यूं तो उत्तर प्रदेश का बांदा जिला बालू माफियाओं का गढ़ माना जाता है और अवैध खनन की सूचनाएं आम तौर पर आती रहती हैं। लेकिन अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी जिसे सरकार ने सौंपी हो और उसी की अवैध खनन में भूमिका संदिग्ध नजर आए तो यह सरकार के राजस्व और जिले के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
एक एसा ही मामला पैलानी थाना अंतर्गत खपटीहा कला की 100/3 बालू खदान से सामने आया है। जहां 20 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार को नदी की जलधारा में पोकलैंड मशीन उतारकर खनन किया जा रहा था तभी वहां के ग्रामीणों ने खनन की वीडियो और तस्वीरें बना ली साथ ही एसडीएम पैलानी को सूचना दी की बिना ओटीपी चालू हुए यहां खनन किया जा रहा है साथ ही नियम विरुद्ध नदी की जलधारा से अवैध खनन किया जा रहा जिस पर उन्होंने ऐसा होता पाए जाने पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया वहीं अवैध खनन के वीडियो वायरल हो गए जिसके बाद हमने 20 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार करीब 6 बजकर 37 मिनट पर खनिज अधिकारी बांदा को फोन किया और खपटीहा में होने वाले खनन की जानकारी ली तो उन्होंने खनन को वैध बताते हुए कहा की वह पहली किस्त जमा कर चुके हैं और खनन हो सकता है। लेकिन कुछ मीडिया संस्थानों ने अगले दिन अवैध खनन की खबर प्रकाशित कर दी इसके बाद मशीनों से खनन तो रुक गया लेकिन ट्रैक्टरों द्वारा बालू चोरी से खदान संचालक ने बेचना शुरू कर दिया ग्रामीणों ने एक बार फिर इसकी शिकायत एसडीएम से को जिसके बाद एसडीएम शशिभूषण मिश्रा, क्षेत्राधिकारी अंबुजा त्रिवेदी और खान निरीक्षक के साथ मौके पर पहुंच गए और खदान संचालक को जमकर फटकार लगाई और कहा की बिना ओटीपी चालू किए और बिना सीमांकन के साथ ही नियमतः जबतक सीसीटीवी कैमरे न लग जाए और रास्ता न बन जाए तब तक अगर खनन किया तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा एसडीएम ने तुरंत सीमांकन कराया साथ ही कहा की तीन मीटर से ज्यादा खनन नहीं किया जाएगा पानी निकलने के बाद वहां खनन रोक दिया जाएगा और नदी की जलधारा को प्रभावित नहीं किया जाएगा साथ ही ग्राम समाज की जमीन पर खनन किया तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्रवाई से साफ हो गया की खनिज अधिकारी ने फोन पर एक तरह से गलत बयान दिया और मीडिया को गुमराह किया जबकि वह जानते थे कि खपटिहा बालू खदान में अभी कानूनी नियम पूरे नहीं किए गए न ही सीसीटीवी कैमरे लगे और न ही अभी तक रास्ता बना है। जिससे अवैध खनन में उनकी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। ऐसे में सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो सकता है और नदी को भी क्षति पहुंचाई जा सकती है। इसलिए उच्च अधकारियों को इस मामले में जांच कर कार्रवाई करना और खनिज अधिकारी की भूमिका पर भी गौर फरमाना आवश्यक हो जाता है।