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मुंह में यूरिन कर दूंगी’ महिला दरोगा की घिनौनी धमकी- SSP ने किया लाइनहाजिर, देखिये वायरल वीडियो

मेरठ में महिला दरोगा ने कार सवार कपल को दी “मुंह में यूरिन कर दूंगी” की घिनौनी धमकी, वीडियो वायरल होते ही SSP ने किया लाइनहाजिर।

मेरठ की सड़कों पर कानून शर्मसार, वर्दी का नंगा नाच — ‘मुंह में यूरिन कर दूंगी’ जैसी घिनौनी धमकी देने वाली महिला दरोगा लाइनहाजिर

मेरठ की सड़कों से सामने आया यह मामला सिर्फ बदसलूकी नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में सत्ता के नशे का नंगा प्रदर्शन है। जिस पुलिस पर जनता की सुरक्षा, सम्मान और विश्वास की जिम्मेदारी होती है, वही पुलिस अगर खुलेआम सरेबाजार अभद्र भाषा, धमकी और दबंगई पर उतर आए, तो सवाल सिर्फ एक महिला दरोगा पर नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर खड़ा होता है।

मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित बॉम्बे बाजार में घटित इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला दरोगा ने बीच सड़क, भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम के बीच कार सवार युवक और युवती के साथ जिस स्तर की बदसलूकी की, उसने हर सभ्य नागरिक को शर्म से सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया।

 मामूली सी बात  पर भड़की वर्दीधारी महिला दरोगा 

यह पूरा विवाद कार को साइड न मिलने जैसी बेहद सामान्य बात से शुरू हुआ। बॉम्बे बाजार इलाके में ट्रैफिक जाम लगा हुआ था, सड़क पर वाहन रेंग रहे थे और चारों तरफ जाम था। इसी दौरान एक महिला दरोगा की कार भी फंसी हुई थीं। आगे चल रही कार से साइड न मिलने पर उनका आपा खो बैठना शुरू हुआ।

पहले तो कार के अंदर से ही गाली-गलौच और अपशब्द कहे गए, लेकिन जब इससे भी मन नहीं भरा तो महिला दरोगा गाड़ी से उतरकर सीधे कार सवार कपल पर टूट पड़ीं। यहीं से शुरू हुआ वह शर्मनाक तमाशा, जिसने कानून की गरिमा को कुचल दिया।

‘मुंह में पेशाब कर दूंगी’ — जब महिला दरोगा ने मर्यादा लांघ दी

भीड़ भरी सड़क पर महिला दरोगा ने युवक और युवती को खुलेआम धमकाना शुरू किया। आरोप है कि उन्होंने न केवल बेल्ट से पीटने की धमकी दी, बल्कि हद तब पार हो गई जब उन्होंने “मुंह में यूरिन कर दूंगी” जैसी घिनौनी और अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किया।

यह शब्द सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं थे, बल्कि पूरे समाज, महिलाओं की गरिमा और पुलिस की छवि पर सीधा हमला थे। कार सवार युवक ने जब इसका विरोध किया और सवाल उठाया कि उससे इस तरह क्यों बात की जा रही है, तो दरोगा और ज्यादा उग्र हो गईं।

वर्दी का रौब दिखाते हुए जेल भेजने, सबक सिखाने और ताकत दिखाने की धमकियां दी गईं। यह सब कुछ दिनदहाड़े, सरेआम और दर्जनों लोगों के सामने हुआ।

भीड़ जुटी, कैमरे चले और सच हुआ कैद

घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। किसी ने भी सोचा नहीं था कि एक पुलिस अधिकारी इस तरह का व्यवहार करेगी । लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला दरोगा आपे से बाहर हैं, आवाज ऊंची है, शब्द जहरीले हैं और रवैया पूरी तरह दबंग और तानाशाही से भरा हुआ है। यही वीडियो बाद में उनके लिए सबसे बड़ा सबूत बन गया।

कौन है विवादित महिला दरोगा?

वायरल वीडियो में दिख रही महिला दरोगा का नाम रतना राठी बताया गया है। जानकारी के अनुसार वह अलीगढ़ में तैनात हैं। बताया गया कि वह किसी सरकारी कार्य से मुजफ्फरनगर गई थीं और लौटते समय मेरठ से गुजर रही थीं।

लेकिन सवाल यह नहीं कि वह कहां तैनात थीं या कहां जा रही थीं। सवाल यह है कि क्या सरकारी काम पर निकली एक पुलिस अधिकारी को जनता से इस तरह पेश आने का अधिकार है?

वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आया प्रशासन

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, जनता का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर महिला दरोगा के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। लोग पूछने लगे कि अगर आम नागरिक ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया होता तो क्या उसे अब तक सलाखों के पीछे नहीं डाल दिया जाता?

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी। मेरठ पुलिस ने पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी। इसके बाद अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने तत्काल प्रभाव से महिला दरोगा रत्ना राठी को लाइनहाजिर कर दिया

लाइनहाजिर, लेकिन क्या इतना काफी है?

महिला दरोगा को लाइनहाजिर किया जाना निश्चित रूप से एक बड़ा कदम है, लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता। यह मामला सिर्फ अनुशासनहीनता का नहीं, बल्कि मानसिकता और वर्दी के दुरुपयोग का है।

प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि तहरीर मिलने पर विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कठोर विभागीय कार्रवाई भी संभव है। इसमें निलंबन, चार्जशीट या अन्य दंडात्मक कार्रवाई से इनकार नहीं किया गया है।

जनता के मन में उठते तीखे सवाल

इस वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर प्रयोगकर्ताओं ने महिला दरोगा के अभद्र व्यवहार, धमकियों और पद का गुनाहगार इस्तेमाल करने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या वर्दी की ताकत का ऐसे व्यक्तिगत विवाद में दुरुपयोग करना पुलिस की जिम्मेदारी के अनुरूप है? कई लोग इसे प्रशासनिक दांवपेंच और पुलिस संस्कृति में सुधार की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं।

आम जनता का कहना है कि अगर पुलिस की वर्दी और सत्ता की छवि ही इस तरह के व्यवहार से धूमिल होती है, तो आम आदमी में कानून–व्यवस्था के प्रति विश्वास कैसे कायम रह सकता है? — यह सवाल अब प्रशासन को जवाब देना होगा।

 एक घटना, कई सबक

मेरठ की यह घटना एक चेतावनी है। चेतावनी उस सिस्टम के लिए, जो कभी-कभी अपने ही नियम भूल बैठता है। चेतावनी उन अफसरों के लिए, जो वर्दी को सेवा का प्रतीक नहीं, पद को हथियार समझने लगते हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है, ताकि भविष्य में कोई भी वर्दीधारी यह न भूले कि कानून जनता के लिए है, जनता कानून के डर से जीने के लिए नहीं