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धारा 498 ए पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: लोक-इंसाफ, नैतिक पुनर्स्थापन और न्यायिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम

धारा 498ए: सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी को दिया बड़ा आदेश – पूर्व पति और ससुराल वालों से माफी मांगे, अखबारों और सोशल मीडिया पर देनी होगी सार्वजनिक माफी

नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने एक दुर्लभ आदेश जारी करते हुए एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की महिला अधिकारी और उसके माता-पिता को निर्देश दिया है कि वे अपने पूर्व पति और उसके परिवार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। यह मामला धारा 498ए और अन्य मुकदमों के तहत झूठे आरोप लगाकर उत्पीड़न से जुड़ा है।

इस मामले में महिला द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों के कारण पति को 109 दिन और उसके पिता को 103 दिन जेल में रहना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “पूरे परिवार ने शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेली है, जिसका कोई मुआवजा संभव नहीं।”

अखबारों और सोशल मीडिया पर माफी जरूरी

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मासिह की पीठ ने आदेश दिया कि IPS अधिकारी और उसके माता-पिता तीन दिनों के भीतर एक सार्वजनिक माफी प्रकाशित करें

यह माफी एक राष्ट्रीय स्तर के अंग्रेजी और एक हिंदी अखबार में छपनी चाहिए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स – फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित अन्य माध्यमों पर भी साझा की जानी चाहिए

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह माफी कानूनी रूप से किसी भी दोष को स्वीकार करने के रूप में नहीं मानी जाएगी और न ही इसका भविष्य में किसी कानूनी अधिकार या दायित्व पर असर होगा।

पति-पत्नी का विवाद: 2015 में शादी, 2018 में अलगाव

दंपति की शादी 2015 में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है। लेकिन वैवाहिक विवादों और पारिवारिक झगड़ों के चलते 2018 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे और परिवार के सदस्यों पर कई आपराधिक और सिविल मामले दर्ज किए।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला: पति-पत्नी के विवाद पर विस्तृत आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद और झूठे मुकदमों के मामले को निपटाते हुए दोनों पक्षों के लिए विस्तृत आदेश जारी किए। कोर्ट का फैसला कई बिंदुओं में विभाजित है ताकि सभी पक्षों को स्पष्ट रूप से समझाया जा सके। आइए विस्तार से जानते हैं कि अदालत ने क्या-क्या आदेश दिए:

बच्ची की कस्टडी (Custody) मां को मिली

कोर्ट ने साफ किया कि दंपति की नाबालिग बेटी अपनी मां (IPS अधिकारी) के पास ही रहेगी

बच्ची की देखभाल, पढ़ाई-लिखाई और दैनिक पालन-पोषण की जिम्मेदारी मां पर होगी।

पिता को बच्ची की पढ़ाई और पालन-पोषण में सहयोग करने की छूट होगी, लेकिन उसकी देखभाल की प्राथमिक जिम्मेदारी मां की होगी।

 पिता और परिवार को सीमित मुलाकात का अधिकार (Supervised Visitation Rights)

कोर्ट ने पिता और उसके परिवार के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा।

पिता और उनका परिवार बच्ची से मुलाकात कर सकेंगे, लेकिन यह मुलाकात निगरानी में (Supervised) होगी।

इस व्यवस्था का मकसद यह है कि बच्ची के मानसिक और शारीरिक हित सुरक्षित रहें और दोनों परिवारों के बीच अनावश्यक विवाद न हो।

 पत्नी ने गुजारा भत्ता (Alimony) या मेंटेनेंस की मांग छोड़ी

IPS अधिकारी (पत्नी) ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि:

वह अपने पूर्व पति से कोई गुजारा भत्ता या मासिक भरण-पोषण नहीं लेगी।

भविष्य में भी पति या उसके परिवार की संपत्ति पर कोई कानूनी दावा नहीं करेगी।

यह फैसला दोनों पक्षों के बीच समझौते के तहत लिया गया है, ताकि विवाद का अंत हो सके।

सभी आपराधिक और सिविल मुकदमे खत्म

दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई आपराधिक और सिविल मामले दर्ज किए थे।

कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी मुकदमे (FIR, क्रॉस केस, सिविल सूट) तत्काल प्रभाव से खत्म (Quash) कर दिए जाएं।

इससे दोनों पक्षों पर चल रही कानूनी लड़ाई पूरी तरह समाप्त हो गई।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक (Divorce) का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत:

पति-पत्नी के विवाह (2015 में हुआ) को कानूनी रूप से समाप्त (तलाक) कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि यह फैसला दोनों की आपसी सहमति और न्यायिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके।

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