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Kannauj News : हे राम! कन्नौज में गोवंशों की ऐसी दुर्दशा, आखिर जिम्मेदार कौन ?

रिपोर्ट : संदीप शर्मा

प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाने वाला करोड़ों रुपये का बजट आखिर कहां है, जिम्मेदार कहां हैं, समाजसेवी कहां हैं, गोभक्त कहां हैं, जिले के प्रशासनिक अधिकारी कहां हैं, आखिर जवाब तो देना पड़ेगा। बात गौशालाओं को लेकर की जायेगी तो उस बजट के बारे में भी पूंछा जायेगा जो सरकार प्रत्येक जिले के लिये भेजती है। इसके बाद भी अगर गोशालाओं का दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर सामने आता है, तो जवाबदेही और जिम्मेदारों पर कठोर कार्यवाही होना भी लाजमी है।

मामला कन्नौज जिला मुख्यालय से जुड़ा मेंहदी घाट/महादेवी घाट के निकट स्थित गोशालाओं का है। यहां का नजारा हिलाकर रख देने वाला था। जिंदा गोवंशों को कुत्ते खा रहे थे, कहीं गोवंश की हड्डियां और कंकाल नजर आ रहे थे, तो कहीं गंगा नदी के जल में गोवंश जिंदा पड़े थे। सपा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख नबाब सिंह यादव अपने समर्थकों के साथ गंगा घाट पहुंचे थे, यहां उनको गांव के कुछ लोगों ने गोशाला का हाल बताया तो वह मौके पर पहुंच गये। माजरा देखने और नजारा समझने के बाद सपा नेता और उनके साथ मौजूद समर्थक द्रवित होने के साथ ही आक्रोशित नजर आ रहे थे। गोशाला में पहुंचे तो पता चला कि यहां कुछ जगह शराब के पाउच पड़े हुये नजर आये, एक जिम्मेदार ग्रामीण नशे में मिला। कुछ और आगे बढ़े तो गोवंशों के कंकाल और मृतक गोवंश के शव मिट्टी में दबे और बोरियों से ढके हुये नजर आये। कुछ और जानने और देखने का प्रयास किया गया तो गंगा जी के पानी में पड़े गोवंश नजर आये, फिर नजर पड़ी, आवारा कुत्तों पर तो पता चला कि दौड़ भाग रहे कुत्ते लाचार हालत में पहुंच चुकी गायों और गोवंश को जिंदा हालत में ही अपना निवाला बना रहे थे।  भूख प्यास से तड़प रहे गोवंश की दुर्दशा से मानों कलेजा भर आया हो।

गांव के ग्रामीणों से लेकर बच्चों और कूच साधु संतों से बात की गई तो पता चला कि, यहां बड़ी संख्या में गोवंश मौजूद थे, अब ना के बराबर हैं, बच्चे बताते हैं, कि बहुत से गोवंश मर चुके हैं, गायों को खाने का चारा तक नसीब नहीं होता तो वह दम तोड देते हैं।  बीमारी की हालत में देखरेख ना होने से भी कई गायों की मृत्यु हो चुकी है।
एक गाय को तो मरणासन्न हालत में गांव पहुंचे जनप्रतिनिधि ने अपने साथियों के साथ खुद गंगा जी के पानी से बाहर निकाला। आखिर मुंह से यही निकाला, हे राम, गायों और गोवंश की ऐसी दुर्दशा, इससे तो अच्छा होता कि इन गायों और गोवंश को खुला ही चरने के लिये छोड़ दिया जाता।  गायों और गोवंशो की सुरक्षा का दावा करने वाले जिम्मेदार कहां हैं, सरकार के ढेरों दावों का क्या हुआ जो गो संरक्षण के तमाम दावे करने से नहीं चूकती। लाखों करोड़ों का बजट कहां है। सवाल तो कई हैं पर जवाब देगा कौन?

पूर्व ब्लॉक प्रमुख कहते हैं कि ह्रदय विदारक नजारों को देखने के बाद कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो पा रही कि आखिर क्या बोलें। गोशाला के संरक्षक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने की बात कह रहे हैं। जिले के अधिकारियों से लेकर गोसंरक्षण के हिमायती और जनप्रतिनिधि उपरोक्त मामले पर जवाबदेह हैं, और जवाब देना भी होगा, कि ना जाने कितनी गाय और गोवंश की हत्या और मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा। वहीं प्रदेश सरकार को भी मामले में जांच और सख्त कार्यवाही अमल में लानी ही होगी।
सपा नेता बताते हैं कि उपरोक्त ह्रदय बिदारक मामले में चुप नहीं बैठा जायेगा,अधिकारियों से जबाब तो मांगा जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग भी। आखिर में बोले, इससे अच्छा तो सरकार और जिम्मेदार अगर रक्षा ना कर सकें, तो अकाल मौत से बेहतर है कि गायों और गोवंश को बिचरने के लिये ही आजाद कर दें। कम से कम दिल और दिमाक को हिलाने वाला ऐसा सच जो दिखाई दिया वो किसी के ह्रदय को द्रवित न करे।