उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में नियुक्त डीएम साहिबा यूं तो अपने अच्छे कार्यों को लेकर जमकर छाईं हुईं हैं उनकी बहादुरी की कहानी सोशल मीडिया में मिलियन के पार हो चुकी है इतना ही नहीं हाल ही में उन्हे विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट के कार्यक्रम में पुरुस्कृत भी किया है। वहीं डीएम साहिबा के निरीक्षणों और कार्यों की पोस्ट सोशल मीडिया में पड़ती रहती है। अभी हाल ही में उनकी एक गौशाला के निरीक्षण की पोस्ट भी डाली है। जिसमे गायों के रख रखाव को लेकर सख्त निर्देश देने की बात भी लिखी हुई है। लेकिन लगता है की जिम्मेदारों को डीएम साहिबा के निर्देशों की कोई परवाह ही नहीं है तभी तो जमीनी हकीकत में गायों की दुर्दशा का भगवान ही मालिक है।
आपको बता दें पूरा मामला पैलानी थाना अंतर्गत खप्टीहा कला गांव की गौशाला का है जहां कई गौवंश तड़पते नजर आए। न ही ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था नजर आई और न ही हरी घास दिखी और न ही भूषा नजर आया। जबकि डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने हरी घास और ठंड से बचाव के निर्देश दिए हुए हैं। जिसकी पोस्ट उन्होंने यूपी सीएमओ को टैग करते हुए डाली है। पर शायद जिम्मेदारों को डीएम साहिबा के निर्देशों की परवाह ही नहीं है। गोवशों की दुर्दशा की यह कोई पहली तस्वीर नहीं है कई गौशालाओं से एसी तस्वीरें सामने आती रहती हैं। वहीं जब गौशाला के कर्मचारी रामचंद्र से बात की तो उसने बताया की वह गौवंशों को खाने में भूषा खरी और पयार देते हैं। लेकिन गोवंशों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की उन्हे क्या खिलाया जाता है क्या नहीं। तड़पते गोवंशों के ट्रीटमेंट के बारे में कर्मचारी ने बताया की सूचना देने में कभी डॉक्टर आते है तो कभी नहीं आते। वहीं उसने बताया की इस गौशाला में लगभग 450 गौवंश हैं और आठ से दस गोवंश मर्नासन की अवस्था में पड़े हैं। योगी सरकार भले ही गोवंशों की अच्छी व्यवस्था के लिए पैसे पानी की तरह बहा रही है लेकिन उसका सारा मजा इंसानियत भूल चुके जिम्मेदार ही उठा रहे हैं क्योंकि अधिकारियों के पास इतना वक्त ही नहीं की वह हर गौशाला का समय समय पर निरीक्षण कर सकें या फिर एक वजह ये भी हो सकती है की जिम्मेदारों के जिम्मेदार भी बहती गंगा में हांथ धो रहे हों।