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पुलिस बर्बरता की शर्मनाक तस्वीर, खाद लें गए किसान को दौड़ा दौड़ा कर पीटा, महिला पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रही

पुलिस बर्बरता की शर्मनाक तस्वीर:लखीमपुर खीरी में किसान पर लाठीचार्ज, पुलिस की बेरहमी और सिस्टम की विफलता का हृदय विदारक मंजर

खाद नहीं, लाठियाँ मिलीं: सिस्टम के कड़वे सच

वीडियो हुआ वायरल, सिस्टम बदनाम

पुलिस बर्बरता की शर्मनाक तस्वीर: सरकार की नाक के नीचे किसान की सरेआम पिटाई, खाकी की बर्बरता उजागर

लखीमपुर खीरी के फरधान थाना क्षेत्र में स्थित शंकरपुर सहकारी समिति पर उस वक्त कोहराम मच गया जब खाद की उम्मीद लेकर पहुँचे किसानों को खाकी वर्दी वालों ने लात-डंडों से नवाज़ा। दरअसल, खाद वितरण में मनमानी और भ्रष्टाचार से नाराज किसानों ने समिति गेट पर सड़क जाम कर दिया था। जब पुलिस पहुंची, तो किसानों से संवाद करने की बजाय हुक्म और हिंसा की भाषा में बात की गई। एक युवक पर लाठियाँ ऐसे बरसाईं गईं जैसे वो कोई आतंकी हो। सबसे शर्मनाक दृश्य तब सामने आया जब पीटे जा रहे युवक को बचाने की कोशिश कर रही महिला को भी बलपूर्वक धकेला गया।

पुलिस बर्बरता की शर्मनाक तस्वीर, समिति सचिव की मनमानी बनी बवाल की जड़

शंकरपुर सहकारी समिति के सचिव प्रदीप पटेल पर किसानों ने बड़ा आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि सचिव ने जान-पहचान वालों को खाद बांटी और फिर मशीन खराब होने का बहाना बनाकर मौके से चंपत हो गया। जबकि बड़ी संख्या में किसान अपनी पर्चियां लिए घंटों से लाइन में लगे थे। किसानों ने बताया कि करीब 20-25 लोगों को ही खाद दिया गया, बाकियों को ‘मशीन खराब’ कहकर चलता कर दिया गया। यह सीधा-सीधा पक्षपात और भ्रष्टाचार का खेल है, जो किसानों की गरिमा और अधिकार पर सीधा प्रहार करता है।

महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की, पुलिसिया घमंड के आगे झुकी इंसानियत

सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स शंकरपुर पहुंची और बिना कोई चेतावनी दिए जबरन महिलाओं को हटाने लगी। बुजुर्ग और युवतियों को धक्का देकर सड़क से खदेड़ा गया। एक महिला अपने बेटे को पुलिस की लाठी से बचाने के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन सिपाही उस पर लाठियां बरसाता रहा। यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की असंवेदनशीलता और खाकी के घमंड का शर्मनाक प्रदर्शन था।

बर्बरता का वीडियो वायरल: जनता का आक्रोश फूटा

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैला। हर दृश्य में लाठी का कहर, जनता की बेबसी और पुलिस का ‘हुकुमशाही रुख’ झलकता रहा। लोगों ने ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #KisanPeJhulm, #LakhimpurLathicharge जैसे हैशटैग के साथ जमकर नाराज़गी जाहिर की। यह वायरल वीडियो सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम के सड़े हुए हिस्से की ताजा तस्वीर है।

जांच सौंपने की रस्म अदायगी, दोषी अब तक बचे

एसपी खीरी ने जैसे-तैसे मामले को ठंडा करने के लिए सीओ सदर को जांच का जिम्मा सौंपा है। लेकिन अब तक न किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज हुई, न ही निलंबन की कोई खबर सामने आई है। सरकार और अफसर सिर्फ जांच के नाम पर खोखले भरोसे का तमाशा कर रहे हैं। जबकि वीडियो, चश्मदीद और पीड़ित सब कुछ सामने है। सवाल ये है – जब साक्ष्य सबूत आपके सामने हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?

जब सिस्टम किसान को अपराधी मानने लगे, तो लोकतंत्र का शव तैयार मानिए

यह घटना केवल खाद वितरण की समस्या नहीं, बल्कि ‘गांव बनाम सत्ता’ की जंग है। जहां सत्ता के हाथ में लाठी है और किसान के हाथ में उम्मीद। जब कोई सरकार अपने अन्नदाता की पीठ पर डंडा बरसाना शुरू कर दे, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही की दस्तक है। खाद के लिए लाइन में खड़ा किसान जब पीट दिया जाता है, तो वो सिर्फ खून नहीं बहाता, बल्कि पूरी व्यवस्था का लहू बहाता है।

 जनता की मांग, सस्पेंशन नहीं, गिरफ्तारी और मुकदमा चाहिए

इस घिनौनी घटना के बाद जनता सड़कों पर है, सोशल मीडिया पर है, खबरों में है – और कह रही है कि अब सिर्फ “जांच” नहीं, पुलिसवालों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। किसानों की मांग है कि समिति सचिव पर भ्रष्टाचार का मुकदमा और पुलिसकर्मियों पर बल प्रयोग, महिला से बदसलूकी और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज हो।

पुलिस बर्बरता की शर्मनाक तस्वीर: अब भी चुप रहा सिस्टम, तो ये आग पूरे प्रदेश को जला देगी

अगर लखीमपुर की इस घटना पर सरकार ने जल्द और सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह आक्रोश यहीं नहीं रुकेगा। यह एक जिले की नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश की चेतावनी है – किसान अब चुप नहीं बैठेगा। उसे खाद चाहिए, इज्जत चाहिए, न्याय चाहिए – न कि पुलिस की लाठी और प्रशासन की बेशर्मी।

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