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Pilibhit: डग्गामार और अवैध वाहनों को लेकर सड़कों पर बवाल, दो थानों की पुलिस ने संभाला मोर्चा

पीलीभीत में डग्गामार ईको वाहनों के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों का आक्रोश: प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

Pilibhit: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में गुरुवार को उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब रोडवेज कर्मचारियों ने अवैध रूप से संचालित डग्गामार ईको वाहनों के खिलाफ स्वयं कार्रवाई करते हुए करीब 20 गाड़ियों को जब्त कर रोडवेज डिपो परिसर में खड़ा कर दिया। यह घटना न सिर्फ सरकारी परिवहन सेवाओं की अनदेखी को उजागर करती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग की लापरवाही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

Pilibhit: कर्मचारियों की कार्रवाई से मचा हड़कंप

नौगवा चौराहे पर विभिन्न रूटों पर अवैध रूप से चल रही करीब 20 ईको कारों को जब कर्मचारियों ने पकड़ा तो इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट दीपक चतुर्वेदी, एआरटीओ और दो थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। अफसरों ने कर्मचारियों को शांत किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

रोडवेज कर्मचारियों का आरोप है कि पलिया (लखीमपुर) से लेकर बरेली तक कई रूटों पर ये अवैध गाड़ियाँ बिना किसी वैध परमिट और फिटनेस के धड़ल्ले से चल रही हैं। इससे रोडवेज की आय में भारी गिरावट आई है और यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

क्षमता से अधिक सवारी: मौत को दावत

कर्मचारियों ने बताया कि इन डग्गामार ईको गाड़ियों में 15 से भी अधिक यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है, जबकि इन वाहनों की क्षमता इससे कहीं कम होती है। यह न सिर्फ यातायात नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान को भी गंभीर खतरे में डालने जैसा है। ओवरलोड वाहन दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह बनते हैं, और ऐसे में किसी भी दिन बड़ी त्रासदी घट सकती है।

Pilibhit: प्रशासन को करनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

जहाँ इस तरह के अवैध संचालन की शिकायतें लगातार की जा रही थीं, वहीं स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है। सिटी मजिस्ट्रेट और एआरटीओ जैसे अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन सवाल ये उठता है कि जब रोज़ इन वाहनों की आवाजाही होती है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

Pilibhit: रोडवेज कर्मचारियों की अनदेखी क्यों?

कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार एआरटीओ और परिवहन विभाग से शिकायतें की थीं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। सरकारी तंत्र की इस बेरुखी ने अब कर्मचारियों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो वे परिवहन सेवाएं ठप कर देंगे और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।

सिर्फ पीलीभीत नहीं, पूरे प्रदेश की सड़कों पर मौत का सफर

ये समस्या सिर्फ पीलीभीत तक सीमित नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में डग्गामार वाहनों का साम्राज्य फैलता जा रहा है। इन ओवरलोड वाहनों के कारण प्रतिदिन हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। प्रशासन की लापरवाही और मौन सहमति इस खतरनाक व्यवस्था को और मजबूत कर रही है।

परिवहन विभाग की आंखों के सामने अपराध!

सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये वाहन एआरटीओ कार्यालय और ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने से गुजरते कैसे रहते हैं? क्या यह सब बिना किसी “संरक्षण” या “सांठगांठ” के संभव है? कई लोगों का मानना है कि अवैध वसूली का एक पूरा नेटवर्क इन वाहनों को बचाए रखने में मदद करता है। ये गाड़ियाँ ना तो परमिट धारक हैं, ना फिटनेस प्रमाणित, फिर भी पूरे आत्मविश्वास से सड़कों पर दौड़ रही हैं।

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अब और अनदेखी नहीं चलेगी

इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब रोडवेज कर्मचारियों का सब्र टूट चुका है। जनता की सुरक्षा, सरकारी राजस्व और कानून व्यवस्था – तीनों पर ही गंभीर संकट मंडरा रहा है। यह जरूरी है कि अब शासन-प्रशासन सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई करे। डग्गामार वाहनों पर तत्काल रोक लगे, दोषियों पर कानूनी कार्यवाही हो और ईमानदार परिवहन व्यवस्था को पुनः स्थापित किया जाए।

यह सिर्फ कर्मचारियों का विरोध नहीं है, बल्कि एक जन चेतावनी है – अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो अगला हादसा सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता का प्रतीक बन जाएगा।