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पीलीभीत: आत्मनिर्भरता क्रांति की सजीव झलक, महिला समूह का काम बेमिसाल-CDO

पीलीभीत: महिला समूहों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। सरकार योजनाओं से महिलाओं को मिला मजबूत सहारा, गांवों में रोजगार और विकास में तेजी।

गजरौला कला सहराई में बदलते ग्रामीण विकास की तस्वीर

तुलसी प्रेरणा एवं हौसला संकुल समिति का भव्य उद्घाटन—दीदियों को मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान!

पीलीभीत के ब्लॉक मरौरी के ग्राम पंचायत गजरौला कला सहराई में आज 20 दिसंबर 2025 को ग्रामीण विकास का एक नया अध्याय जुड़ गया।
यहाँ तुलसी प्रेरणा संकुल स्तरीय समिति तथा हौसला प्रेरणा संकुल स्तरीय समिति (ललपुरिया साहब सिंह) का शानदार उद्घाटन हुआ, जिसमें प्रशासन से लेकर(ग्रासरूट) स्तर तक के सभी प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
पूरा कार्यक्रम ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सरकार का “आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत” का सपना धरातल पर उतर रहा हो।

जहाँ दीदियों की मुट्ठी में बदली किस्मत की चाबी!

ग्राम सभा में जैसे ही उद्घाटन की औपचारिकता पूरी हुई,
दीदी–बहनों के चेहरों पर आत्मविश्वास की चमक साफ नजर आ रही थी।
यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था—
यह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक क्रांति की शुरुआत थी।

सरकारी योजनाओं से जुड़े समूहों की दीदियाँ आज न सिर्फ घर-परिवार संभाल रही हैं,
बल्कि अब रोजगार, आय, और सशक्तिकरण का नेतृत्व भी कर रही हैं।
आज का यह आयोजन इसी शक्तिशाली परिवर्तन की मिसाल बन गया।

 कार्यक्रम का उद्देश्य —सरकार का भरोसा, जनता का उत्साह

इस मौके पर कई महत्वपूर्ण अधिकारी उपस्थित रहे—

मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ)

खंड विकास अधिकारी (बीडीओ)

एडीओ (आईएसबी)

एडीओ पंचायत

जिला मिशन प्रबंधक

ब्लॉक मिशन प्रबंधक

ग्राम पंचायत सचिव

ग्राम प्रधान

सीएलएफ के पदाधिकारी

विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की दीदियाँ

यह उपस्थिति अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस मिशन को सिर्फ योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों का आर्थिक आधार बनाना चाहती है।

 सीडीओ ने रखा भविष्य का रोडमैप —

“महिला समूह आज आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं”

मुख्य विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा—

“राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में क्रांति ला रहा है।”

उन्होंने बताया कि—

समूह से जुड़ी दीदियाँ आज आत्मनिर्भर होने के साथ परिवार को भी आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि हर ग्रामीण महिला आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मविश्वासी बने।

उन्होंने पंच सूत्र—नियमित बैठक, नियमित बचत, नियमित लेन-देन, समय पर पुनर्भुगतान और सामूहिक निर्णय—पर जोर दिया।

समय से कर्ज चुकाने पर संकुल समिति मजबूत होती है और इससे क्षेत्र में नए रोजगार और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं।

उनकी बातों से साफ था कि सरकार चाहती है कि
“हर दीदी आर्थिक रूप से मजबूत होकर अपने परिवार की तरक्की की शक्ति बने।”

दीदियों को मिल रहे हैं कई लाभ —

जीवन और आजीविका दोनों में तेजी से सुधार

इस कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि—

समूहों के माध्यम से महिलाएँ छोटे-बड़े रोजगार शुरू कर रही हैं।

सस्ते ब्याज दर पर बैंक लोन आसानी से उपलब्ध हो रहा है।

दीदियों को बकरी पालन, डेयरी, सिलाई, मसाला निर्माण, फूड प्रोसेसिंग, दुकानें, कृषि आधारित कार्य जैसे कई क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

संकुल समितियों के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रहा है।

सिंगल विंडो सिस्टम जैसा सरल मॉडल काम को और आसान बनाता है।

सरकार की मंशा साफ है—
“रोजगार गांव में पैदा होगा, तरक्की गांव में ही होगी, और नेतृत्व दीदियाँ करेंगी।”

यह कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण था?—गांव की महिलाओं को मिला सुनहरा मौका

इस उद्घाटन का मूल उद्देश्य था—

महिलाओं को संगठित करना

उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना

नया रोजगार उपलब्ध कराना

परिवार की स्थायी आय बढ़ाना

समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना

यह आयोजन बताता है कि सरकार चाहती है—

“हर गांव आत्मनिर्भर बने, और हर महिला वित्तीय रूप से सशक्त।”

आज का दिन दीदियों के लिए ‘आत्मनिर्भरता उत्सव’ साबित हुआ

गजरौला कला सहराई में हुआ यह आयोजन सिर्फ औपचारिकता नहीं था,
बल्कि यह विश्वास का संदेश था कि—

 महिलाएँ अब सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था का नेतृत्व भी करेंगी।
 सरकार हर कदम पर उनके साथ है।
संकुल समितियाँ ग्रामीण विकास की नई धुरी बनेंगी।

इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि
गांवों की शक्ति अब जाग चुकी है—और यह शक्ति है महिलाओं की।