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पीलीभीत में बाघ के हमले से दहशत! प्रशासन ने दुधवा के हाथी, ड्रोन और ट्रैंकुलाइज़र टीम उतारी, गांवों में हाई अलर्ट

पीलीभीत में बाघ का हमला: प्रशासन हरकत में, दुधवा के हाथी और हाई-टेक ड्रोन से सर्च ऑपरेशन शुरू

पीलीभीत में बाघ के हमले से दहशत! बाघ पकड़ने के लिए मौके पर पहुंचेंगे हाथी और ट्रैंकुलाइजर टीम

पीलीभीत के थाना न्यूरिया क्षेत्र में लगातार हो रहे बाघ हमलों के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है। जिला प्रशासन ने दुधवा नेशनल पार्क से दो प्रशिक्षित हाथी और एक विशेष टाइगर रेस्क्यू टीम कोबुलाया है। इन हाथियों की मदद से घने जंगल और खेतों में बाघ की लोकेशन खोजी जाएगी। इसके अलावा, मध्य प्रदेश से मंगाए गए हाई-टेक ड्रोन की मदद से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
दुधवा से आई ट्रैंकुलाइजर टीम में वरिष्ठ एक्सपर्ट भी शामिल हैं, जो बाघ को बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कार्रवाई करेंगे।

पीलीभीत में बाघ के हमले से दहशत! सुबह-सुबह सैजना और मडरिया गांव में दहशत

प्रशासन के सक्रिय होने की वजह आज सुबह की दर्दनाक घटनाएं रहीं। करीब 7 बजे सैजना और मडरिया गांव में बाघ ने अलग-अलग हमले किए, जिसमें 40 वर्षीय मीना देवी की मौत हो गई, जबकि 21 वर्षीय रामविलास और दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल फैल गया।

पीलीभीत में बाघ के हमले से दहशत! सैजना गांव में घास काटती महिला पर हमला।

सैजना गांव की मीना देवी पत्नी कालीचरण सुबह घास काटने खेत गई थीं। अचानक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर बाघ को किसी तरह भगाया, लेकिन तब तक मीना देवी गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। उन्हें लेकर अस्पताल जाने की कोशिशें हुईं, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। वन विभाग को सूचना देने के बावजूद उनकी टीम मौके पर घंटों तक नहीं पहुंची।

पीलीभीत में बाघ के हमले से दहशत! मडरिया गांव में युवक और महिला बने शिकार

दूसरी घटना मडरिया गांव की है। यहां 21 वर्षीय रामविलास खेत में काम कर रहे थे, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया। गांव के हरवांश कुमार और ठुकदास ने डंडों से बाघ से मुकाबला कर किसी तरह रामविलास की जान बचाई। तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया।
हमले के कुछ ही समय बाद, 35 वर्षीय कृष्णा देवी पर भी बाघ ने हमला किया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बाघ शव को खींचकर जंगल की ओर ले जाने लगा, लेकिन ग्रामीणों के पहुंचने पर वह भाग गया। अभी तक शव को ग्रामीण उठाने नहीं दे रहे हैं और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर आने की मांग कर रहे हैं।

वन विभाग की लापरवाही और अधिकारियों का विवादित बयान

घटना के बाद जब “रॉकेट पोस्ट” के पत्रकार अजय देव वर्मा ने डीएफओ मनीष कुमार से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा, “दो लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है, और एक महिला जो कथित रूप से बाघ का शिकार हुई है, गायब है, उसकी तलाश हो रही है।”
जबकि मडरिया के ग्रामीण हरिलाल ने साफ कहा कि कृष्णा देवी का शव गांव में ही पड़ा है और ग्रामीण उसे उठाने नहीं दे रहे। वन विभाग का यह बयान उनकी नाकामी और घटनास्थल पर सही जानकारी न होने को उजागर करता है।

पिछले दो महीनों में 9 मौतें और कई घायल, खतरा बरकरार

यह कोई पहली घटना नहीं है। पीलीभीत में पिछले दो महीनों में बाघ के हमलों में 9 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई घायल हुए हैं।

14 मई: नजिरगंज – हँसराज की मौत

18 मई: चैतीपुर – राम प्रसाद की मौत

25 मई: खिरकिया बगरडिया – लौंगश्री की मौत

3 जून: शांति नगर – रेशमा देवी (बाद में मौत)

4 जून: शांति नगर – अज्ञात महिला की मौत

9 जून: मेवटपुर – किसान की मौत

26 जून: फुलहर – दो घायल (बाघिन पकड़ी गई)

14 जुलाई: बोरी फुलहर – दयाराम की मौत

इन घटनाओं से साफ है कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक स्थायी खतरा है, जिस पर वन विभाग समय रहते नियंत्रण नहीं कर पा रहा।

ग्रामीणों का आक्रोश: ठोस कदम की मांग

मडरिया और सैजना के ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे, जब तक वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर समाधान का आश्वासन नहीं देते। उनकी मांग है कि—

बाघ की लोकेशन पर लगातार ड्रोन निगरानी हो

गांवों के चारों ओर मजबूत फेंसिंग और पशुशाला बनाई जाए

हर गांव में अलर्ट सिस्टम और सुरक्षा टीम तैनात की जाए

पीलीभीत में मासूमों की जानें रोजाना दांव पर लग रही हैं। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन सिर्फ बयानबाजी छोड़कर ठोस और स्थायी समाधान निकाले। वरना ये खूनी तांडव और निर्दोष मौतें कब तक रुकेंगी?

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