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अब आया शिकंजे में ‘लाशों का सौदागर’ डॉक्टर!, शिकायती पत्र के साथ एक्शन में CMO

पीलीभीत: जब सड़ांध मुनाफे से मिलने लगी, तब डॉक्टर बन बैठा ‘लाशों का सौदागर’!

अब आया शिकंजे में ‘लाशों का सौदागर’ डॉक्टर!, जब सड़ांध मुनाफे से मिलने लगे, तो इंसान नहीं सौदागर बनते हैं!

पीलीभीत में स्वास्थ्य तंत्र की जर्जर परतों को जब उधेड़ा गया, तो सामने आया — एक ऐसा क्रूर सच, जिससे इंसानियत भी सिहर उठी। डॉक्टर चरित बोरा, जो मरीजों की सेवा के लिए शपथ लेकर डॉक्टर बना था, वह अब ‘लाशों का सौदागर’ बन गया है। और अब… आखिरकार, उसके खिलाफ शिकायती प्रार्थना पत्र भी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के समक्ष पहुँच चुका है। जांच शुरू हो चुकी है, और मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर है।

लाशों पर चल रहा था इलाज का नाटक, ठगी गई ज़िंदगी की अस्थियाँ

ये कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरी मानवता के साथ क्रूर मज़ाक था। मृतकों को जीवनरक्षक मशीनों पर इस दिखावे के साथ रखा गया कि वे जीवित हैं — ताकि परिजनों से लाखों रुपये वसूले जा सकें। आईसीयू में मृत देहों को सांसों का झूठा भ्रम देकर घंटों-घंटों तक मशीनों में बांधा गया, सिर्फ इसलिए कि अस्पताल को मोटी रकम मिल सके।

अब आया शिकंजे में ‘लाशों का सौदागर’ डॉक्टर!, कितनी बार मरता है एक मरा हुआ इंसान?

मौत एक बार होती है — लेकिन यहां तो इंसान की मौत के बाद उसकी देह से भी बार-बार पैसा उगाहा गया। परिजन जो अपनों की जान बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल आए थे, उन्हें सिर्फ एक ‘बिल’ थमाया गया, जिसमें मौत के बाद भी ‘इलाज’ की फीस जोड़ी गई थी। वो कैसे भूलेंगे ये ‘तांडव’?

शिकायती पत्र में दर्ज आरोप — रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य

जो शिकायती पत्र जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपा गया है, उसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि डॉक्टर द्वारा न केवल मृत देहों पर इलाज का नाटक किया गया, बल्कि परिजनों को गुमराह कर आर्थिक शोषण भी किया गया। एक परिवार ने 3 लाख रुपये तक खर्च कर दिए, ये सोचकर कि उनका मरीज जीवित है, जबकि हकीकत ये थी कि वो काफी समय पहले दम तोड़ चुका था।

अब आया शिकंजे में ‘लाशों का सौदागर’ डॉक्टर!, पुराने रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में — क्या ये डॉक्टर वर्षों से खेल रहा था खेल?

अब पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। आशंका है कि ये सिलसिला नया नहीं, बल्कि एक ‘पैटर्न’ का हिस्सा है — जहां बार-बार एक ही तरकीब से लोगों को फंसाया गया। सवाल उठता है: क्या अन्य अस्पताल भी इस ‘मॉड्यूल’ को अपना रहे हैं? और क्या यह एक संगठित चिकित्सा माफिया का संकेत है?

अब क्या होगा? कानून के शिकंजे में ‘मुनाफाखोर हत्यारा’

डॉक्टर चरित बोरा पर जो आरोप लगे हैं, वो केवल मेडिकल नैतिकता के उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे-सीधे धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और अमानवीय कृत्य की श्रेणी में आते हैं। अगर जांच में दोष सिद्ध हुआ, तो उसकी मेडिकल डिग्री ही नहीं, ज़िंदगी भर का आज़ाद जीवन भी छिन सकता है। परिजनों की भावनाएं, जनदबाव और सोशल मीडिया का प्रहार — अब प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा चुके हैं।

जनता के सवाल, जिन्हें टाल नहीं सकते अब अधिकारी

क्या इस डॉक्टर ने अकेले इतने बड़े खेल को अंजाम दिया?

क्या यह किसी बड़े रैकेट का हिस्सा है?

प्रशासन ने अब तक इतनी गंभीर शिकायतों पर चुप्पी क्यों साधी?

अगर मौत के बाद इलाज का बिल बनाया गया तो उसे जांच में क्यों नहीं पकड़ा गया?

इन सवालों के जवाब अब ज़रूरी हो गए हैं। और जनता इस बार चुप नहीं बैठेगी।

अब बोलिए — क्योंकि कल यह आपके घर में भी हो सकता है!

आज अगर आवाज़ नहीं उठी, तो ये खेल चलता रहेगा। कल कोई और परिवार, किसी और अस्पताल में, अपने मृत प्रियजन की ‘सांसों’ के नाम पर लुट जाएगा। यह केवल एक डॉक्टर की कहानी नहीं है, बल्कि उस सड़ चुके सिस्टम की परतें हैं, जिसे अब पूरी तरह से बेनकाब करना ज़रूरी हो गया है।

लाशों का सौदागर डॉक्टर: सीएमओ का बयान, रॉकेट पोस्ट रिपोर्टिंग के तथ्य जाँच में बहुत उपयोगी