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दबंगई में इंसानियत की मौत: किसान को 5 दिन तक जंजीरों में कैद कर, मल-मूत्र के बीच रोटी खाने को मजबूर किया

दबंगई और लालच में इंसानियत की मौत: किसान को 5 दिन तक जंजीरों में कैद कर, मल-मूत्र के बीच रोटी खाने को मजबूर किया गया

मथुरा के छाता तहसील के गांव खायरा से इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी वारदात सामने आई है, जिसे सुनकर रौंगटे खड़े हो जाएं। सिर्फ जमीन हथियाने की लालच में रसूखदार रिश्तेदारों ने एक किसान को 5 दिनों तक कमरे के अंदर जंजीरों में जकड़कर बंद रखा। इतना ही नहीं, उसे जानवरों की तरह उसी जगह मल-मूत्र करने और उसी गंदगी के बीच खाना खाने को मजबूर किया गया।

दबंगई में इंसानियत की मौत: जंजीरों में जकड़ा इंसान, गंदगी में सांसें और जिंदा रहने की जद्दोजहद

गांव के गरीब किसान रत्तों वाल्मीकि के साथ उसके ही चाचा और परिवारजन ने ऐसा बर्बर व्यवहार किया, जिसकी कल्पना सिर्फ कहानियों या इतिहास की किताबों में ही की जाती है। 5 दिन तक उसे एक बंद कमरे में जंजीरों में जकड़कर रखा गया। कमरे के अंदर शौच के लिए एक बाल्टी फेंक दी गई, जिसमें उसे अपनी हर ज़रूरत पूरी करनी पड़ी।
उसी गंदगी के बीच उसे रूखा-सूखा खाना दिया गया। पीड़ित की मानें तो यह सब सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह अपनी जमीन अपने रसूखदार चाचा नंदो और नटवर के नाम लिखने से इनकार कर रहा था।

दबंगई में इंसानियत की मौत: “जमीन लिख दो, नहीं तो यहीं मर जाओ” – हर दिन सुननी पड़ी धमकी

पीड़ित रत्तों वाल्मीकि ने मीडिया से बात करते हुए कहा,
“मेरे चाचा जबरदस्ती मुझे जंजीर में बांधकर रखे हुए थे। 5-6 दिन से मैं यहीं पड़ा हूं। नंदो और नटवर बार-बार धमकी दे रहे थे कि या तो जमीन उनके नाम लिख दूं या यहीं सड़कर मर जाऊं।”
पीड़ित के मुताबिक, उसके ऊपर करीब 6-7 लाख रुपये का कर्ज है, जिसका फायदा उठाकर उसके चाचा उसकी जमीन हड़पना चाहते थे।
“मुझे जान से मारने की धमकी देकर, उसी गंदगी में खाना डालकर जिंदा रखा जा रहा था।”

दबंगई में इंसानियत की मौत: पुलिस पहुंची तो खुला ‘मानवता के खिलाफ’ गुनाह का ताला

स्थानीय ग्रामीणों से मिली सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रत्तों वाल्मीकि को जंजीरों से मुक्त कराया। पुलिस ने बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में नंदो और नटवर को गिरफ्तार कर लिया।
गांव के लोग इसे दबंगई और  ‘लालच में इंसानियत की मौत’ बता रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि इस तरह की घटना दोबारा किसी के साथ न हो।

समाज के लिए सवाल: जमीन की खातिर कितनी और जिंदगियां तबाह होंगी?

यह मामला सिर्फ एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है कि लालच और दबंगई इंसान को किस हद तक गिरा सकती है। क्या सिर्फ कुछ बीघा जमीन के लिए इंसान को जंजीरों में जकड़ना और गंदगी में तड़पाना ‘शक्ति का प्रदर्शन’ बन गया है?
गांव के लोग भी दहशत में हैं कि अगर गरीब की आवाज़ यूं ही दबाई जाती रही, तो आने वाले समय में कोई भी रसूखदार गरीब को जानवरों से बदतर जिंदगी जीने पर मजबूर कर सकता है।

रत्तों वाल्मीकि, पीड़ित ने बताया 
“5-6 दिन से जंजीरों में बंधा हूं। चाचा और उनके लोग धमकी दे रहे थे कि जमीन लिख दो, नहीं तो यहीं खत्म कर देंगे। मुझे शौच के लिए बाल्टी दी, उसी गंदगी में खाना दिया जाता था। इंसान की जिंदगी को नर्क बना दिया गया था।”

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