आईआईटी कानपुर ने अपने एक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा है कि स्मॉग को खत्म करने के लिये वो कृत्रिम बारिश करा सकता है। स्मॉग पर काबू पाने के इस अभियान को ‘‘ऑपरेशन क्लाउड सीडिंग ’’ का नाम दिया गया है।
ऑपरेशन क्लाउड सीडिंग के लिए आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिक विमान में अपने उपकरण फिट करेगें। विमान के बाहरी हिस्से में कई बर्नर और जेनरेटर लगाये जायेगें जिनमे सिल्वर आयोडाईड का घोल उच्च दाब पर भरा होगा।
आसमान में हवा के उल्टी दिशा में यह विमान उड़ाया जायगा। बादलों का सामना होते ही बर्नर चालू कर दिये जायेगें। इससे निकलने वाला सिल्वर आयोडाइड का घोल बादलों को बिन बरसे जाने नहीं देगा। लेकिन इसके लिए वैज्ञानिक पहले मौजूद बादलों का अध्ययन करेगें। बरसने वाले बादलों में अति शीतल तरल जल व बर्फ के अंश मौजूद होना जरूरी है। इसके अलावा ठण्डे और गर्म बादलों का मिश्रण भी आकाश में मौजूद होना चाहिये। अन्यथा पर्याप्त अथवा उचित स्थान पर बादल नहीं बरसेगें।
हालांकि आईआईटी, कानपुर इसरो के विमान के जरिये कृत्रिम बारिश का सफल प्रयोग कर चुका है लेकिन वो मानसून के दिनों में बादलों को घेर कर बरसात कराने के लिये था। बिन मौसम बरसात का यह पहला प्रयोग होगा। इसके अलावा विश्व के कई देशों में इजराइल प्रमुख है, कृत्रिम बरसात के जरिये सूखे की स्थिति से निपटा जाता रहा है। लेकिन प्रदूषण खत्म करने के लिये कृत्रिम बरसात का यह पहला प्रयोग है और आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिक भी इस प्रयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं।
वैज्ञानिक मनिंद्र अग्रवाल, क्लाउड सीडिंग विशेषज्ञ, आईआईटी ने दावा किया है कि हवा में दस हजार फिट की उॅचाई पर जाकर सिल्वर आयोडाईड का छिड़काव इन्सानी बस्तियों पर कोई दुष्प्रभाव नहीे डालेगा। इसके कण धरती पर पहुॅचते पहुॅचते पानी के साथ घुलकर पाताल में समा जायेगें और भूगर्भीय जल के लिये भी नुकसानदेह साबित नहीं होगें। 
गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है