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खाकी की आड़ में घिनौना सच: एक दिल को झकझोर देने वाली कहानी

खाकी की आड़ में घिनौना सच: वर्दी नहीं-ये तो छल का मुखौटा था!

विशेष रिपोर्ट: रॉकेट पोस्ट लाइव | अजय देव वर्मा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ‘खाकी’ जैसे पवित्र शब्द को शर्मसार कर दिया है। नाम रखा राहुल त्यागी, असली पहचान नौशाद त्यागी, और काम—फर्जी वर्दी पहनकर महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाना, उनका शारीरिक शोषण कर छोड़ देना।

इस व्यक्ति की गिरफ्तारी के साथ न सिर्फ 20 से अधिक महिलाओं के साथ धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, बल्कि यह भी सामने आया कि वो 3 साल से इस खेल को बड़ी सफाई से अंजाम दे रहा था।

खाकी की आड़ में घिनौना सच: महिलाओं को निशाना- इमोशनल ब्लैकमेल और फिर दरिंदगी

नौशाद त्यागी की शिकार बनी महिलाएं वो थीं जो अकेली रहती थीं या विधवा थीं। पुलिस पूछताछ में उसने माना कि वह महिलाओं को वर्दी का रौब दिखाकर भरोसा जीतता था, फिर उन्हें प्रेम में फंसा कर शारीरिक संबंध बनाता और अंत में छोड़ देता।

उसकी 18-20 गर्लफ्रेंड थीं, जिनमें से 10 से ज़्यादा महिलाओं ने शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है।

खाकी की आड़ में घिनौना सच: दिल्ली से मेघालय तक फैला था ‘प्यार का जाल’

दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा, संभल, मुजफ्फरनगर और मेघालय जैसे राज्यों में उसने नकली पहचान और फर्जी वर्दी के साथ खुद को ‘कांस्टेबल’ बताकर औरतों को ठगा।

❝क्या सिर्फ यूपी पुलिस ही दोषी है? नहीं, हर उस राज्य की जिम्मेदारी बनती है जहां उसकी मौजूदगी रही।❞

खाकी की आड़ में घिनौना सच: पुलिस की भूमिका और जिम्मेदारी

इस पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने जांच सीओ सिटी राजू कुमार साव को सौंपी, जिन्होंने नौशाद को गिरफ्तार कर बीएनएस की धारा 316, 318, 319 के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा।

लेकिन क्या यहीं पुलिस की भूमिका खत्म हो जाती है?

 नहीं, असल जिम्मेदारी अब है—

  • हर पीड़िता को न्याय दिलाना

  • अन्य राज्यों से सहयोग लेकर ठगी का नेटवर्क उजागर करना

  • पीड़ित महिलाओं की पहचान छुपाकर उन्हें संरक्षण देना

  • समाज में इस ट्रेंड को खत्म करना

कानून की कमजोरी या समाज की चूक?

फर्जी पुलिसकर्मी बनकर अपराध करना देश में कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी दिल्ली, मुंबई और राजस्थान में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं—

  • 2023, दिल्ली: एक युवक ने CISF की वर्दी पहनकर महिला से शादी की, फिर उसे छोड़कर फरार हो गया।

  • 2021, राजस्थान: फर्जी वर्दी में घूमता एक युवक महिलाओं से “लव मैरिज” के नाम पर पैसे ऐंठता था।

इन घटनाओं से साफ है कि वर्दी का नाम सुनते ही समाज आंख मूंद लेता है। यही भरोसा, विश्वास और सम्मान ऐसे अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।

 समाज को चाहिए चेतना, आंखें खोलने की जरूरत

 अब समय है कि माता-पिता, समाज और खासकर महिलाएं वर्दी को देखकर अंधा भरोसा करने के बजाय पहचान और प्रमाण की पुष्टि करना सीखें।

महिला सशक्तिकरण का मतलब केवल शिक्षा या नौकरी नहीं, बल्कि खुद की सुरक्षा को लेकर सजग रहना भी है।

अपराधी को क्या हो सजा?

सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों में स्पीडी ट्रायल हो और आरोपी को कठोरतम सजा दी जाए ताकि कोई भी दोबारा इस तरह की जुर्रत न कर सके।

  • एक विशेष महिला न्यायालय में केस चले

  • सभी पीड़िताओं को कानूनी और मानसिक सहायता दी जाए

  • फर्जी वर्दीधारी पर आजीवन कारावास का प्रावधान हो

सवाल प्रशासन से…

“अगर वर्दी की पहचान इतने आसानी से खरीदी जा सकती है, तो असली पुलिसकर्मी और फर्जी में फर्क कैसे करेंगे आम नागरिक?”

“क्या महिला सुरक्षा सिर्फ भाषणों की शोभा बन कर रह गई है?”

 अपराध नहीं, ये विश्वास का बलात्कार है

यह कोई आम क्राइम नहीं, बल्कि विश्वास का बलात्कार है। एक इंसान ने वर्दी जैसी जिम्मेदार और सम्मानित पोशाक का इस्तेमाल कर समाज की सबसे कमजोर कड़ी—महिलाओं को—छलने का जरिया बना लिया।

अब सवाल सिर्फ कानून पर नहीं, समाज, प्रशासन और हर उस आंख पर उठता है जो वर्दी देखकर सम्मान में झुक जाती है, सवाल पूछना भूल जाती है।

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