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महोबा डूबा बारिश के समंदर में: चार दशक बाद आफत, 500 एमएम पानी, गांव जलमग्न, दो की दर्दनाक मौत

महोबा में चार दशक बाद आफत की बारिश, 500 एमएम बारिश से तबाही, दो की मौत, गांवों में संकट

महोबा डूबा बारिश के समंदर में: चार दशक की सबसे भीषण बारिश ने मचाई तबाही

बुंदेलखंड का महोबा जिला बीते चार दशकों की सबसे खतरनाक बारिश की मार झेल रहा है। तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। 24 घंटे में 500 एमएम तक बारिश दर्ज होने से जिले के सभी बड़े तालाब और जलाशय उफान पर आ गए हैं। बेलासागर, कुलपहाड़ बड़ा तालाब, मदनसागर और दिसरापुर जैसे प्रमुख जलस्रोत ओवरफ्लो होकर गांवों और कस्बों में पानी भर रहे हैं, जिससे 65 से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है और हालात बाढ़ जैसे बन गए हैं।

महोबा डूबा बारिश के समंदर में: बारिश से दो लोगों की मौत, सैकड़ों कच्चे घर तबाह

लगातार बारिश और तेज हवाओं से कई कच्चे मकान ढह गए, जिसमें एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई। सैकड़ों ग्रामीणों के घरों को नुकसान हुआ है और कई परिवारों का अनाज व घरेलू सामान बह गया। पीड़ित ग्रामीणों की मानें तो न तो वे सामान बचा पाए और न ही बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जा सके, जिससे लोग मानसिक और आर्थिक संकट में हैं।

महोबा डूबा बारिश के समंदर में: ग्रामीणों का दर्द – “घर तबाह, मदद अब तक नदारद”

बारिश से तबाह हुए गांवों के लोग बेहद कठिन हालात में हैं। जैतपुर के रहने वाले रामसेवक ने बताया –
“तालाब का पानी गांव में घुस चुका है। हमारे घर के कमरे टूट गए, अनाज और जरूरी सामान सब भीग गया। कोई मदद अब तक नहीं मिली, बच्चे और बूढ़े खुले में हैं।”

वहीं गांव की ही महिला सुबरन रोते हुए कहती हैं –
“हमारा कच्चा मकान गिर गया। बारिश और हवा में कुछ भी नहीं बचा। रातभर बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे बैठे हैं।”

प्रशासन अलर्ट, जिलाधिकारी ने संभाली कमान

स्थिति बिगड़ते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने राहत कार्य का जिम्मा खुद संभालते हुए कहा –
“हमारी टीमें लगातार मौके पर हैं। बेलासागर, कीरत सागर और अन्य जलस्रोतों की निगरानी की जा रही है। जिन परिवारों के घर ढहे हैं, उन्हें अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था की जा रही है।”

कुलपहाड़, जैतपुर, चरखारी और महोबा नगर क्षेत्र में राहत टीमें तैनात की गई हैं। उर्मिल, अर्जुन और शिवहार बांध पर भी अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।

महोबा डूबा बारिश के समंदर में: पीएम आवास न मिलने से बेबस बुजुर्ग महिला का दर्द

बुजुर्ग महिला प्यारी बाई ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा –
“डेढ़ साल पहले पीएम आवास के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली। कच्चे घर की छत टूटी हुई है, पॉलिथीन डालकर बच्चों संग इसी में रह रहे हैं। बारिश में जीना नामुमकिन हो गया है।”

हालात पर नियंत्रण के दावे, लेकिन संकट जस का तस

हालांकि प्रशासन का दावा है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन बारिश और तालाबों के उफान से प्रभावित ग्रामीण अब भी परेशान हैं। दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा हुआ है, खेत जलमग्न हैं और कई इलाकों में लोगों को नाव के सहारे निकलना पड़ रहा है।

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