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Pilibhit: रातभर बरसी आफ़त, सुबह दिखा तबाही का मंजर

जब उम्मीदें बह गईं पानी में: पीलीभीत के बिलसंडा में नहर कटने से किसानों की फसलें तबाह

रातभर होती रही बारिश, सुबह दिखा तबाही का मंजर

बिलसंडा के बढ़ेपुरा गांव में जब बुधवार की सुबह किसान अपने खेतों की ओर निकले, तो उन्हें लहलहाते धान के खेतों की जगह जल से भरा मैदान दिखाई दिया। कुछ समझ पाते, इससे पहले ही यह साफ हो गया कि शारदा नहर खंड की निगोही ब्रांच नहर कट चुकी है, और उसका पानी बेकाबू होकर खेतों में समा चुका है।

जिस पानी से सींचते थे, वही अब विनाश का कारण बन गया

पीलीभीत जिले के दियूरिया, पसगवां, सिसेसिया, हेमपुरा और बढ़ेपुरा जैसे गांवों के किसान सालों से इसी नहर के भरोसे अपनी फसलें सींचते आए हैं। लेकिन इस बार बारिश ने नहर को उफनने पर मजबूर कर दिया, और परिणामस्वरूप एक दर्जन से अधिक गांवों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई।

“बर्बादी देख कर रोये: किसान की बेबसी

बढ़ेपुरा के किसान  कहते हैं,

“हमारी सारी मेहनत, बीज, खाद, मजदूरी… सब बह गया। अब हम सरकार की तरफ देख रहे हैं, लेकिन वो भी चुप है।”

एक किसान  की आंखें नम थीं —

“बारिश तो भगवान की है, लेकिन नहर की देखरेख तो सरकार की जिम्मेदारी थी। अगर समय से मरम्मत होती, तो आज हमारा खेत न डूबता।”

सूचना के बाद विभागीय हरकत, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी

जब नुकसान हो चुका, तब मौके पर पहुंचे सिंचाई विभाग के जेई अनिल कुमार, जिन्होंने सिर्फ इतना कहा कि

“नहर को बांधने का कार्य कराया जा रहा है।”

लेकिन किसानों का कहना है कि हर साल यही ढर्रा रहता है। पहले अनदेखी होती है, फिर आपदा के बाद खानापूर्ति।

प्रशासन ने नहीं दिया कोई त्वरित आश्वासन या सहायता

सबसे चिंता की बात ये है कि अब तक प्रशासन की ओर से किसी राहत, मुआवजा या पुनः सर्वेक्षण की घोषणा नहीं की गई है।
गांवों में न कोई अधिकारी कैंप लगाए दिखा, न कोई आपदा टीम पहुंची।

क्या सिर्फ योजनाएं ही हैं समाधान?

प्रदेश में तमाम किसान योजनाएं, बीमा और मुआवजा घोषणाएं की जाती हैं। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि कागज़ों पर बनी योजनाएं खेतों तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती हैं।

यदि नहर की समय रहते मरम्मत, सफाई और प्रबंधन किया गया होता तो ये हालत नहीं होती।

खत्म होती उम्मीदों के बीच उठता है एक सवाल:

क्या सरकार सिर्फ आपदा के बाद “आकलन” ही करेगी या अब “पूर्व तैयारी” भी होगी?

रिपोर्ट

निगोही ब्रांच नहर का एक बड़ा हिस्सा भारी बारिश के कारण कट गया

12 से अधिक गांव प्रभावित, सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसलें जलमग्न

किसानों को हुआ भारी आर्थिक नुकसान, प्रशासन ने नहीं की त्वरित मदद

सिंचाई विभाग ने मौके पर जाकर मरम्मत कार्य शुरू करने की बात कही

स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश और प्रशासन से नाराजगी

जब किसान का खेत डूबता है, तो केवल फसल नहीं मरती — उम्मीदें, सपने और पेट पालने की संभावनाएं भी डूब जाती हैं।
प्रशासन और सरकार को अब “बरसात के बाद के बहाने” बंद कर बरसात से पहले की तैयारी शुरू करनी चाहिए।

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