प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें मिलीं तो राजनीति से लेंगे संन्यास
बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
जन सुराज के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार के रूप में मशहूर प्रशांत किशोर ने ऐसे-ऐसे बयान दिए हैं जो मौजूदा सियासत की नींव हिला सकते हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर न सिर्फ बड़ी भविष्यवाणी की है, बल्कि राजनीति छोड़ने की घोषणा भी कर दी है — वो भी शर्त के साथ!
आइए जानते हैं, प्रशांत किशोर की 3 बड़ी राजनीतिक भविष्यवाणियां, जिन पर पूरे बिहार की नजरें टिक गई हैं—
पहली भविष्यवाणी: “जेडीयू को 25 सीटें भी नहीं मिलेंगी”
प्रशांत किशोर का दावा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) इस बार 25 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी।
यह बात उन्होंने खुलकर मीडिया इंटरव्यू में कही और यहां तक कह दिया —
“अगर जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें मिल जाती हैं, तो मैं राजनीति हमेशा के लिए छोड़ दूंगा।”
उन्होंने कहा कि ठीक ऐसा ही उन्होंने बंगाल चुनाव के समय कहा था और अब फिर से वही दोहरा रहे हैं।
“लिखकर रख लीजिए, मैं राजनीति छोड़ दूंगा” — प्रशांत किशोर के इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
दूसरी भविष्यवाणी: “नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे”
प्रशांत किशोर ने दूसरी बम फोड़ते हुए कहा —
“बिहार में नवंबर के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे।“
उन्होंने जनता की नब्ज पकड़ते हुए कहा कि अब बिहार बदलाव के मूड में है। लोग वही पुराने चेहरे और नीतियों से परेशान हो चुके हैं।
वे कहते हैं कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता तेजी से गिर रही है और बिहार को अब नया नेतृत्व चाहिए।
तीसरी भविष्यवाणी: “NDA की सरकार नहीं बनेगी”
तीसरी सबसे बड़ी बात जो प्रशांत किशोर ने कही, वो ये है कि —
“आगामी विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में NDA की सरकार नहीं बनने जा रही है।“
उन्होंने कहा कि भले ही लोकसभा चुनाव में NDA को 30+ सीटें मिल गई हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जनता फिर से उन्हीं को चुनेगी।
प्रशांत किशोर के अनुसार, बिहार में लालू यादव अब भी एक बड़ा फैक्टर हैं, और लोग बीजेपी-जेडीयू को सिर्फ इसलिए वोट देते हैं ताकि राजद सत्ता में न आए। मगर अब माहौल बदल चुका है।
बोलती है जनता, बदल रहा है बिहार!
प्रशांत किशोर का यह दावा जितना साहसिक है, उतना ही राजनीतिक रूप से जोखिम भरा भी। वे कहते हैं कि अब बिहार की जनता बदलाव के लिए तैयार है।
राजनीति में नए चेहरे और नई सोच की मांग हो रही है। जनता सिर्फ वादे नहीं, विकास और नेतृत्व में ईमानदारी चाहती है।
प्रशांत किशोर ने जो शर्त रखी है — “अगर नीतीश की पार्टी को 25 से ज्यादा सीटें मिलीं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा” — यह न केवल उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है बल्कि बिहार की बदलती सियासत का संकेत भी है।
अब देखना ये होगा कि जनता किसके साथ जाती है — पुराने चेहरों के भरोसे या बदलाव के संदेश के साथ?