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Hindu Temple – कपूरथला में है भारत का दूसरा अद्भुत मंदिर, जानिए पंच मंदिर का रहस्य और चमत्कार

हिन्दू मंदिर – जानिए इस चमत्कारी मंदिर में कौन है विराजमान और क्या मिलता है देखने को अद्भुत

Hindu Temple – पंच मंदिर का निर्माण कपूरथला स्टेट के महाराजा फतेह सिंह ने 1831 में तैयार करवाया था। यह मंदिर 12 साल में तैयार हुआ था। अब यह मंदिर 200 साल पुराना और इतिहासिक है। यह भारत का दूसरा ऐसा मंदिर है जहां सूर्य भगवान और राधा-कृष्ण के मंदिर में सुशोभित प्रतिमा पर हर सुबह सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं।

दूसरा मंदिर भी है ऐसा चमत्कारी 
देश का पहला मंदिर उड़ीसा के कोणार्क में स्थित सूर्य मंदिर है। कोणार्क के सूर्य मंदिर को राजा नरसिम्हा देव ने 1278 ईसवी में तैयार करवाया था। वहीं, 200 साल पहले महाराजा फतेह सिंह ने कपूरथला में पंच मंदिर तैयार करवाया। पंच मंदिर में सबसे सामने भगवान राधा-कृष्ण का पुरातन मंदिर है। वो कहीं से भी देखें एक जैसे नजर आएंगे। इमारत भी चारों तरफ से एक जैसी ही है। अद्धुत बात यह है कि भक्त यहां के मुख्य रजत द्वार (परिक्रमा) के 150 फीट पीछे से रोड़ में खडा हुआ ही सभी मूर्तियों को प्रणाम कर सकता है।
नवरात्र में लगती है भीड़ 
सूर्य भगवान का यह पंजाब में इकलौता मंदिर है। केवल उड़ीसा में ही ऐसा मंदिर है। मंदिर परिसर में दुर्गा माता का मंदिर, श्री गणेश जी का मंदिर और शिव मंदिर भी सुशोभित है। अब मंदिर परिसर में वासुदेव और देवकी मंदिर, शनिदेव मंदिर और श्री लक्ष्मी-नरायण जी के मंदिर भी सुशोभित कर दिए गए हैं। नवरात्र के दिनों में पंच मंदिर में श्रद्धालुओं की खूब रौनक होती है। मंदिर को बाहर और अंदर से रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है।
पंच मंदिर का बाहरी दृश्य। भगवान राधा-कृष्ण के मंदिर में 40 दिन आरती करने पर होती है मनोकामना पूरी।

200 साल पहले स्थापित की गईं थी मूर्तियां

भगवान राधा-कृष्ण का पुरातन मंदिर| पंच मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण का पुराना मंदिर है। यहां 200 साल पुरानी सिद्ध और सुंदर मूर्तियां हैं। कोई 40 दिन आरती करे तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। रोड में खड़े होने पर मुरली मनोहर (राधा-कृष्ण) की मूर्तियों के दर्शन हो जाते हैं। यह मंदिर उड़ीसा के कोणार्क में स्थित सूर्य मंदिर की तर्ज पर है।

श्री सूर्य देव का पुरातन मंदिर| पंच मंदिर के दूसरे कोने पर श्री सूर्य देव का पुराना मंदिर है। जहां सात घोड़ों पर विराजमान सूर्य देव की पुरानी सिद्ध मूर्ति है। रविवार को कनक और गुड का भोग लगाने से आंखों की रोशनी और दरिद्रता दूर हो जाती है। इसकी खासियत यह है कि सूर्य भगवान की प्रतिमा पर हर सुबह सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं।

आज भी वैसा ही दिखता है मंदिर – हेड पुजारी

मंदिर के हेड पुजारी कृष्ण लाल ने बताया कि यह मंदिर 200 साल पुराना है। आज भी भगवान की मूर्तियां और इमारत वैसी की वैसी है। हर साल इमारत को पेंट होता है। नवरात्र पर मंदिर शाम के समय खूब भीड़ होती है।