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Cyber crime: फेमिना मिस इंडिया का फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’, ठगों ने ऐसे लूटे 99 हजार रुपये

Cyber crime: साइबर अपराधियों के नये-नये तरीके अब समाज के प्रतिष्ठित और जागरूक लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। हाल ही में फेमिना मिस इंडिया वेस्ट बंगाल 2017, शिवांकिता दीक्षित को साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 99 हजार रुपये ठग लिए। इस घटना ने साइबर सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट?

डिजिटल अरेस्ट एक नई साइबर ठगी की तकनीक है, जिसमें ठग किसी व्यक्ति को फर्जी कानून या अपराध के तहत फंसाने का डर दिखाते हैं। उन्हें फोन कॉल, वीडियो कॉल, और व्हाट्सएप चैट के जरिए धमकाया जाता है। ठग व्यक्ति को बार-बार यह विश्वास दिलाते हैं कि वह एक गंभीर कानूनी समस्या में फंस चुका है और बचने के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। यह सब डिजिटल माध्यम से होता है, जिससे व्यक्ति को पूरी तरह से मानसिक दबाव में ला दिया जाता है।

यह है पूरी घटना

पहला कॉल और धमकी

मंगलवार शाम करीब चार बजे शिवांकिता दीक्षित को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े सिम का उपयोग कर दिल्ली में एचडीएफसी बैंक में एक खाता खोला गया है। इस खाते में मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और 24 से अधिक बच्चों के अपहरण से जुड़ी फिरौती की रकम स्थानांतरित की गई है।

सहयोग न करने पर कार्रवाई की धमकी

ठगों ने कहा कि अगर शिवांकिता इस मामले में सहयोग नहीं करतीं तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। ठगों ने उन्हें फोन काटने से मना किया और व्हाट्सएप पर बातचीत शुरू कर दी। इसके बाद वीडियो कॉल में फर्जी पुलिस अधिकारी और अन्य लोग नजर आए, जिससे शिवांकिता पर दबाव और बढ़ गया।

99 हजार रुपये की ठगी

ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि मामले को रफा-दफा करने के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। डर और दबाव में आकर शिवांकिता ने 99 हजार रुपये एक ऑनलाइन खाते में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने इसके बाद और पैसे की मांग की, जिसके बाद शिवांकिता ने अपने पिता संजय दीक्षित को इस बारे में जानकारी दी।

साइबर सेल में शिकायत

घटना के बाद शिवांकिता और उनके पिता ने तुरंत साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिवांकिता अब भी इस घटना के बाद दहशत में हैं।

क्या सीखा जा सकता है?

  • कानूनी जानकारी का अभाव:
    साइबर अपराधी अक्सर फर्जी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करते हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
  • डिजिटल सुरक्षा:
    कभी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और किसी अनजान व्यक्ति को अपने खाते की जानकारी न दें।
  • धोखे को पहचानें:
    वीडियो कॉल पर दिखाए गए दृश्य फर्जी हो सकते हैं। हमेशा जानकारी की जांच करें।

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर ठग किसी को भी निशाना बना सकते हैं। डिजिटल युग में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। साइबर सेल को भी इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।