3

Recent News

हिमाचल की अनन्या नेगी की स्पीच हुई वायरल! संसद में ऐसा क्या बोला कि इंटरनेट पर जमकर शेयर हो रही Video, देखें..

अनन्या नेगी की स्पीच: हिमाचल प्रदेश की स्टूडेंट अनन्या नेगी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। संसद परिसर…

गाजीपुर में सपा प्रतिनिधिमंडल और ग्रामीणों में पत्थरबाजी, कई घायल। निशा विश्वकर्मा केस के बाद बढ़ा तनाव।
Shocking Video: सर्कस में अचानक बैरियर टूटा, टाइगर कूदकर पहुंचा दर्शकों के बीच! फिर जो हुआ वो दहलाने वाला..

Shocking Video: सोचिए, आप सर्कस में शो देख रहे हों और अचानक एक बाघ स्टेज से निकलकर आपके सामने आ…

War News: ईरान ने होर्मुज के रास्ते भारत आ रहे जहाज को कब्जे में लिया, इससे पहले 2 जहाजों पर हुई फायरिंग
Smart Meter Check: स्मार्ट मीटर सही है या गड़बड़? घर बैठे इन आसान तरीकों से ऐसे करें चेक..

Smart Meter Check: आजकल घरों में तेजी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जो बिजली खपत को डिजिटल तरीके…

3

Recent News

अनन्या नेगी की स्पीच: हिमाचल प्रदेश की स्टूडेंट अनन्या नेगी इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। संसद परिसर…

Shocking Video: सोचिए, आप सर्कस में शो देख रहे हों और अचानक एक बाघ स्टेज से निकलकर आपके सामने आ…

Smart Meter Check: आजकल घरों में तेजी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जो बिजली खपत को डिजिटल तरीके…

Breaking News

भक्तों के सम्मान से मिलता है परिवार को सुख: तुरंत पढ़ें विभीषण व विदुर जी के ये बड़े उदाहरण

Dharmik: धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों में ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं जहाँ भक्तों और पुण्यवान आत्माओं के सम्मान का महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण उदाहरण लंका नरेश रावण और भगवत भक्त विभीषण जी का है।

विभीषण के बाद रवां के पास न बचा था कोय 

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, जब तक विभीषण जी लंका में रहे, रावण के पापों के बावजूद लंका में सुख और समृद्धि बनी रही। लेकिन जैसे ही रावण ने विभीषणजी का अपमान किया और उन्हें लंका छोड़ने को कहा,

तभी से रावण के विनाश की शुरुआत हो गई। अंततः सोने की लंका का दहन हुआ और रावण के पीछे कोई रोने वाला भी नहीं बचा।

विदुर जी का भी हुआ था अपमान 

इसी प्रकार महाभारत काल में जब तक विदुर जी हस्तिनापुर में रहे, तब तक कौरवों का राज्य वैभवशाली रहा। मगर जैसे ही विदुर जी का अपमान हुआ और उन्होंने राज्य छोड़ दिया, उसी क्षण से हस्तिनापुर में पतन का दौर शुरू हो गया।

भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं विदुर जी को तीर्थ यात्रा के लिए भेजा और उनके जाते ही कौरवों के साम्राज्य का अंत हो गया।

मिलती है सीख – आगे पढ़िए 

इन प्रसंगों से यह स्पष्ट होता है कि जिस परिवार या समाज में भक्त और पुण्यवान आत्माएं रहती हैं, वहाँ सुख और आनंद स्वाभाविक रूप से बना रहता है।

इसलिए, किसी भी परिवार के सदस्य का अपमान न करें, विशेष रूप से उस व्यक्ति का नहीं जो भक्ति भाव से जीवन जीता हो।

सम्मान का मतलब होगा यह 

अतः हमें अपने परिवार में ऐसे सदस्यों का सम्मान करना चाहिए जो भक्ति और धर्म के मार्ग पर चल रहे हों। हो सकता है कि आज जो सुख और समृद्धि हमें मिल रही हो, वह उसी पुण्यात्मा के कारण मिल रही हो।

इसीलिए, सदैव ईश्वर और शास्त्रों के प्रति समर्पित रहें, परिवार के भक्तजनों को सम्मान दें और उनके मार्गदर्शन में चलने का प्रयास करें। जहाँ धर्म की जड़ मजबूत होती है, वहाँ अशुभ कर्म भी कदम रखने से डरते हैं।