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Pilibhit Sharda River Erosion: शारदा नदी निगल रही किसानों की जमीन, प्रशासन मदद में जुटा – आज छोड़ा जाएगा 1.5 लाख क्यूसेक पानी

Pilibhit Sharda River Erosion: शारदा नदी का फिर से कहर, भू कटान ने निगल डाली किसानों की जमीन, प्रशासन सतर्क, DM ने हर संभव मदद का भरोसा दिया

पीलीभीत जनपद की पूरनपुर तहसील के अंतर्गत ट्रांस शारदा क्षेत्र में बसे हजारा ग्राम, हजारा फार्म और शास्त्रीनगर गांवों के सामने शारदा नदी ने एक बार फिर से भू कटान का सिलसिला शुरू कर दिया है। वर्षों बाद इस तरह की तबाही देखकर ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। लहलहाती फसलें और उपजाऊ कृषि भूमि नदी की तेज धार में समा रही हैं।

Pilibhit Sharda River Erosion: भू कटान और सरकारों की नाकामी

यह पहली बार नहीं है जब शारदा नदी ने ग्रामीणों को उजाड़ने का काम किया हो। वर्ष 1990 से लगातार यह नदी भू कटान करती रही है। कई सरकारें आईं और गईं, करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। नतीजा यह है कि ट्रांस शारदा क्षेत्र के लोग आज भी उसी भयावह स्थिति से जूझ रहे हैं।

हजारों एकड़ भूमि और गांव हुए समाहित

पिछले तीन दशकों में शारदा नदी के कटान ने हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि और वन विभाग की जमीन को निगल लिया है। दर्जनों घर पूरी तरह नदी की लहरों में समा चुके हैं। 1992-93 में हुए भीषण भू कटान को आज भी ग्रामीण भूल नहीं पाए हैं। उस समय सैकड़ों परिवारों को अपने घर-बार छोड़कर सड़कों पर खानाबदोश की तरह जिंदगी गुजारनी पड़ी थी।

किसानों की फिर टूटी उम्मीदें

काफी संघर्षों के बाद जिन कटान पीड़ितों ने अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की थी, अब वे फिर से उसी त्रासदी का सामना कर रहे हैं। तीस साल बाद शारदा नदी की धाराएं फिर से कृषि भूमि को अपनी आगोश में ले रही हैं। बीते कुछ दिनों में ही हजारा ग्राम के दर्जनभर किसानों की करीब 15-20 एकड़ जमीन फसलों समेत नदी में समा चुकी है।

Pilibhit Sharda River Erosion: किसानों की बेबसी और दर्द

कटान प्रभावित किसानों के चेहरे पर बेबसी साफ झलक रही है। जिन खेतों में उन्होंने दिन-रात मेहनत कर फसलें तैयार की थीं, वे अब नदी की धारा में बह रही हैं। पीढ़ियों से संजोई गई जमीन आंखों के सामने गायब होती देख उनका मनोबल टूट चुका है। कई किसान यह सोचकर रो पड़ते हैं कि आखिर वे अपने बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित करेंगे। उनके पास अब न तो बचत है और न ही कहीं और बसने की गुंजाइश।

विरोध और प्रशासन से गुहार

शुक्रवार को भू कटान पीड़ित किसान बड़ी संख्या में शारदा नदी के किनारे एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में शास्त्रीनगर और हजारा गांव पूरी तरह कटान की जद में आ जाएंगे। उनकी मांग है कि तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किए जाएं और नदी के कटान को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।

Pilibhit Sharda River Erosion: प्रशासन हुआ सतर्क, DM पीलीभीत ने दी जानकारी

पीलीभीत जनपद के ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर और भू कटान की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। ग्रामीणों की चिंता और विरोध प्रदर्शन के बीच डीएम पीलीभीत ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी खतरे को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने की कोशिश

डीएम ने बताया कि वर्तमान समय में शारदा नदी से लगभग डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा। प्रशासन ने संभावित खतरे को भांपते हुए नदी के किनारे अस्थायी तटबंध (टीमें) लगवाई हैं, ताकि भू कटान को नियंत्रित किया जा सके और बाढ़ का पानी गांवों तक न पहुंच पाए।

अफसर मौके पर, निगरानी कड़ी

डीएम ने जानकारी दी कि एक्सीयन तृतीय को मौके पर भेजा गया है, जो नदी की धारा और भू कटान की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही संबंधित विभागों की टीमों को भी सतर्क कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

Pilibhit Sharda River Erosion: बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद का भरोसा

प्रशासन ने साफ किया है कि बाढ़ पीड़ितों और भू कटान से प्रभावित ग्रामीणों की हर संभव मदद की जाएगी। चाहे अस्थायी राहत शिविर हों, खाद्य सामग्री की आपूर्ति हो या फिर तटबंध को मजबूत करने का कार्य—हर स्तर पर सक्रियता के साथ काम किया जाएगा।  ग्रामीणों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रशासन पूरी मुस्तैदी से हालात पर नजर रखे हुए है।

भविष्य का खतरा

अगर शारदा नदी के कटान को रोकने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो इस क्षेत्र के और भी गांव खतरे में आ जाएंगे। ग्रामीणों का मानना है कि हर साल सरकारें वादे करती हैं लेकिन नतीजा सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाता है। अब लोगों की जिंदगी और रोज़गार दोनों दांव पर लगे हुए हैं।

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