्कों को बाजार में खपाने में मदद करते थे।
आठ मोबाइल से सामने आएंगे पुराने संपर्क
सात रजिस्टरों के अलावा पुलिस ने आठ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। अब इन मोबाइलों की जांच के जरिए आरोपियों के संपर्कों और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी लगातार किन लोगों से बात करते थे, किन राज्यों में उनके संपर्क थे, सहारनपुर आने से पहले वे कहां सक्रिय थे और नकली सिक्कों की सप्लाई के लिए किन लोगों से संपर्क किया जाता था।
इन मोबाइल नंबरों और संपर्कों को आरोपियों के पुराने नेटवर्क से भी मिलाया जा सकता है। इससे गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
रोज 12 हजार नकली सिक्के बनाने की क्षमता
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने नकली सिक्के बनाने के लिए छोटा-मोटा सेटअप नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल लेवल की व्यवस्था तैयार कर रखी थी। इस सेटअप से रोज करीब 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह मशीनें, लोहे की डाई, बिना मोहर की डाई, मोहर लगी डाई, पॉलिशिंग मशीन, ओवन और सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कई दूसरे उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में अधबने सिक्के भी मिले हैं, जिनकी कीमत करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है।
39 बिना मोहर और 20 मोहर लगी डाई बरामद
पुलिस के मुताबिक मौके से 39 बिना मोहर की डाई और 20 मोहर लगी डाई बरामद हुई हैं। इन डाई की मदद से सिक्कों को आकार और पहचान देने का काम किया जाता था।
इसके अलावा डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, ब्रश और दूसरे उपकरण भी बरामद हुए हैं। इससे पुलिस को संकेत मिला है कि सिक्कों की पॉलिश और फिनिशिंग का काम भी इसी सेटअप में किया जाता था।
रेती, हथौड़े से लेकर रिंच और पेचकश तक बरामद
फैक्ट्री से नकली सिक्के बनाने के अलावा मशीन और डाई से जुड़े काम में इस्तेमाल होने वाले कई औजार भी मिले हैं। इनमें रेती, हथौड़े, आरी, रिंच, शिकंजा, प्लास और पेचकश शामिल हैं।
इन सामानों की मौजूदगी से पता चलता है कि आरोपियों ने सिक्के तैयार करने के साथ-साथ मशीनों और डाई की मरम्मत व फिनिशिंग के लिए भी पूरा इंतजाम कर रखा था।
ऐसे असली जैसे दिखते थे नकली सिक्के
पुलिस के मुताबिक गिरोह पहले मशीन और डाई की मदद से सिक्के तैयार करता था। इसके बाद सिक्कों की पॉलिश और फिनिशिंग की जाती थी, ताकि वे देखने में असली सिक्कों जैसे नजर आएं।
एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक आरोपियों द्वारा बनाए गए सिक्के काफी हद तक असली सिक्कों से मेल खाते हैं। इसी वजह से आम लोगों के लिए दोनों में अंतर करना आसान नहीं हो सकता था।
छोटे लेनदेन वाली जगहों पर खपाए जाते थे सिक्के
पुलिस के मुताबिक गिरोह नकली सिक्कों को ऐसी जगहों पर खपाने की कोशिश करता था, जहां रोज बड़ी संख्या में छोटे नकद लेनदेन होते हैं। इनमें छोटे कारोबारी, शराब के ठेके और टोल टैक्स जैसी जगहें प्रमुख बताई गई हैं।
ऐसी जगहों पर बड़ी संख्या में सिक्कों का लेनदेन होने के कारण हर सिक्के की बारीकी से जांच नहीं हो पाती। पुलिस का कहना है कि गिरोह इसी का फायदा उठाकर नकली सिक्कों को धीरे-धीरे बाजार में चलाने की कोशिश करता था।
70 करोड़ रुपये से ज्यादा के सिक्के खपाने का अनुमान
पूछताछ में नकली सिक्कों को बड़े पैमाने पर बाजार में चलाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में खपाए जाने का अनुमान है।
हालांकि एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक आरोपियों ने अभी तक कोई सटीक रकम नहीं बताई है। इसलिए 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है, अंतिम आंकड़ा नहीं।
अब सात रजिस्टर, आठ मोबाइल, पुराने रिकॉर्ड और आर्थिक लेनदेन की जांच के जरिए वास्तविक रकम का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
2001 से हर दिन इतनी बड़ी संख्या में सिक्के बने, यह अभी तय नहीं
पुलिस ने जिस सेटअप की क्षमता करीब 12 हजार सिक्के प्रतिदिन बताई है, उससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह बड़े स्तर पर उत्पादन करने की तैयारी में था। लेकिन पुलिस अभी यह मानकर नहीं चल रही है कि वर्ष 2001 से लेकर अब तक हर दिन इसी क्षमता पर नकली सिक्के बनाए जाते रहे।
यही वजह है कि बाजार में वास्तव में कितने नकली सिक्के खपाए गए और उनकी कुल कीमत कितनी थी, इसका सही आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पांच आरोपी गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
सहारनपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में कुल आठ लोगों के गिरोह की जानकारी सामने आई है।
गिरोह के बाकी तीन आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस बरामद मोबाइल और रजिस्टरों से मिले सुराग के आधार पर उनकी पहचान और ठिकानों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
PNB चेस्ट कैश से अभी कोई लिंक नहीं मिला
पुलिस के मुताबिक अभी तक की जांच में इस गिरोह का PNB चेस्ट कैश से कोई लिंक सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस आरोपियों के पुराने संपर्कों और नकली सिक्कों की सप्लाई के नेटवर्क की जांच जारी रखे हुए है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का विस्तार दूसरे राज्यों तक था या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन मिला तो उस दिशा में भी होगी जांच
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता गिरोह के पुराने संपर्कों, बाजार नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाना है। अगर जांच के दौरान किसी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि होती है तो पुलिस उस दिशा में भी कार्रवाई करेगी।
व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों से भी अपील की गई है कि अगर उन्हें संदिग्ध सिक्के मिलते हैं तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।
सात रजिस्टर और आठ मोबाइल से खुलेगा पूरे नेटवर्क का राज
सहारनपुर की इस कार्रवाई में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री तक पहुंच बना ली है, लेकिन असली चुनौती अब उसके बाजार नेटवर्क को उजागर करना है। सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन इस जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ियां बन सकते हैं।
इनसे यह पता चल सकता है कि नकली सिक्के कहां-कहां भेजे जाते थे, किन लोगों के जरिए बाजार तक पहुंचते थे और 25 साल पुराने बताए जा रहे इस नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। फिलहाल 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का आंकड़ा अनुमान है और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही नकली सिक्कों के इस पूरे कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).