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हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा : भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत , 29 घायल

हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर बना मौत का मंजर: भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की जान गई, 29 घायल — चश्मदीद बोले “तार में करंट दौड़ा और सब बेकाबू हो गए”

हरिद्वार (उत्तराखंड):
श्रावण के पवित्र महीने में श्रद्धा का सैलाब मौत की चीखों में बदल गया। हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में रविवार को अचानक मची भगदड़ ने भक्ति को मातम में बदल दिया। सीढ़ियों पर गिरते-पड़ते 6 लोगों की मौके पर मौत हो गई, 29 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद मंदिर परिसर खून और चीख-पुकार से गूंज उठा।

हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा : कैसे हुआ यह दिल दहला देने वाला हादसा?

चश्मदीदों के मुताबिक, मंदिर की सीढ़ियों के पास अचानक एक लोहे की रेलिंग से चिंगारियां निकलीं और करंट फैलने की आशंका से भीड़ घबरा गई। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए भागने लगे। कई श्रद्धालु फिसलकर नीचे गिर गए और सैकड़ों लोग उनके ऊपर चढ़ते चले गए।

किसी ने बिजली का करंट उतरने की बात कही, तो किसी ने बताया कि प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं किए थे। भीड़ बेकाबू होती रही और मौतें होती रहीं, जबकि पुलिस और सुरक्षा कर्मी मौके पर नदारद दिखे।

हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा : मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी, घायल अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहे

मृतकों में 3 महिलाएं, 2 पुरुष और 1 बच्चा शामिल हैं। घायल 29 लोगों में कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। राजकीय अस्पताल हरिद्वार और ऋषिकेश एम्स में उनका इलाज चल रहा है।

घायलों के परिजन रो-रोकर बेहाल हैं और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि श्रावण के सीजन में लाखों की भीड़ जुटती है, लेकिन भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग और बिजली सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा : भीड़ प्रबंधन पर फिर सवाल, प्रशासन पर गुस्सा

स्थानीय श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी इसी मंदिर में अव्यवस्था की वजह से कई लोग घायल हुए थे, लेकिन प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। बिजली के तार खुले थे, सीढ़ियां फिसलन भरी थीं और श्रद्धालुओं को बिना बैरिकेडिंग के चढ़ाया जा रहा था।

एक चश्मदीद ने कहा,

“तार में करंट उतरा, लोग चिल्लाने लगे, सब धक्का-मुक्की कर नीचे गिरते चले गए। प्रशासन सोया रहा, और हमारे अपने मरते रहे।”

श्रद्धा के नाम पर क्यूं दोहराई जा रही हैं ऐसी त्रासदियां?

यह हादसा फिर वही सवाल खड़ा करता है — जब लाखों की भीड़ की संभावना रहती है तो क्या प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
क्यों बार-बार धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा इंतजाम नदारद रहते हैं?
और कितने मासूमों की जान जाने के बाद सरकार जागेगी?

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