Tsunami in Japan: जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार (20 अप्रैल 2026) को तेज़ भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई है। भूकंप के तुरंत बाद तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से तुरंत सुरक्षित और ऊंची जगहों पर जाने की अपील की है।
कहां आया भूकंप और कितना खतरा?
भूकंप के झटके खासतौर पर होक्काइडो और इवाते प्रीफेक्चर समेत उत्तरी जापान के कई हिस्सों में महसूस किए गए।
राष्ट्रीय प्रसारक NHK के अनुसार, इन इलाकों में समुद्र की लहरें करीब 3 मीटर तक ऊंची उठ सकती हैं।
सुनामी को लेकर बड़ी चेतावनी
अधिकारियों ने साफ कहा है कि सुनामी की लहरें तट के पास पहुंचनी शुरू हो चुकी हैं। यह लहरें एक बार नहीं, बल्कि कई बार आ सकती हैं।
एडवाइजरी में लोगों से कहा गया है कि बिना देरी किए तटीय इलाकों से दूर हट जाएं और ऊंचे स्थानों पर शरण लें। सरकार और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं।
लहरों के समय और ऊंचाई को लेकर अनिश्चितता
विशेषज्ञों का कहना है कि लहरें तय समय से पहले या बाद में भी आ सकती हैं और उनकी ऊंचाई अनुमान से ज्यादा हो सकती है।
समुद्र किनारे और नदियों के पास रहने वाले लोगों को खास तौर पर सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
प्रशासन हाई अलर्ट पर
जापान सरकार और राहत एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है और रेस्क्यू टीमों को तैयार रखा गया है।
लोगों को बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि वे अफवाहों से बचें और सिर्फ आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
जापान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
जापान की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाती है। यहां चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स—पैसिफिक प्लेट, फिलीपीन सी प्लेट, यूरेशियन प्लेट और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट—आपस में टकराती रहती हैं।
जब इन प्लेट्स के बीच दबाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है। जापान रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंप और ज्वालामुखी ज़ोन माना जाता है।
दुनिया के करीब 90% भूकंप इसी इलाके में आते हैं, इसलिए जापान में ऐसे झटके आम माने जाते हैं।