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दो सगे भाई एक साथ मौत के गाल में समा गए, जिसने भी देखा ये मंज़र रो पड़ा

बांदा में दर्दनाक हादसा: मंदिर जाते समय उफनते नाले में डूबकर दो सगे मासूम भाइयों की मौत, पूरे गांव में पसरा मातम”

दो सगे भाई एक साथ मौत के गाल में समा गए, मंदिर जाने निकले दो मासूम, नाले में डूबकर लौटे शव बनकर

बांदा जिले के तिंदवारी थाना क्षेत्र के परसौडा गांव में शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। गांव के दो सगे मासूम भाई, जो हर रोज की तरह मंदिर जाने के लिए घर से निकले थे, आज अपने परिवार को हमेशा के लिए छोड़ गए। बरसात के कारण उफनते नाले में डूबकर इन दोनों नन्हीं जिंदगियों ने दम तोड़ दिया। कुछ ही पलों में खुशियों से भरा परिवार मातम में बदल गया और गांव के हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

दो सगे भाई एक साथ मौत के गाल में समा गए, एक का पैर फिसला, दूसरे ने बचाने की कोशिश में गंवाई जान

गांव के लोगों के अनुसार, मंदिर जाने के लिए दोनों भाई नाले के पास से गुजर रहे थे। नाला बरसात की वजह से ओवरफ्लो था और पानी का तेज बहाव खतरनाक रूप से चल रहा था। इसी दौरान बड़े भाई का पैर अचानक फिसल गया और वह बहते पानी में जा गिरा। छोटा भाई, अपने बड़े भाई को बचाने के लिए बिना सोचे-समझे पानी में उतर गया, लेकिन तेज बहाव और गहरे पानी के कारण दोनों ही नाले की धारा में समा गए। बच्चों की चीखें सुनते ही गांव के लोग दौड़े, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। देखते ही देखते दोनों मासूम पानी में लापता हो गए और गांव की गलियां मातम से भर गईं।

दो सगे भाई एक साथ मौत के गाल में समा गए, डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद मिले दोनों के शव

घटना के बाद ग्रामीणों ने तत्काल शोर मचाया और गोताखोरों को बुलाकर तलाश शुरू कराई। करीब डेढ़ घंटे की अथक मशक्कत के बाद दोनों मासूमों के शव नाले से बाहर निकाले गए। उस वक्त जो दृश्य सामने आया, वह किसी का भी दिल पिघला देने वाला था। दोनों बच्चों के शवों को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां बेहोश होकर गिर पड़ी, पिता बार-बार बेबस होकर यही कहता रहा – “काश कोई मेरे बच्चों को बचा लेता।” वहां मौजूद हर शख्स की आंखें आंसुओं से भर आईं, और पूरा गांव गहरे शोक में डूब गया।

समाजसेवी बोले – जिला प्रशासन की लापरवाही ने छीनी दो जिंदगियां

घटनास्थल पर पहुंचे समाजसेवी देवेश मोनू ने जिला प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि इस नाले पर किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है और न ही प्रशासन की ओर से कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेड लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर बचाव दल और उपकरण मौके पर पहुंच जाते, तो शायद इन मासूमों की जान बच सकती थी। देवेश मोनू ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि अगर अब भी इस नाले की सुरक्षा नहीं की गई, तो यह मौत का जाल बनकर और कई जिंदगियां लील सकता है।

गांव में पसरा मातम, हर आंख नम

दो सगे मासूम भाइयों की असमय मौत ने पूरे परसौडा गांव को सदमे में डाल दिया है। गांव के हर घर से सिर्फ सिसकियों की आवाज आ रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार अपने बच्चों के नाम पुकार रही है, जबकि पिता का गला रोते-रोते बैठ गया है। जिसने भी इन दोनों बच्चों के शवों को देखा, उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव के बुजुर्ग कह रहे हैं कि इतने दर्दनाक हादसे ने गांव में दशकों बाद इतना गहरा मातम बिखेरा है।

पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम को भेजा शव

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। दोनों मासूमों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और ग्रामीणों से घटना के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि नाले के आसपास जल्द ही सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाएंगे, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

दो सगे भाई एक साथ मौत के गाल में समा गए, घटना से उठा सवाल – आखिर कब तक ऐसे हादसों में मासूम जानें जाएंगी?

गांव के लोग और समाजसेवी अब एकजुट होकर जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नाले पर मजबूत पुलिया और सुरक्षा बैरिकेड लगाए जाएं, ताकि कोई और परिवार अपने बच्चों को यूं न खो दे। हर कोई यही सवाल पूछ रहा है – आखिर कब तक लापरवाही और खतरनाक हालात के चलते मासूम जिंदगियां यूं ही खत्म होती रहेंगी?

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