True Devotion in Brij: प्रेमानंद बाबा को फलाहारी बाबा देंगे अपनी एक किडनी
वृंदावन की पावन भूमि पर इन दिनों एक खबर ने पूरे ब्रजवासियों का दिल छू लिया है। प्रेमानंद महाराज, जो भक्ति और प्रवचनों के लिए पूरे देश-विदेश में पूज्यनीय स्थान रखते हैं, उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। इस कारण वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। यह खबर सामने आने के बाद उनके भक्त, श्रद्धालु और शुभचिंतक गहरी चिंता में हैं और हर कोई उनकी सेहतमंदी की प्रार्थना कर रहा है।
True Devotion in Brij: राज कुंद्रा का ऑफर और फलाहारी बाबा की प्रतिक्रिया
कुछ दिन पहले यह चर्चा हुई थी कि फिल्म जगत से जुड़े एक सेलिब्रिटी ने प्रेमानंद महाराज को अपनी किडनी देने की इच्छा जताई थी। इस खबर ने भले ही सनसनी फैलाई हो, लेकिन इसके बाद मथुरा से एक और बड़ा मोड़ सामने आया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता और व्रतधारी संन्यासी दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी बाबा ने प्रेमानंद महाराज को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे किसी ऐसे व्यक्ति की किडनी स्वीकार न करें, जिसकी जीवनशैली मांस-मदिरा से जुड़ी हो।
फलाहारी बाबा ने अपने पत्र में लिखा कि यदि महाराज को किडनी चाहिए, तो वे स्वयं अपनी एक किडनी देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा –
“हम बृजवासी आपको भगवान समान मानते हैं। आपको अपनी जान तक देने में भी हमें कोई संकोच नहीं है। मेरी किडनी फलाहारी है, मांस और मदिरा से कोसों दूर है। अतः यदि आपको किडनी चाहिए, तो आप मेरी स्वीकार करें।”
True Devotion in Brij: ब्रज और महाराज का रिश्ता
फलाहारी बाबा ने यह भी कहा कि महाराज ब्रजवासियों से अपार प्रेम करते हैं और ब्रजवासी भी उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। ब्रजभूमि में श्री राधा-कृष्ण की भक्ति परंपरा सदियों से प्रेम और त्याग का संदेश देती आई है, और ऐसे में यह घटना प्रेम और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
True Devotion in Brij: फलाहारी बाबा का संकल्प
यह वही फलाहारी बाबा हैं जिन्होंने तीन वर्ष पहले यह संकल्प लिया था कि जब तक मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से मस्जिद नहीं हटेगी, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और अपने पैरों में पादुका भी धारण नहीं करेंगे। आज भी वे अपने इस व्रत पर कायम हैं और केवल फलाहार पर ही जीवन यापन कर रहे हैं। उनका यह तपस्वी जीवन और संकल्प उन्हें ब्रज में विशेष पहचान दिलाता है।
True Devotion in Brij: समाज के लिए संदेश
प्रेमानंद महाराज की बीमारी और फलाहारी बाबा का यह समर्पण समाज को यह गहरा संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका वास्तविक रूप त्याग और बलिदान में दिखाई देता है। एक संत का दूसरे संत के लिए अपना अंग समर्पित करने का संकल्प केवल व्यक्तिगत प्रेम नहीं, बल्कि ब्रजभूमि की उस परंपरा को दर्शाता है जहां “देह से बढ़कर देव” और “प्राणों से बढ़कर प्रभु” को माना गया है।
यह घटना आज न केवल मथुरा-वृंदावन, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय है। लोग इसे भक्ति, समर्पण और त्याग की अद्भुत मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
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