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Pilibhit: एसपी की सख्ती- गजरौला एसओ सस्पेंड, अब बांधकर पीटने वालों की खैर नहीं

पीलीभीत में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को चोर समझ कर खंभे से बांधकर पीटा, थानाध्यक्ष निलंबित

बिठौरा कला गांव, गजरौला थाना क्षेत्र, जिला पीलीभीत (उत्तर प्रदेश)

Pilibhit:  पीलीभीत के गजरौला थानाक्षेत्र के बिठौरा कला गांव में उस समय इंसानियत कराह उठी, जब एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को ग्रामीणों ने चोर समझकर खंभे से बांध बेरहमी से पीट डाला। युवक लगातार अपनी बेगुनाही की दुहाई देता रहा, मगर भीड़ के हाथ न कानून रुका और न करुणा। इस दर्दनाक घटना पर जब पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आई, तब एसपी अभिषेक कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गजरौला थाने के प्रभारी निरीक्षक जगदीप मालिक को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह न केवल एक प्रशासनिक निर्णय था, बल्कि समाज को यह चेतावनी भी कि भीड़ तंत्र के आगे कानून को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जाएगी

Pilibhit: दरिंदगी की हदें पार, जब भीड़ बन गई जल्लाद

गुरुवार को पीलीभीत के गजरौला थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। गांव में घूमते हुए एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को महज शक के आधार पर चोर मान लिया गया। न कोई सबूत, न कोई पुष्टि — सिर्फ शक, और उसी शक ने एक निर्दोष की रूह कंपा देने वाली पिटाई में बदल दिया।

गांव के कुछ लोगों ने पहले युवक को चारों ओर से घेर लिया। वह बार-बार कहता रहा कि वह चोर नहीं है, लेकिन किसी ने एक न सुनी। भीड़ ने उसे पकड़ कर खंभे से बांध दिया और लाठी-डंडों से तब तक पीटा, जब तक वह लहूलुहान होकर बेहोश नहीं हो गया

उसकी चीखें, उसका तड़पना, और हर चोट पर उसकी बेगुनाही की गुहार—सब कुछ गांव की गलियों में गूंजता रहा, मगर न तो किसी की संवेदना जागी, न ही किसी ने रोकने की कोशिश की।

Pilibhit: पुलिस की लापरवाही, मौके पर पहुंची लेकिन कार्रवाई नहीं

सूचना मिलने पर गजरौला थाना पुलिस मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन उन्होंने युवक को पीट रहे ग्रामीणों से छुड़ाने के सिवा कोई कार्रवाई नहीं कीकिसी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की गई, न ही कोई गिरफ्तारी हुई, जोकि अपने आप में पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी देखने को मिली। वीडियो वायरल होने लगे, जिनमें युवक को खंभे से बंधा और दर्द से कराहता देखा जा सकता है।

Pilibhit:  एसपी की सख्त कार्रवाई, थानाध्यक्ष पर गिरी गाज

जैसे ही मामले की जानकारी पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिषेक कुमार को मिली, उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक्शन लिया। एसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि,

“मानसिक रूप से कमजोर और निर्दोष युवक के साथ जिस तरह की बर्बरता हुई, वैसी क्रूरता किसी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन थाना पुलिस की लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हो गई।”

इसी के आधार पर गजरौला थाने के प्रभारी निरीक्षक जगदीप मालिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। एसपी की यह कार्रवाई केवल एक जवाबदेही नहीं, बल्कि विभागीय महकमे और आम जनता को यह सख्त संदेश भी है कि कानून से ऊपर कोई भीड़ नहीं होती।

भीड़तंत्र बनाम कानून: कब जागेगा समाज?

यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जहां चोर समझकर ग्रामीणों ने निर्दोष लोगों की खुलेआम पिटाई कर दी—कुछ मामलों में तो मौत भी हो चुकी है।

भीड़ के इस न्याय को “मॉब लिंचिंग” कहा जाता है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए कलंक से कम नहीं है। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि हम अभी भी इंसान से पहले भीड़ का हिस्सा बनना चुनते हैं।

मानवता को चाहिए नया आईना

इस पूरी घटना ने सिर्फ पुलिस प्रशासन ही नहीं, समाज की सोच पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। क्या अब हम इतनी जल्दी किसी को चोर, अपराधी या दोषी मानकर सज़ा देने लगेंगे? और अगर वो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो, तो क्या उसकी जान की कोई कीमत नहीं?

आज ज़रूरत है कि हम अपने भीतर झांकें और सोचें कि हम कैसा समाज बना रहे हैं—जहां बिना सुने, बिना समझे, बिना कानून के हाथ में डंडा लेकर इंसाफ़ किया जा रहा है

एसपी पीलीभीत की त्वरित कार्रवाई एक सकारात्मक संदेश है कि प्रशासन इस तरह की दरिंदगी के खिलाफ खड़ा है, लेकिन ये तभी काफी होगा जब समाज भी बदलेगा। कानून पर भरोसा रखना होगा, भीड़ के फैसलों पर नहीं।

इस घटना को सिर्फ एक खबर न समझा जाए, बल्कि इसे एक चेतावनी और आत्ममंथन की घड़ी माना जाए।

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