Kannauj News : अखिलेश छोड़ेंगे करहल, करेंगे दिल्ली की राजनीति
रिपोर्ट : संदीप शर्मा
कन्नौज लोकसभा से वर्ष 2024 के चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बड़ा फैसला लिया है। अखिलेश यादव अब करहल से विधायकी की सीट छोड़कर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे। यह घोषणा अखिलेश ने शनिवार को लखनऊ में नव निर्वाचित आप सांसदों को बुलाकर उनकी मीटिंग में मंथन के दौरान यह फैसला लिया है। माना जा रहा है कि अखिलेश अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे। अखिलेश ने साल 2022 में मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। जीत के बाद सपा प्रमुख ने आजमगढ़ सीट से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद आजमगढ़ में हुए उपचुनाव में दिनेश लाल यादव निरहुआ ने जीत दर्ज की थी।

शनिवार को लखनऊ में साल 2024 के लोकसभा चुनाव में नवनिर्वाचित 37 सांसदों की बुलाई गई बैठक में अखिलेश ने उपरोक्त फैसला लिया है। अखिलेश का कहना था कि, इस चुनाव में हमारे सांसदों ने मेहनत की है, जनता के बीच रहने से उनको जनता ने अपना आशीर्वाद दिया है। यही कारण है कि सपा अब नये मुकाम पर पहुंची है। सरकार और प्रशासन पर अखिलेश ने कहा कि, हमारे एक सांसद हैं जिनको जीत का सर्टिफिकेट मिल गया है, दूसरे वह हैं जिनको बीजेपी की धांधली की वजह से सर्टिफिकेट नहीं मिल सका, लेकिन हम दोनों सांसदों को बधाई देंगे। आखिर जनता के मुद्दों की जीत हुई है।उन्होंने कहा कि पीडीए की रणनीति से जीत होने से देश में नकारात्मक राजनीति खत्म होगी। समाजवादियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। इसलिये वह जनता की बात सुने और उनका निराकरण करायें।
बताते चलें कि कन्नौज सीट से साल 2000 में अपना पहला चुनाव लड़ने वाले अखिलेश अपनी जीत के बाद लगातार अजेय जीत की ओर बढ़ते गए और यही कारण है कि सपा के गढ़ कन्नौज की जनता के अटूट स्नेह से अखिलेश को हैट्रिक लगाने के बाद भी इस बार की चौथी ऐतिहासिक जीत मिली है। 12 साल के एक लंबे समय अंतराल के बाद अखिलेश अपनी यह जीत कभी नहीं भूल सकते। करहल विधानसभा छोड़ने की अगर बात करें तो इसके पीछे खास वजह है। यूपी में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में 3 साल का यह समय अखिलेश दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होकर देना चाहते हैं।चूंकि इस लोकसभा चुनाव में सपा देश की सबसे बड़ी तीसरी पार्टी बनकर उभरी है, ऐसे में अखिलेश अब केंद्रीय राजनीति में पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का काम करेंगे। राष्टीय राजनीति की तहत अभी तक केबल यूपी में उभरी सपा का वर्चस्व आने वाली समय में अन्य राज्यों में भी अपनी धाक जमा सके इसके लिये मुस्लिम बाहुल्य राज्य और हिंदी पत्ती के राज्यों की ओर भी अखिलेश अब मुंह करना चाह रहे हैं।कन्नौज की बात करें तो अखिलेश ऐतिहासिक जीत के कारण और लोगों में भरोसा कायम रखने के कारण कन्नौज सीट नहीं छोड़ना चाहते हैं। इसी लिये उन्होंने करहल सीट छोड़ने का निर्णय लिया है।
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