“नवरात्रि” के चौथे दिन “कुष्मांडा देवी” में उमड़ा “भक्तों” का सैलाब – जानिए इस “सिद्ध पीठ” का रहस्य
रिपोर्ट – मनीष भटनागर – कानपुर नगर
Kanpur News – नवरात्र को लेकर देश भर में माता के मंदिरों में भक्तों की भी दिखाई दे रही है। पूरे देश भर में नवरात्र के इस पावन पर्व को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। आज नवरात्र का चौथा दिन है। नवरात्र में हर दिन अलग-अलग माता के होते हैं। नवरात्र का चौथा दिन मां कुष्मांडा देवी का होता है। मां कुष्मांडा देवी का एशिया का सबसे बड़ा मंदिर और सिद्ध पीठ में से एक कानपुर के घाटमपुर इलाके में मौजूद है। यहां पर नवरात्र में भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ माता के दर्शन करने के लिए आती है।
जानिए क्या है इस मंदिर का रहस्य और चमत्कार
कानपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर बस से घाटमपुर में यह सिद्ध पीठ स्थित है। जहां नवरात्र में दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को लेकर यह विशेष मान्यता है कि जो लोग आंखों की किसी समस्या से ग्रसित होते हैं, वह अगर मंदिर में माता की मूरत से नीर लेकर अपनी आंखों में लगाते हैं, तो उनके आंखों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इतना ही नहीं शारीरिक रोगों से दूर होने के लिए भी लोग इस मंदिर में आते हैं और उन्हें अत्यधिक शारीरिक लाभ मिलता है। आंखों के रोग ठीक हो जाने के बाद लोग यहां पर माता के चरणों में सोने और चांदी की आंखों को भी चढ़ाते हैं। यह इस सिद्ध स्थान की विशेष मान्यता है।
एशिया का सबसे बड़ा है माँ कुष्मांडा देवी का मंदिर
मंदिर कमेटी के सदस्य गुड्डू पंडित ने बताया कि यह मंदिर बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक है। यह माता के सिद्धपीठो में से एक है और एशिया का सबसे बड़ा मां कुष्मांडा देवी का मंदिर है। यहां के लिए यह विशेष मान्यता है कि जो भी माता के चरणों में चढ़े नीर को अपनी आंखों में लगता है, उसके आंखों के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
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