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कोरे कागज पर साइन और धनखड़ का इस्तीफा: संसद सत्र से पहले सियासी भूकंप!

बीजेपी सांसदों से कोरे कागज पर साइन, धनखड़ के इस्तीफे के बाद सियासी भूचाल – क्या महज स्वास्थ्य कारण या कुछ और?

कोरे कागज पर साइन और धनखड़ का इस्तीफा: अचानक इस्तीफे की गूंज – मानसून सत्र से ठीक पहले सियासी झटका

देश की राजनीति को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र शुरू होने के पहले ही दिन, 21 जुलाई 2025 की शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का पत्र जारी करते हुए उन्होंने केवल “स्वास्थ्य कारणों” का हवाला दिया और तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा कर दी। लेकिन यह इस्तीफा न सिर्फ संसद के भीतर बल्कि पूरे देश की राजनीति में भूचाल लाने वाला साबित हुआ। विपक्ष से लेकर आम जनमानस तक सवाल उठने लगे कि क्या सच में यह केवल स्वास्थ्य कारणों की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश चल रही थी?

कोरे कागज पर साइन और धनखड़ का इस्तीफा: स्वस्थ दिखने वाले उपराष्ट्रपति का इस्तीफा – संदेह की गहराती परछाइयां

धनखड़ के इस्तीफे के तुरंत बाद विपक्ष ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जब उपराष्ट्रपति हाल के कार्यक्रमों और सभाओं में स्वस्थ नजर आ रहे थे, तब अचानक स्वास्थ्य कारणों के चलते इस्तीफा देने की नौबत क्यों आई? हाल के दिनों में वे लगातार सक्रिय थे, सार्वजनिक मंचों पर भाषण दे रहे थे और संसद की कार्यवाही को भी नियमित रूप से देख रहे थे। ऐसे में स्वास्थ्य को वजह बताने से राजनीतिक अटकलों को और हवा मिल गई। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह इस्तीफा किसी “बड़े दबाव” का नतीजा हो सकता है, जिसका असली कारण अभी जनता से छिपा है।

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कोरे कागज पर हस्ताक्षर और राजनाथ सिंह के ऑफिस की हलचल – सियासी रहस्य गहराया

इस इस्तीफे के बीच सबसे सनसनीखेज पहलू वह खबर है, जिसमें बताया गया कि बीजेपी सांसदों से राजनाथ सिंह के कार्यालय में “कोरे कागज पर हस्ताक्षर” करवाए गए। सूत्रों के अनुसार, यह हस्ताक्षर एक महाभियोग प्रस्ताव या किसी विशेष सियासी कदम की तैयारी से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि बीजेपी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन यह घटनाक्रम विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष का कहना है कि इस्तीफा महज स्वास्थ्य कारण नहीं बल्कि अंदरूनी खींचतान और सत्ता के दबाव का परिणाम है।

कोरे कागज पर साइन और धनखड़ का इस्तीफा: विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया – कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे को “अकल्पनीय” और “संदिग्ध” बताया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाला कदम” करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में सफाई की मांग की। कई विपक्षी नेताओं ने यहां तक कहा कि यह इस्तीफा लोकतंत्र के उस हिस्से को भी कमजोर करता है, जो सत्ता के खिलाफ एक संतुलन बनाए रखता है। विपक्ष अब इसे मानसून सत्र में प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कोरे कागज पर साइन और धनखड़ का इस्तीफा: नए उपराष्ट्रपति की तलाश और NDA की रणनीति

धनखड़ के पद छोड़ने के बाद उपराष्ट्रपति की कुर्सी खाली हो गई है और NDA अब नए उम्मीदवार की तलाश में जुट चुका है। खबरों के मुताबिक, बिहार से जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह, कुछ राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के नाम पर चर्चा तेज हो गई है। संविधान के अनुच्छेद 68 के तहत, उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति को “यथाशीघ्र” भरना अनिवार्य है, इसलिए अगले कुछ हफ्तों में नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

मानसून सत्र और देश की राजनीति पर असर

धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ ही था। उनके इस्तीफे से राज्यसभा की कार्यवाही, विधायी प्रक्रिया और विपक्ष-सरकार के बीच संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है। अब सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा केवल व्यक्तिगत कारणों का परिणाम था, या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति छिपी है, जो आने वाले दिनों में खुलकर सामने आएगी?

 इस्तीफे की गुत्थी और आगे की सियासी राह

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा भारतीय राजनीति के लिए महज एक संवैधानिक घटना नहीं बल्कि एक बड़ा सियासी मोड़ है। कोरे कागज पर हस्ताक्षर, राजनाथ सिंह के कार्यालय की हलचल, विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और एनडीए के भीतर नए उपराष्ट्रपति की खोज – ये सभी संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा। सवाल यह है कि क्या सच में यह “स्वास्थ्य कारणों” का मामला है या सत्ता के गलियारों में कुछ ऐसा पक रहा है, जो देश की राजनीति को नए मोड़ पर ले जाएगा?

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