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Monday Special – देवों के देव महादेव भोले शंकर भगवान ने भी ली थी समाधि, जानिए कहां और क्यों

सोमवार विशेष – 60 हजार वर्षों तक समाधि में रहे थे भोलेनाथ, जानिए कहां है यह पवित्र स्थान, पूरी होती है इच्छा 
 
Monday Special – देवों के देव महादेव के भक्तों क्या आप जानते हैं कि भोले शंकर भगवान ने भी समाधि ली थी। वो भी पूरे के पूरे 60 वर्षों तक समाधि में विलीन रहे थे। अब आप यह भी जानना चाहेंगे कि आखिरकार यह पवित्र स्थान कहां होगा और आखिर ऐसा क्या हुआ होगा कि महादेव को समाधि लेनी पड़ी। तो यह जानने के लिए बने रहिये हमारे साथ। 
 
आगे पढ़िए

यह पवित्र स्थान ऋषिकेश में है। हुआ कुछ यूं था कि विश्व कल्याण के लिए समुद्र मंथन के बाद निकले विष को कंठ में धारण कर भगवान भोलेनाथ की हजारों वर्ष की तपस्थली रही यमकेश्वर घाटी का नीलकंठ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। 


जानिए पौराणिक मान्यता
 
पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के बाद कालकूट विष को कंठ में धारण किया तो वे नीलकंठ कहलाए। उन्हीं के नाम से इस तीर्थस्‍थल का नाम नीलकंठ तीर्थ पड़ा। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इस स्थान पर 60 हजार वर्षों तक समाधि ली थी ताकि विष के प्रभाव को कम किया जा सके।
 
मां सटी ने थी प्रथम पूजा 

समाधि के उपरान्त जगद्धात्री मां सती की प्रार्थना पर प्रसन्न होकर जगत का कल्याण करने के लिये भगवान महादेव जिस वटवृक्ष के मूल में समाधिस्थ हुए थे उसी स्थान पर नीलकंठ के स्वरूप में स्वयंभू-लिंग के रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का सर्वप्रथम पूजा मां सती ने की थी। आज यही स्थान नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध है और आज भी मंदिर में स्थित शिवलिंग पर नीला निशान दिखाई देता है।

ऊँ नमः शिवाय … हर हर महादेव