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Jharkhand’s Liquor-Free Village Model: महिलाओं ने लिखी बदलाव की अनोखी कहानी, PM Modi ने की तारीफ़

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model: आरा केरम गांव की महिलाओं ने लिखी बदलाव की अनोखी कहानी

भारत के कई गांव आज भी शराब जैसी सामाजिक बुराइयों से जूझ रहे हैं, जहाँ पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी और घरेलू हिंसा की जड़ अक्सर नशे को माना जाता है। लेकिन झारखंड के रांची ज़िले का आरा केरम गांव इस अंधेरे से बाहर निकलकर पूरे देश के सामने एक मिसाल बन चुका है। यहां की महिलाओं ने सामूहिक संकल्प के साथ न केवल गांव को शराब मुक्त बनाया, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक अनुशासन का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जिसकी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में की थी।

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model:महिलाओं का साहस और शराबबंदी की पहल

कुछ साल पहले तक आरा केरम गांव में शराब का सेवन और कारोबार आम बात थी। पुरुष वर्ग अधिकतर नशे की गिरफ्त में रहता और इसका सीधा असर परिवार की हालत पर पड़ता। महिलाओं को घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता।

इसी पीड़ा ने गांव की महिलाओं को एकजुट कर दिया। उन्होंने तय किया कि अब अपने घर-परिवार और बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे। महिलाओं ने मिलकर शराब बनाने और बेचने वालों का बहिष्कार शुरू किया, यहां तक कि जो पुरुष शराब पीते पाए गए उन्हें भी सामूहिक रूप से रोका और जिम्मेदार ठहराया। धीरे-धीरे पूरे गांव में एक सख्त नियम बन गया—गांव में न तो शराब बनेगी और न बिकेगी, कोई पियेगा तो उसे दंड मिलेगा।

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model:आत्मनिर्भरता और सामाजिक नियमों की नींव

शराबबंदी के साथ-साथ आरा केरम गांव ने कई अन्य सामाजिक नियम भी अपनाए। इन नियमों ने गांव को न केवल नशा मुक्त बनाया, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की राह पर भी आगे बढ़ाया।

गांव के लोग नियमित श्रमदान करने लगे।

खुले में शौच की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगी।

पशुओं की लापरवाह चराई बंद कराई गई।

पेड़-पौधों की कटाई पर रोक लगाई गई और पर्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण किया गया।

दहेज प्रथा और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाई गई।

इन नियमों ने गांव की जीवनशैली बदल दी। आज गांव साफ-सुथरा, अनुशासित और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model:पुरुषों को जिम्मेदार बनाना

गांव की महिलाओं ने सिर्फ विरोध तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि पुरुषों को भी जिम्मेदारी का अहसास कराया। जो पुरुष शराब पीकर घर आते, उन्हें सार्वजनिक तौर पर टोका गया और सामूहिक बैठक में फटकार लगाई गई। धीरे-धीरे पुरुषों ने भी इसे स्वीकार किया और परिवार, खेती-बाड़ी और आजीविका की ओर ध्यान देना शुरू किया।

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model:सरकार की पहल और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना

महिलाओं के इस आंदोलन को देखते हुए झारखंड सरकार ने भी कई योजनाएँ शुरू कीं। पहले जो महिलाएँ परंपरागत रूप से चावल की शराब (हांडिया) बेचकर परिवार चलाती थीं, उन्हें अब अन्य आजीविका के साधनों से जोड़ा गया।

महिलाओं को पशुपालन, खेती, दुकानदारी और सिलाई-कढ़ाई जैसे कामों के लिए प्रशिक्षण और ऋण उपलब्ध कराए गए।

हजारों महिलाएँ इस अभियान से जुड़कर सम्मानजनक और सुरक्षित आजीविका की ओर बढ़ीं।

इस पहल ने न केवल गांव को शराब मुक्त बनाया बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से भी सशक्त कर दिया।

Jharkhand’s Liquor-Free Village Model:राष्ट्र स्तर पर पहचान

आरा केरम गांव की यह कहानी इतनी प्रभावशाली बनी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह गांव देश के लिए प्रेरणा है, जहाँ महिलाओं ने समाज सुधार का नेतृत्व किया और एक बेहतर भविष्य की नींव रखी।

आरा केरम गांव की सफलता यह दिखाती है कि जब समाज की महिलाओं का संकल्प और सामूहिक शक्ति साथ आती है, तो असंभव लगने वाली लड़ाई भी जीती जा सकती है। शराब जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाकर इस गांव ने न केवल अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि पूरे देश को एक राह दिखाई।

यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस बदलाव की गवाही है जो तब संभव होता है जब महिलाएँ आगे बढ़कर परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण बनाने का संकल्प लेती हैं।

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