केरल के पलक्कड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक का शुभारंभ शनिवार को हुआ। इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, और सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले समेत संघ के सभी कार्यवाह और अन्य अखिल भारतीय पदाधिकारी शामिल हुए। यह बैठक 2 सितंबर तक चलेगी।बैठक के पहले दिन राष्ट्रीय हित के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें बंगाल की हालिया घटनाओं और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही, केरल के वायनाड में हाल ही में आई बाढ़ के कारण हुई आपदा में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए राहत कार्यों की भी जानकारी दी गई।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले और बंगाल के हालात पर हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बांग्लादेश में शेख हसीना के इस्तीफे के बाद उत्पन्न हालात और वहां हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गंभीरता से चर्चा की गई। इसके अलावा, संघ के 100 साल पूरे होने पर सामाजिक परिवर्तन गतिविधियों को जन स्तर पर ले जाने का प्रस्ताव भी रखा गया। विजयदशमी 2025 से विजयदशमी 2026 तक “पांच परिवर्तन” नामक अभियान के तहत संघ से जुड़े सभी संगठन सक्रिय भागीदारी करेंगे।
32 संगठनों समय 300 लोगों ने बैठक में लिया हिस्सा
इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार समेत 32 संघ प्रेरित संगठनों के 300 से अधिक पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी संगठनों के संगठन सचिवों ने अपनी गतिविधियों की जानकारी दी और अपने अनुभवों का आदान-प्रदान किया।


गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है