अभियान का संचालन प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी के नेतृत्व और जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) के समन्वय से किया जाएगा। इसमें पुलिस, राजस्व विभाग, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की सक्रिय भागीदारी रहेगी। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस जनहितैषी पहल में सहयोग करें।
जनहित और कानून से जुड़ा है प्रयास
यह पहल पूरी तरह से जनहित में और विधिसम्मत है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 में दोपहिया चालक और पीछे बैठने वाले यात्री दोनों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। वहीं, धारा 194D में उल्लंघन पर दंड का प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने भी राज्यों को हेलमेट अनुपालन पर विशेष जोर देने की सलाह दी है।
सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षा के लिए प्रेरित करना है। इसलिए इसका संदेश है हेलमेट पहले, ईंधन बाद में।
कई विभागों का संयुक्त प्रयास
परिवहन आयुक्त ने बताया कि इस अभियान से दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट पहनने की आदत विकसित होगी। पूर्व में किए गए ऐसे प्रयासों से यह साबित हुआ है कि ईंधन बिक्री पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
तेल कंपनियों से किया गया है अनुरोध
सरकार ने लिया सुरक्षा का संकल्प
योगी सरकार का मानना है कि नागरिक, प्रशासन और उद्योग मिलकर सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर चोटों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह अभियान केवल प्रवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन बचाने का एक ठोस संकल्प है।
इसलिए, 1 से 30 सितंबर तक प्रदेशभर में प्रत्येक नागरिक से अपेक्षा की जा रही है कि वह हेलमेट पहनकर ही पेट्रोल पंप पर जाए। आखिरकार, हेलमेट पहनना जीवन का सबसे सरल बीमा है।